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107 मिलों में पेराई शुरू, UP में अभी सिर्फ 2: पश्चिमी UP के किसानों का नंबर कब आएगा

✍️ Aamir Raza · 🗓 27 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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107 मिलों में पेराई शुरू, UP में अभी सिर्फ 2: पश्चिमी UP के किसानों का नंबर कब आएगा

पेराई सत्र 2026-27 ने रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन उत्तर प्रदेश के ज्यादातर गन्ना किसानों के लिए इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने सोमवार को बताया कि देशभर में 107 चीनी मिलें गन्ना पेरना शुरू कर चुकी हैं। इसमें महाराष्ट्र की 87 मिलें हैं, तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात की 17 मिलें हैं, और उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी अभी सिर्फ 2 मिलों तक सीमित है।

यानी देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य में पेराई अभी शुरुआती दौर में है, जबकि महाराष्ट्र लगभग पूरे जोर पर चल पड़ा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए राहत की बात यह है कि अगले 3 से 4 दिन में वहां की मिलों में पेराई शुरू होने की उम्मीद जताई गई है। इसके बाद मध्य और फिर पूर्वी उत्तर प्रदेश की मिलें चरणबद्ध तरीके से चलेंगी।

25 अक्टूबर तक 4 लाख टन चीनी बन चुकी है

ISMA के आंकड़ों के मुताबिक 25 अक्टूबर तक इस सत्र में करीब 4 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है। पिछले साल इसी तारीख तक यह आंकड़ा सिर्फ 60 हजार टन के आसपास था। फर्क साफ दिखता है कि इस बार सत्र समय पर और तेज गति से शुरू हुआ है।

पिछला सत्र 2025-26 जब 30 सितंबर को खत्म हुआ, तो देश में करीब 36 लाख टन चीनी का बचा हुआ स्टॉक था। यही स्टॉक अब त्योहारी मांग को संभालने का आधार बना है। ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा है कि देश में चीनी की उपलब्धता पर्याप्त है और कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है। उद्योग ने समय पर गन्ना भुगतान का भी भरोसा दिलाया है, हालांकि किसानों के लिए असली परीक्षा भुगतान की तारीख पर ही होगी।

पश्चिमी UP पहले, फिर मध्य और पूर्वी UP

पेराई का क्रम गन्ने की पकावट से तय होता है, इसलिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश सबसे पहले नंबर पर है। बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलों ने सितंबर में ही मरम्मत का काम तेज कर दिया था। राज्य की 122 में से कम से कम 71 मिलें पश्चिमी UP में हैं, इसलिए यहां पेराई शुरू होते ही लाखों किसानों की गाड़ी चल पड़ेगी।

किसानों के लिए इस बीच दो काम निपटाना समझदारी है। पहला, अपना गन्ना सर्वेक्षण रिकॉर्ड जांच लें कि रकबा और किस्म सही दर्ज है या नहीं। दूसरा, बैंक खाता सक्रिय है और जरूरी पहचान दस्तावेजों से जुड़ा है या नहीं, यह भी देख लें। पेराई शुरू होने के बाद पर्ची और भुगतान की प्रक्रिया में यही छोटी-छोटी चूक सबसे ज्यादा देर कराती है।

इथेनॉल का रास्ता बदला, गन्ने के रस पर रोक

इस सत्र में एक बड़ा नीतिगत बदलाव भी है। सरकार ने 1 नवंबर 2026 से तेल कंपनियों के इथेनॉल टेंडर में गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे के इस्तेमाल को बाहर कर दिया है। सिर्फ सी-हैवी शीरे से बना इथेनॉल ही खरीदा जाएगा। वजह बताई गई है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में कम बारिश से उत्पादन घटने की आशंका है, इसलिए चीनी की उपलब्धता को प्राथमिकता दी जा रही है।

पिछले सत्र में देश में 31 मिलियन टन चीनी बनी थी, जिसमें से 3 मिलियन टन इथेनॉल में गई और 8 लाख टन निर्यात हुई। इस सत्र में उत्पादन घटने के अनुमान के बीच सरकार हर पखवाड़े उत्पादन का आंकड़ा मांग रही है और कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की खिड़की भी बढ़ाई गई है।

चीनी का भाव और किसान की जेब

उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार को चीनी का औसत खुदरा भाव 58.62 रुपये प्रति किलो था, जो पिछले साल की तुलना में 27 प्रतिशत ज्यादा है। कुछ केंद्रों पर अगस्त में भाव 65 रुपये प्रति किलो को भी पार कर गया था।

किसान के नजरिए से यह दोधारी तस्वीर है। चीनी महंगी होने से मिलों की कमाई बढ़ती है, लेकिन इसका फायदा गन्ना भुगतान के रूप में किसान तक पहुंचे, यही असली सवाल है। सितंबर में बिजनौर महापंचायत में किसान संगठनों ने गन्ने का भाव बढ़ाने, पेराई जल्दी शुरू करने और देर से भुगतान पर ब्याज की मांग उठाई थी।

UP के किसान के लिए इसका मतलब क्या है

पश्चिमी UP के किसान अगले कुछ दिन में अपनी मिल की पेराई तारीख पर नजर रखें। केंद्र पर गन्ना डालने से पहले पर्ची की व्यवस्था, तौल की पर्ची और भुगतान खाते की जानकारी एक बार फिर जांच लें। जिन इलाकों में मिल अभी नहीं चली है, वहां गन्ना खेत में खड़ा रखना मजबूरी है, लेकिन इसी दौरान सर्वे और कागज दुरुस्त कर लेना बाद में देरी से बचा सकता है।

देश के स्तर पर सत्र समय पर शुरू हुआ है, उत्पादन पिछले साल से आगे है और स्टॉक की स्थिति संभली हुई है। उत्तर प्रदेश के लिए अगला पड़ाव पश्चिमी UP की मिलों का चलना है। वहां पेराई शुरू होते ही राज्य की तस्वीर तेजी से बदलेगी, क्योंकि UP की ज्यादातर मिलें और गन्ना क्षेत्रफल यहीं केंद्रित है।

मुख्य बातें

  • 2026-27 सत्र में देश की 107 मिलों में पेराई शुरू, महाराष्ट्र में 87 और उत्तर प्रदेश में अभी सिर्फ 2 मिलें चली हैं।
  • 25 अक्टूबर तक 4 लाख टन चीनी बन चुकी है, जबकि पिछले साल इसी तारीख तक सिर्फ 60 हजार टन थी।
  • पश्चिमी UP में अगले 3-4 दिन में पेराई शुरू होने की उम्मीद है, इसके बाद मध्य और पूर्वी UP की मिलें चलेंगी।

स्रोत: बिजनेस टुडे (26 अक्टूबर 2026), द हिंदू (26 अक्टूबर 2026), द ट्रिब्यून (26 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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