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देवरिया में Cos 8279 गन्ने पर भी लाल सड़न, 3 लक्षण दिखें तो फौरन करें ये काम

✍️ Aamir Raza · 🗓 05 Nov 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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देवरिया में Cos 8279 गन्ने पर भी लाल सड़न, 3 लक्षण दिखें तो फौरन करें ये काम

देवरिया के बनकटा क्षेत्र के गन्ना किसानों की परेशानी बढ़ गई है। जिस Cos 8279 प्रजाति को उन्होंने बेहतर पैदावार और अच्छी चीनी रिकवरी की उम्मीद में बोया था, उसी के खेतों में लाल सड़न रोग के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। दैनिक जागरण की 5 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक किसानों ने गन्ना विभाग और चीनी मिल प्रबंधन से प्रभावित खेतों का तुरंत निरीक्षण कर जांच और उपचार की मांग की है।

खबर में यह भी साफ कहा गया है कि बीमारी की असली प्रकृति और नुकसान का आकलन कृषि विशेषज्ञों की जांच के बाद ही हो सकेगा। यानी अभी लक्षण दिखे हैं, पुष्टि जांच के बाद होगी। फिर भी किसानों की चिंता बेवजह नहीं है, क्योंकि लाल सड़न गन्ने का सबसे खतरनाक रोग माना जाता है।

भरोसे वाली किस्म पर सवाल क्यों उठा

Cos 8279 उन नई प्रजातियों में से है जिन्हें किसानों ने को. 0238 की जगह अपनाया था, जिस पर लाल सड़न ने महामारी का रूप ले लिया था। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के शोध के मुताबिक को. 0238 की जगह लेने वाली प्रजातियों में कोशा. 8279 का नाम भी शामिल है।

अब उसी प्रजाति पर रोग के लक्षण दिखना किसानों के भरोसे को हिला रहा है। यह बात सिर्फ देवरिया तक सीमित नहीं है। ट्रैक्टर जंक्शन की 1 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक सीतापुर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और शाहजहांपुर में को. 0238 की फसल पर लाल सड़न से 80 फीसदी तक फसल सूखने की खबरें आई हैं। हापुड़ के गढ़ खादर क्षेत्र में भी हाल ही में यही रोग दिखा है।

खेत में पहचानने के 3 लक्षण

लाल सड़न को गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है। यह कोलेटोट्राइकम फाल्केटम नामक फफूंद से होता है और संक्रमित बीज गन्ने व मिट्टी के जरिए फैलता है। एक ही खेत में साल दर साल गन्ना बोने से इसका खतरा बढ़ जाता है। किसान अपने खेत में ये तीन लक्षण देखें:

पत्तियां ऊपर से सूखने लगें: प्रभावित पौधे की तीसरी चौथी पत्ती पीली पड़ने लगती है और फिर पूरा पौधा ऊपर से नीचे की तरफ सूखने लगता है। शुरुआत में यह एक दो पौधों में दिखता है, फिर धीरे धीरे फैलता है।

गन्ना चीरने पर अंदर लाल रंग: गन्ने को बीच से चीरकर देखें तो भीतरी भाग लाल नजर आता है, जिसमें सफेद रंग के धब्बे बने होते हैं। यह इस रोग की सबसे पक्की पहचान मानी जाती है।

शराब जैसी गंध और गांठों से टूटना: सूखे पौधों से खट्टी शराब जैसी गंध आने लगती है। गन्ना गांठों से आसानी से टूट जाता है। ये तीनों लक्षण एक साथ दिखें तो इसे हल्के में न लें।

पैदावार और रिकवरी पर क्या असर पड़ेगा

लाल सड़न लगने के बाद गन्ने की मिठास घट जाती है। पौधा धीरे धीरे सूखता है और वजन भी कम हो जाता है। मिल में ऐसे गन्ने की रिकवरी कम आती है, जिससे किसान की कमाई सीधे घटती है। सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि एक बार पौधा संक्रमित हो जाए तो उसका कोई पक्का इलाज नहीं है। इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है।

किसान अभी क्या करें

उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक किसान ये कदम उठा सकते हैं:

संक्रमित पौधे उखाड़कर नष्ट करें: लक्षण दिखते ही प्रभावित पौधों को जड़ से उखाड़कर खेत से बाहर निकालकर जला दें। जिस जगह से पौधा उखाड़ा है, वहां 10 से 20 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर का बुरकाव करें। रोगग्रस्त फसल की पेड़ी का उपयोग अगले साल बीज के तौर पर बिल्कुल न करें।

फफूंदनाशक का छिड़काव करें: 0.1 फीसदी थायोफेनेट मिथाइल या कार्बेन्डाजिम का छिड़काव करें। जड़ों के पास मिट्टी में 0.2 प्रतिशत घोल डालने की सलाह भी दी जाती है। दवा का इस्तेमाल लेबल पर लिखी मात्रा के हिसाब से ही करें।

बीज उपचार और किस्म बदलें: अगली बुवाई से पहले बीज गन्ने को फफूंदनाशक घोल से उपचारित करें और रोग रोधी किस्में बोएं। विशेषज्ञ को. 15023, कोलख 14201 और कोसा 13235 जैसी किस्मों का नाम लेते हैं। एक ही खेत में हर साल गन्ना न बोएं, गेहूं, धान या हरी खाद के साथ फसल चक्र अपनाएं।

विभाग से संपर्क करें: लक्षण दिखते ही गन्ना विभाग के स्थानीय अधिकारी या मिल के गन्ना विकास कर्मी को सूचना दें। जांच के बाद ही साफ होगा कि बीमारी कितने खेतों में फैली है।

आगे क्या देखना होगा

देवरिया में जांच के बाद यह साफ होगा कि Cos 8279 पर दिखे लक्षण कितने व्यापक हैं। अगर बीमारी सीमित खेतों में है तो समय पर उठाए गए कदम नुकसान रोक सकते हैं। लेकिन अगर यह फैलती है तो किसानों को बीज और किस्म की योजना दोबारा सोचनी पड़ेगी।

किसानों के लिए अभी सबसे जरूरी काम खेत की निगरानी है। रोज खेत जाएं, पत्तियों और गन्ने की हालत देखें और लक्षण दिखते ही विभाग को बताएं। बीमारी छिपाने से वह रुकती नहीं, फैलती है।

मुख्य बातें

  • देवरिया के बनकटा क्षेत्र में Cos 8279 गन्ने पर लाल सड़न रोग के लक्षण दिखे, किसानों ने गन्ना विभाग और मिल से जांच की मांग की है।
  • पत्तियों का ऊपर से सूखना, गन्ना चीरने पर अंदर लाल रंग के साथ सफेद धब्बे और शराब जैसी गंध इस रोग की पहचान हैं।
  • संक्रमित पौधे उखाड़कर जलाएं, ब्लीचिंग पाउडर डालें, फफूंदनाशक छिड़कें और रोगग्रस्त फसल की पेड़ी को बीज के तौर पर इस्तेमाल न करें।

स्रोत: दैनिक जागरण (5 नवंबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (1 नवंबर 2026), उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर (कृषिलोक)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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