30 साल के बकाया ब्याज का हिसाब आज: दौराला में किसानों का धरना, सचिव ने मांगा था समय

आज 20 अक्टूबर है। मेरठ की दौराला सहकारी गन्ना समिति के किसान आज एक जवाब का इंतजार कर रहे हैं। ठीक एक हफ्ता पहले इन्हीं किसानों ने समिति परिसर में करीब ढाई घंटे धरना दिया था और एक सीधी मांग रखी थी: 1996 से 2026 तक, तीस साल में जब भी गन्ने का भुगतान देर से मिला, उसका ब्याज कहां है? समिति सचिव ने रिकॉर्ड छांटने के लिए 20 अक्टूबर तक का समय मांगा था। वह समय आज खत्म हो रहा है।
दौराला में क्या हुआ था
13 अक्टूबर को दौराला सहकारी गन्ना समिति में किसानों ने बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज की मांग को लेकर धरना दिया। किसानों का कहना था कि नियम के मुताबिक 14 दिन बाद किए गए भुगतान पर ब्याज मिलना चाहिए, लेकिन आज तक उन्हें यह ब्याज नहीं मिला। उन्होंने न्यायालय के आदेश का हवाला देकर बकाया गन्ना मूल्य के साथ ब्याज की राशि मांगी।
करीब ढाई घंटे चले धरने के दौरान समिति सचिव प्रदीप यादव किसानों से मिले। उन्होंने बताया कि पिछले तीन साल का ब्योरा उपलब्ध है, जबकि पुराने वर्षों के रिकॉर्ड की जांच चल रही है। जल्द समाधान का आश्वासन देते हुए उन्होंने 20 अक्टूबर तक का समय मांगा, जिसके बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया। किसानों ने चेतावनी भी दी कि मांग पूरी न होने पर आगे की रणनीति बनेगी। धरने में देवेंद्र चेयरमैन, जयदेव, भूपेंद्र, आकाश, अश्वनी, रविंद्र सहित कई किसान मौजूद रहे।
सकौती में 13 दिन की सहमति
उसी दिन मेरठ के ही सकौती टांडा सहकारी गन्ना समिति में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन का धरना चला। यहां मांग वही थी: 1996 से 2026 तक के गन्ना भुगतान पर ब्याज का हिसाब। करीब तीन घंटे की वार्ता के बाद समिति सचिव 13 दिन के भीतर हिसाब तैयार कर किसानों को देने पर राजी हुए।
धरने की अध्यक्षता राजपाल सिंह ने की और संचालन संगठन के जिलाध्यक्ष दिनेश प्रधान ने किया। मंडल अध्यक्ष चौधरी रामवीर सिंह ने कहा कि ब्याज किसानों का अधिकार है; हिसाब देने में देरी हुई तो सचिव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई होगी। शिवकुमार नंबरदार ने किसानों को न्यायालय के आदेश की जानकारी दी। वार्ता में समिति सभापति श्रवण कुमार और सचिव भी मौजूद रहे। दिनेश प्रधान ने कहा कि किसान नेता सरदार वीएम सिंह के निर्देश पर संगठन किसानों को उनका हक दिलाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
14 दिन वाला नियम क्या कहता है
किसानों की पूरी मांग एक पुराने कानून पर टिकी है। उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम के तहत मिलों को गन्ने की आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है, और देरी होने पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज का प्रावधान है।
यह नियम कागज पर सालों से है, लेकिन वसूली का हाल सब जानते हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अगस्त में टिप्पणी की थी कि ब्याज के मद में अब तक एक पैसा भी वसूल नहीं किया गया है। अदालत के सामने रखे गए विवरण के मुताबिक, बकाया वसूली प्रमाणपत्रों के तहत कुल 1,936 करोड़ रुपये की वसूली बाकी थी, जिसमें 1,087 करोड़ रुपये मूल बकाया और 849.5 करोड़ रुपये ब्याज शामिल था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को यूपी सरकार की वह चुनौती खारिज कर दी, जिसमें सरकार ने ब्याज की दर को लेकर राहत मांगी थी। अदालत ने साफ किया कि 14 दिन में भुगतान और देरी पर 15 प्रतिशत ब्याज किसानों को कर्ज के जाल से बचाने के लिए जरूरी सुरक्षा है।
यही वजह है कि दौराला और सकौती के धरने सिर्फ दो समितियों की बात नहीं रह गए हैं। अदालतों की टिप्पणियों के बाद पश्चिमी यूपी के किसानों में यह भावना तेज हुई है कि ब्याज उनका कानूनी हक है, कोई एहसान नहीं।
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
पहली बात, यह समझ लीजिए कि ब्याज की मांग व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक हिसाब की है। समिति के पास जब भी 14 दिन से देर से भुगतान हुआ, उसका रिकॉर्ड मांगना किसानों का अधिकार है। दौराला में किसानों ने यही किया: हिसाब दो, ब्याज दो।
दूसरी बात, धरने के बाद बनी सहमतियों पर नजर रखिए। दौराला की डेडलाइन आज खत्म हो रही है। अगर समिति रिकॉर्ड लेकर नहीं आती, तो किसानों ने आगे की रणनीति बनाने की बात कही है। सकौती की 13 दिन की मोहलत भी नवंबर के पहले हफ्ते में खत्म होगी। दोनों तारीखें आपके कैलेंडर में होनी चाहिए।
तीसरी बात, बकाया भुगतान की शिकायत के रास्ते खुले हैं। बकाया भुगतान पर 15 प्रतिशत ब्याज के नियम का इस्तेमाल कीजिए और गन्ना आयुक्त कार्यालय की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराइए।
चौथी बात, 23 अक्टूबर को लखनऊ में गन्ना संस्थान में किसानों की महापंचायत बुलाई गई है, जहां गन्ना मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठेगी। ब्याज की यह लड़ाई और दाम की मांग, दोनों एक ही आंदोलन की कड़ियां हैं।
मुख्य बातें
- मेरठ की दौराला गन्ना समिति में 13 अक्टूबर को ब्याज की मांग पर ढाई घंटे धरना; समिति सचिव ने 20 अक्टूबर तक रिकॉर्ड देने का समय मांगा, डेडलाइन आज खत्म।
- सकौती टांडा समिति में 3 घंटे की वार्ता के बाद 13 दिन में ब्याज समेत हिसाब देने की सहमति; देरी पर सचिव के खिलाफ प्राथमिकी की चेतावनी।
- कानून के मुताबिक 14 दिन के बाद भुगतान पर 15 प्रतिशत ब्याज; सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को यूपी सरकार की चुनौती खारिज कर इसे जरूरी सुरक्षा बताया।
स्रोत: अमर उजाला (13 अक्टूबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (13 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (9 अक्टूबर 2026)
