12 अक्टूबर को दिल्ली में गन्ना-भाव बैठक: यूपी के SAP पर क्या असर पड़ेगा

कल सुबह नई दिल्ली में होने वाली एक बैठक पर कल ही नहीं, परसों का भी दारोमदार है। 12 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसान नेता बैठेंगे। बैठक में मांगें नहीं मानी गईं तो 13 अक्टूबर से कर्नाटक के सभी जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रीय राजमार्ग अनिश्चितकाल के लिए जाम होंगे। यह ऐलान कर्नाटक राज्य रैयत संघ और ग्रीन ब्रिगेड के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष महेशगौड़ा सुबेदार ने 9 अक्टूबर को कालाबुरागी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया था। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक संगठन का साफ कहना है कि बैठक से संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो आंदोलन और तेज होगा।
दिल्ली की बैठक में कौन-कौन बैठेगा
इस बैठक की जड़ हुब्बल्ली में है। सितंबर के आखिर में कर्नाटक के गन्ना किसान केंद्रीय मंत्री जोशी के हुब्बल्ली स्थित आवास के बाहर जमा हुए थे। इसके बाद जोशी ने किसानों को दिल्ली आकर बातचीत का न्यौता दिया। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार 12 अक्टूबर को नई दिल्ली के कृषि भवन में होने वाली इस बैठक में जोशी के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहेंगे और संबंधित मंत्रालयों के अधिकारी किसानों की मांगों के समाधान पर चर्चा करेंगे।
एग्रीइंसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में महाराष्ट्र के किसान संगठन भी शामिल होंगे। दोनों राज्यों की संयुक्त मांग है कि चीनी का MSP ₹50 प्रति किलो और सी-हेवी शीरे का भाव ₹70 प्रति लीटर हो। किसानों का कहना है कि खाद, कीटनाशक और कटाई-ढुलाई की लागत बढ़ने से खेती महंगी होती जा रही है।
कर्नाटक यूपी का मॉडल क्यों मांग रहा
इस पूरे आंदोलन में यूपी का नाम बार-बार आ रहा है। कर्नाटक के किसान संगठनों ने यूपी और उत्तराखंड की तर्ज पर कर्नाटक में भी राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) लागू करने की मांग की है। जोशी खुद 30 सितंबर को कह चुके हैं कि यूपी, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और तमिलनाडु में राज्य सरकारें केंद्र के FRP के ऊपर अनिवार्य SAP तय करती हैं, जबकि कर्नाटक ऐसा नहीं करता। केंद्र ने 2026-27 पेराई सत्र के लिए गन्ने का FRP ₹365 प्रति क्विंटल (10.25% रिकवरी पर) मंजूर किया है।
दिलचस्प यह है कि यूपी के किसानों को 2026-27 सत्र के SAP की घोषणा का इंतजार अभी खुद बाकी है। 9 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में गन्ना मूल्य बढ़ोतरी का ऐलान नहीं हुआ। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 सत्र के लिए अगेती किस्म का SAP ₹30 बढ़ाकर ₹400 प्रति क्विंटल किया गया था। किसान इंडिया की खबर के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पिछले 9 वर्षों में गन्ना किसानों को 3.30 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान हुआ है और प्रदेश में 122 चीनी मिलें संचालित हैं।
महाराष्ट्र की मांगें: चीनी MSP ₹50, शीरा ₹70
महाराष्ट्र में भी आग सुलग रही है। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने चेतावनी दी है कि गन्ने का भाव तय हुए बिना पेराई शुरू न हो। किसान इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक शेट्टी ने मांग रखी है कि गन्ने का भाव कम से कम ₹5,000 प्रति टन मिलना चाहिए। उनका कहना है कि सूखे और बीमारियों से किसान पहले ही नुकसान झेल रहे हैं और बढ़ती लागत में भाव न बढ़ा तो किसान कर्ज में डूब जाएंगे।
कर्नाटक की बाकी मांगें भी यूपी के किसानों के दर्द से अलग नहीं हैं। सुबेदार का आरोप है कि कटाई मजदूर किसानों से ₹8,000 से ₹10,000 तक अतिरिक्त वसूलते हैं। संगठन कटाई-ढुलाई का खर्च मिलों पर डालने, 14 दिन में भुगतान, देरी पर 15% ब्याज, एपीएमसी में डिजिटल कांटे और एथेनॉल-शीरा जैसे उप-उत्पादों की कमाई को भाव में शामिल करने की मांग कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी 6 अक्टूबर को बकाया भुगतान पर 14 दिन और 15% ब्याज को किसानों की अनिवार्य सुरक्षा बताया था। द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अदालत के रिकॉर्ड में मिलों से ₹1,936 करोड़ की वसूली बाकी दर्ज है।
यूपी के किसान के लिए इसका मतलब क्या है
पहली बात: कर्नाटक का आंदोलन यूपी सरकार पर भी दबाव बनाएगा, क्योंकि कर्नाटक के किसान खुद यूपी के SAP मॉडल को आदर्श बता रहे हैं। जब दूसरे राज्य कह रहे हों कि यूपी जैसा भाव दीजिए, तो यूपी के किसानों को 2026-27 SAP की घोषणा में देरी खलती है।
दूसरी बात: चीनी का MSP 2018 से ₹31 प्रति किलो पर अटका है, जबकि बाजार में चीनी ₹40 से ₹47 प्रति किलो बिक रही है। जोशी का तर्क है कि चीनी के MSP में बढ़ोतरी से गन्ने के भाव अपने आप नहीं बढ़ते, क्योंकि दोनों सीधे जुड़े नहीं हैं। लेकिन अगर बैठक में चीनी MSP ₹50 पर सहमति बनती है, तो मिलों की कमाई बढ़ेगी और किसानों के लिए भाव बढ़ाने का तर्क मजबूत होगा।
तीसरी और सबसे अहम बात: पेराई सत्र दरवाजे पर है। रिपोर्टों के मुताबिक यूपी में मिलें 20 अक्टूबर के आसपास खुलने लगेंगी। ऐसे में 12 अक्टूबर की बैठक से SAP, एथेनॉल कीमत और भुगतान समय-सीमा पर जो रुख साफ होगा, वही यूपी के किसानों के इस सत्र का गणित तय करेगा।
मुख्य बातें
- 12 अक्टूबर को दिल्ली में जोशी और चौहान के साथ कर्नाटक-महाराष्ट्र के किसान नेताओं की बैठक; कर्नाटक ने 13 अक्टूबर से हाईवे जाम की चेतावनी दी है।
- कर्नाटक के किसान यूपी-उत्तराखंड की तर्ज पर SAP मांग रहे हैं; 2026-27 FRP ₹365/क्विंटल, यूपी के 2026-27 SAP की घोषणा अभी बाकी।
- चीनी MSP ₹50/किलो और सी-हेवी शीरा ₹70/लीटर की संयुक्त मांग; सुप्रीम कोर्ट के 6 अक्टूबर के आदेश से 14 दिन में भुगतान और 15% ब्याज की मांग को बल मिला है।
स्रोत: द हिंदू, डेक्कन हेराल्ड, किसान इंडिया, द टाइम्स ऑफ इंडिया, चिनीमंडी
