दया शुगर मिल बंदी संकट: 15 नवंबर डेडलाइन, 100 गांवों का गन्ना कहां जाएगा?

सहारनपुर की गागलहेड़ी चीनी मिल को ठेके पर लेने वाले अरुण कुमार भाटी का दावा है कि 15 नवंबर से पेराई शुरू हो जाएगी। दूसरी तरफ गन्ना आयुक्त ने मिल का गन्ना क्षेत्र आसपास की दूसरी चीनी मिलों को बांट दिया है। जब एक ही मिल को लेकर दो अलग तस्वीरें सामने आएं, तो करीब 100 गांवों के किसानों का परेशान होना स्वाभाविक है। 22 अक्टूबर को किसान गागलहेड़ी से 15 किलोमीटर पैदल चलकर सहारनपुर कलक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
15 नवंबर का दावा, 51% मरम्मत का हिसाब
दैनिक जागरण की 16 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक सहारनपुर जिले में आठ चीनी मिलें हैं, जिनमें से टोडरपुर मिल पिछले साल से ही बंद पड़ी है। इस सत्र में जिले में सबसे पहले देवबंद मिल 28 अक्टूबर को पेराई शुरू करेगी, जबकि गागलहेड़ी का नंबर सबसे आखिर में आ सकता है। मिल अनुबंध पर लेने वाले अरुण कुमार भाटी ने 15 नवंबर की संभावित तिथि बताई है।
रॉयल बुलेटिन के मुताबिक मिल प्रबंधन का कहना है कि मरम्मत कार्य का करीब 51 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। किसानों की तरफ से इस दावे पर सीधा सवाल है। कुछ किसानों का कहना है कि मिल में जरूरी मरम्मत का काम अभी शुरू ही नहीं हुआ है। कुछ किसानों ने मिल के महाप्रबंधक धनराज पर अधिकारियों को गलत जानकारी देने का आरोप भी लगाया है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गन्ना विभाग का कहना है कि मिल प्रबंधन की ओर से गन्ना सुरक्षण का प्रस्ताव ही नहीं दिया गया, और मरम्मत की प्रगति भी साफ नहीं हो पाई। इसी आधार पर गन्ना आयुक्त ने मिल का गन्ना क्षेत्र दूसरी मिलों को डायवर्ट कर दिया और उन मिलों को 15 दिन के भीतर गन्ना खरीद शुरू करने के निर्देश दिए।
पंचायत से मार्च तक: आक्रोश कैसे भड़का
धारा लक्ष्य समाचार की 20 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की पंचायत निरीक्षण भवन मक्काबांस में हुई थी। अध्यक्षता मास्टर रघुवीर ने की और संचालन नरेंद्र यादव ने किया। इसी पंचायत में तय हुआ कि 22 अक्टूबर को किसान गागलहेड़ी के अग्रसेन चौक पर जुटेंगे और पैदल मार्च करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे।
इससे पहले चुन्हेटी शेख की पंचायत में भी यही फैसला हुआ था, लेकिन अरुण भाटी के मिल लीज पर लेने के आश्वासन के बाद आंदोलन टाल दिया गया था। मंडल सचिव डॉ. नरेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रबंधन किसानों को गुमराह कर रहा है और शासन ने भी अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। मिल कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने भी पंचायत में बताया कि प्रबंधन ने अब तक जरूरी सामान उपलब्ध नहीं कराया है और मरम्मत का कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
तय कार्यक्रम के मुताबिक किसान 15 किलोमीटर का मार्च निकालकर कलक्ट्रेट पहुंचे और मिल को समय से चालू कराने की मांग के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा।
2010 से 2017: वह पुराना घाव जो भरना भूल गया
रॉयल बुलेटिन के मुताबिक यह मिल 2010 में बसपा सरकार के दौरान बंद हो गई थी। करीब सात साल तक संचालन ठप रहा। 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद तत्कालीन गन्ना मंत्री सुरेश राणा के प्रयासों से मिल फिर से चालू हुई थी।
उस दौर में स्थानीय पेराई की सुविधा न होने से गन्ना आपूर्ति की व्यवस्था बिगड़ी थी और किसानों को दूर की मिलों पर निर्भर रहना पड़ा था। अब जब गन्ना क्षेत्र फिर दूसरी मिलों को आवंटित कर दिया गया है, तो किसानों को डर है कि वही पुरानी स्थिति दोहराई जा सकती है। यही डर 22 अक्टूबर के मार्च में गुस्से में बदला।
राजनीति भी सक्रिय: विधायक ने सीएम को लिखा पत्र
मुद्दा अब सिर्फ किसानों के धरने तक सीमित नहीं रहा। सहारनपुर देहात से विधायक आशु मलिक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मिल का पेराई सत्र समय से शुरू कराने और गन्ना क्षेत्र आवंटन की निष्पक्ष जांच की मांग की है। किसानों के अलावा मिल के 300 से ज्यादा कर्मचारियों के परिवारों की चिंता भी बढ़ी हुई है, क्योंकि मिल का संचालन स्थानीय रोजगार और परिवहन, मरम्मत जैसी सहायक गतिविधियों से जुड़ा है।
किसान के लिए इसका मतलब क्या है
फिलहाल दया शुगर मिल को स्थायी रूप से बंद करने का कोई पुष्ट आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है, लेकिन गन्ना क्षेत्र का दूसरी मिलों को डायवर्ट होना इस पेराई सत्र में मिल के संचालन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
अगर मिल समय पर चालू नहीं होती, तो इलाके के किसानों को गन्ना दूर की मिलों में भेजना पड़ेगा। भाड़ा और समय दोनों बढ़ेंगे, पर्ची और क्रय केंद्र की व्यवस्था बदलनी पड़ेगी और भुगतान की अनिश्चितता भी रह सकती है। गन्ना आयुक्त ने नई मिलों को 15 दिन के भीतर खरीद शुरू करने को कहा है। किसान अब यही मांग रहे हैं कि नई आवंटन व्यवस्था को लेकर साफ जानकारी दी जाए कि किस गांव का गन्ना किस मिल को जाएगा और खरीद कब से शुरू होगी।
हमारी सलाह यही है कि इलाके के किसान अपनी पर्ची, सर्वे रिकॉर्ड और मोबाइल नंबर अपडेट रखें। गन्ना जिस भी मिल में जाए, कागज पूरे होंगे तो आपूर्ति और भुगतान में अड़चन कम आएगी।
मुख्य बातें
- दया शुगर मिल का गन्ना क्षेत्र दूसरी मिलों को आवंटित; ठेकेदार का 15 नवंबर से पेराई का दावा, किसान असंतुष्ट
- 22 अक्टूबर को गागलहेड़ी से कलक्ट्रेट तक 15 KM पैदल मार्च, सीएम के नाम ज्ञापन
- 2010 में बंद, 2017 में दोबारा चालू हुई मिल; 100 गांवों के किसान और 300+ कर्मचारी परिवार प्रभावित
स्रोत: रॉयल बुलेटिन (24 अक्टूबर 2026), धारा लक्ष्य समाचार (20 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (16 अक्टूबर 2026)
