चूहों ने काट डाले गन्ने के तने? 3 दिन में खेत चूहा-मुक्त करने का तरीका

अक्टूबर का महीना, पेराई सीजन बस सिर पर है। एक किसान सुबह खेत पहुंचा तो किनारे की पंक्ति में कई गन्ने जमीन पर गिरे मिले। तने नीचे से कटे हुए थे, जैसे किसी ने आरी चला दी हो। ये काम न तो हवा का था, न किसी जानवर का। रात के अंधेरे में चूहे मीठे तनों को कुतर गए थे।
गन्ना पकने का समय चूहों का पसंदीदा मौसम होता है। मीठा रस, घनी छांव, छुपने की भरपूर जगह। एक बिल में रह रहा चूहा एक ही रात में कई तनों को जड़ के पास से काट डालता है। कटा हुआ तना सूख जाता है। वजन घटता है। और कटा हिस्सा मिल तक पहुंचने से पहले ही बेकार हो जाता है। गेहूं की फसल में चूहों से 25 से 30 प्रतिशत तक नुकसान के आंकड़े सामने आए हैं। गन्ने में पंजाब के खेतों पर हुए शोध में भी कटे तनों की गंभीर समस्या दर्ज हुई है। सवाल ये नहीं कि खेत में चूहे हैं या नहीं। सवाल ये है कि कब तक नजरअंदाज करेंगे।
पहले पहचानें: खेत में चूहा है या नहीं
दवा डालने से पहले देखना जरूरी है कि चूहों का ठिकाना कहां है। बिलों के पास ताजी खुदी हुई मिट्टी के छोटे-छोटे ढेर मिलेंगे। तनों के नीचे वाले हिस्से पर दांतों के निशान, कटे हुए तने और खेत में बने संकरे रास्ते दिखें तो समझ लीजिए हमला हो चुका है। चूहों की बीट काले दानों जैसी होती है, बिलों के मुहाने पर मिल जाती है। एक और निशान देखें: सिंचाई की पाइप या ड्रिप लाइन पर कतरन के निशान। चूहा सिर्फ गन्ना नहीं कुतरता, खेत के सामान को भी नुकसान पहुंचाता है।
सही समय: दवा कब डालें
चूहों पर हमला तभी करें जब गन्ना पकने की तरफ हो, यानी अक्टूबर से दिसंबर का दौर। इस समय चूहे खेत में ही डेरा डाले रहते हैं। चारा सुबह धूप निकलने से पहले या शाम को रखें। एक बात और, पूरे गांव या टोले के किसान एक साथ करें तो असर कई गुना बढ़ जाता है। एक खेत साफ कर लिया और पड़ोसी खेत में चूहे रह गए, तो हफ्ते भर में वापस आ जाएंगे।
स्टेप 1: चारा पहले, जहर बाद में
चूहे होशियार होते हैं। सीधे जहरीला चारा रखा तो कुछ चूहे खाएंगे और मरेंगे, लेकिन बचे हुए उस चारे की गंध से डरकर दोबारा पास नहीं आएंगे। इसे बैट शाइनेस कहते हैं। इससे बचने का तरीका सीधा है। पहले 3 से 4 दिन बिना जहर का चारा रखें।
बिना जहर का चारा बनाने के लिए आटे या बाजरे के दानों में थोड़ा गुड़ और खाने का तेल मिलाएं। मटर के दाने बराबर की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर बिलों के पास रखें। जब चूहे रोज खाने लगें, समझिए भरोसा बन गया।
फिर जहरीला चारा बनाएं। नुस्खा: 96 भाग अनाज या आटा, 2 भाग जिंक फॉस्फाइड पाउडर, 2 भाग खाने का तेल। अच्छी तरह मिलाकर छोटी गोलियां बनाएं और हर बिल के पास 5-5 ग्राम के हिसाब से रखें। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सही तरीके से इस्तेमाल पर 2 से 3 दिन में चूहों की संख्या तेजी से घटने लगती है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की नई ड्यूल-कोटेड चारा तकनीक में 1 किलो दवा से 1 हेक्टेयर खेत की सुरक्षा बताई गई है, जो करीब 6 महीने तक असरदार रहती है।
स्टेप 2: 10 से 15 दिन बाद ब्रोमाडियोलोन
जिंक फॉस्फाइड तेज असर करता है, लेकिन जो चूहे बच जाएं उनके लिए धीमा जहर जरूरी है। ब्रोमाडियोलोन 0.005 प्रतिशत चूहों के शरीर में धीरे-धीरे असर करता है। फायदा ये है कि दूसरे चूहे इसे पहचान नहीं पाते। बाजार में ये दवा तैयार ब्लॉक, पाउडर और पेस्ट के रूप में मिलती है। तैयार ब्लॉक सीधे बिलों के पास रख दें। पाउडर को गेहूं या मक्के के दानों में मिलाकर रखें। पंजाब के गन्ना खेतों पर किए शोध में जिंक फॉस्फाइड के बाद ब्रोमाडियोलोन के प्रयोग से 80 प्रतिशत से अधिक नियंत्रण सफलता दर्ज हुई है।
स्टेप 3: बिलों का धूमन
जिस बिल में पानी भरा हो, उसमें 2 से 3 ग्राम दवा डालकर बिल को मिट्टी से बंद कर दें। दवा गैस के रूप में असर करती है और गैस निकलने के बाद इसका जहरीला प्रभाव खत्म हो जाता है। धूमन के लिए एल्युमिनियम फॉस्फाइड की गोलियां भी इस्तेमाल होती हैं। एक आसान और मुफ्त तरीका: समय पर सिंचाई। सिंचाई से बिल पानी से भर जाते हैं और चूहों का आश्रय नष्ट हो जाता है, जिससे नुकसान अपने आप कम हो जाता है।
बिना जहर के तरीके भी काम के
खेत में उल्लू के बैठने के डंडे, यानी टी-आकार के खंभे गाड़ दें। उल्लू रात में चूहों का शिकार करता है और खेत के लिए मुफ्त का चौकीदार है। मेड़ों की सफाई रखें। खरपतवार और घास न पनपने दें, क्योंकि यही चूहों का घर बनता है। खेत के किनारे पिंजरे वाले फंदे भी लगाएं। एक सीधा नियम याद रखें: मेड़ और आसपास की सफाई जितनी बेहतर, चूहों का आना उतना कम।
सुरक्षा: ये गलतियां न करें
जिंक फॉस्फाइड तेज जहर है। चारा बनाते समय दस्ताने पहनें और मुंह-नाक ढकें। बच्चों, पशुओं और मुर्गियों की पहुंच से दूर रखें। मरे हुए चूहों को खुला न छोड़ें, गड्ढे में दबा दें। खेत में चारा रखते समय परिवार के सभी सदस्यों को बता दें ताकि कोई अनजाने में छू न ले।
मुख्य बातें
- पहले 3 से 4 दिन बिना जहर का चारा रखकर चूहों का भरोसा जीतें, फिर 2% जिंक फॉस्फाइड चारा डालें; 2 से 3 दिन में असर दिखता है।
- 10 से 15 दिन बाद ब्रोमाडियोलोन 0.005% के ब्लॉक रखें ताकि बचे हुए चूहों का सफाया हो; शोध में 80 प्रतिशत से अधिक नियंत्रण सफलता दर्ज।
- बिलों का धूमन, समय पर सिंचाई, मेड़ों की सफाई और उल्लू के डंडे मिलकर चूहों की वापसी रोकते हैं।
स्रोत: News18 (कृषि विशेषज्ञ सलाह), दैनिक जागरण/पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (ड्यूल-कोटेड चारा), Indian Entomology (गन्ना क्रंतक प्रबंधन शोध), कृषि विश्वविद्यालय कीट प्रबंधन पाठ्यक्रम।
