1000 क्विंटल से ज्यादा चीनी नहीं रख पाएंगे डीलर: यूपी गन्ना किसानों को क्या फायदा

दिवाली में अब तीन हफ्ते हैं और हर साल वही सवाल: चीनी के भाव किधर जाएंगे और मिलें समय पर भुगतान करेंगी या नहीं। 15 अक्टूबर से केंद्र सरकार ने चीनी डीलरों की स्टॉक सीमा घटाकर सिर्फ 1000 क्विंटल कर दी है, और चीनी 15 दिन के भीतर बेचनी ही होगी।
नियम कागज पर डीलरों के लिए है, पर इसका तार किसान की जेब से जुड़ा है। भाव स्थिर रहेंगे तो मिलों की तिजोरी भरी रहेगी, और पेराई सत्र में भुगतान की रफ्तार बढ़ेगी। समझिए: क्या हुआ है, क्यों हुआ है और यूपी के किसान को इससे क्या मिलेगा।
अगस्त से अक्टूबर: तीन महीने में तीन बार कड़ाई
तीन महीने में सरकार की यह तीसरी कड़ाई है। अगस्त में सीमा 4000 क्विंटल थी और स्टॉक 30 दिन में बेचना जरूरी था। 15 सितंबर को सीमा घटकर 2000 क्विंटल हुई। अब 15 अक्टूबर से यह सिर्फ 1000 क्विंटल रह गई है और रखने की अवधि भी आधी होकर 15 दिन रह गई। तीन महीने में सीमा एक-चौथाई हो गई।
एलान 1 अक्टूबर को हुआ था, जिस दिन नया चीनी सत्र शुरू हुआ, और डीएफपीडी ने गजट अधिसूचना जारी कर इसे कानूनी रूप दिया। यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी हुआ है और 15 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा। कोलकाता महानगरीय क्षेत्र और असम में सीमा 2000 क्विंटल रखी गई है, क्योंकि कोलकाता के रास्ते पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर तक चीनी पहुंचती है।
15 दिन वाली शर्त ही असली खेल है
असली असर 15 दिन की शर्त का होगा। पहले डीलर एक महीने तक चीनी गोदाम में दबाकर भाव बढ़ने का इंतजार करते थे। अब मिल से निकलने के 15 दिन के भीतर चीनी बेचनी ही होगी, यानी चीनी बाजार में लगातार घूमती रहेगी और गोदामों में नहीं बैठेगी।
मंत्रालय का कहना है कि मकसद वितरण श्रृंखला में चीनी का बेवजह जमाव रोकना और मिल से उपभोक्ता तक आवाजाही सुचारू रखना है। दिवाली पर मांग बढ़ती है और कुछ लोग स्टॉक दबाकर भाव चढ़ाने की कोशिश करते हैं। नया नियम इसी कोशिश की जड़ पर प्रहार करता है।
बाजार में अभी क्या चल रहा है
उपभोक्ता कार्य विभाग के मुताबिक 13 अक्टूबर को चीनी का औसत खुदरा भाव 56.67 रुपये प्रति किलो और थोक भाव 5254.91 रुपये प्रति क्विंटल था। मंत्रालय का दावा है कि खुदरा भाव अगस्त के शिखर से 15 फीसदी नीचे आ चुके हैं, और एक्स-मिल दाम करीब 28 फीसदी घटकर पिछले तीन हफ्तों से स्थिर हैं।
साथ ही मिलों का बिक्री कोटा समय से दो दिन पहले जारी कर दिया गया। 13 से 31 अक्टूबर के लिए कुल 14 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति मिली है। महाराष्ट्र को 4,76,000 टन, उत्तर प्रदेश को 4,51,000 टन और कर्नाटक को 2,32,000 टन, यानी तीनों राज्यों को मिलाकर कुल कोटे का करीब 83 फीसदी। आयातकों को अतिरिक्त 2 लाख टन का अलग कोटा मिला है।
यूपी के गन्ना किसानों के लिए 3 ठोस नतीजे
पहला, भाव स्थिर रहने से मिलों की वित्तीय हालत सुधरती है। यूपी में 122 चीनी मिलें हैं, और जब मिल चीनी बेचकर अच्छा पैसा कमाती है तो पेराई सत्र में समय पर भुगतान की उसकी क्षमता बढ़ती है। भाव गिरने पर मिलें “बाजार मंदा है” कहकर भुगतान टालती हैं, और स्थिर बाजार इस बहाने को कमजोर करता है।
दूसरा, यूपी को 4.51 लाख टन का बड़ा बिक्री कोटा मिला है। दिवाली सीजन में चीनी बेचकर मिलें अपनी नकदी स्थिति मजबूत कर सकेंगी, और यही पैसा आगे गन्ना मूल्य भुगतान में तब्दील होता है।
तीसरा, राज्य सरकार भी साथ दे रही है। लखनऊ के गन्ना किसान संस्थान परिसर में 52 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर चीनी बिक्री केंद्र शुरू हुआ है। केंद्र और राज्य, दोनों की कोशिश से अफवाहों पर भाव बिगड़ने की गुंजाइश कम होती है।
इस पेराई सीजन में किसान इन बातों पर नजर रखें
पेराई सत्र सिर पर है, पर एक बात साफ रहे: 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र में अगेती किस्म का भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन नए सत्र का भाव सरकारी फैसले पर निर्भर करेगा। अफवाहों पर भरोसा न करें।
सर्वे के रिकॉर्ड (रकबा और किस्म) की जांच कर लें और बैंक खाते सक्रिय रखें, ताकि भुगतान में देरी न हो। पेराई शुरू होते ही पर्ची निर्गत होगी, इसलिए ई-गन्ना ऐप या केनयूपी पोर्टल पर अपने सट्टे की स्थिति पहले से देख लें, ताकि गड़बड़ी पर समय रहते आपत्ति दर्ज करा सकें।
मुख्य बातें
- 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक चीनी डीलर अधिकतम 1000 क्विंटल चीनी ही रख सकेंगे, और 15 दिन के भीतर बेचना अनिवार्य होगा।
- यूपी को 4,51,000 टन चीनी बेचने का कोटा मिला है; भाव स्थिर रहने से मिलों के भुगतान की क्षमता सुधरेगी।
- 2026-27 सत्र का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है; अफवाहों से बचें और ई-गन्ना ऐप पर अपना सट्टा जांचकर रखें।
स्रोत: बिजनेस स्टैंडर्ड (पीटीआई, 14 अक्टूबर 2026), इकोनॉमिक टाइम्स (7 अक्टूबर 2026), पत्रिका (15 अक्टूबर 2026)
