चीनी MSP ₹60 की मांग पूरी हुई तो UP गन्ना किसानों को ये 3 फायदे मिलेंगे

महाराष्ट्र की 55 में से सिर्फ 15-19 चीनी मिलों में अब तक पेराई शुरू हो पाई है और कर्नाटक में रेगुलर पेराई सीजन अभी खुला ही नहीं है। वजह है गन्ना किसानों का आंदोलन, जो चीनी का MSP बढ़ाकर ₹60 किलो करने और गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। यह लड़ाई हजारों किलोमीटर दूर लड़ी जा रही है, लेकिन इसका नतीजा सीधे यूपी के गन्ना किसान के खाते पर पड़ेगा। अगर केंद्र ने मांग मान ली तो तीन बड़े फायदे यूपी के किसानों को भी मिलेंगे।
क्या हो रहा है महाराष्ट्र-कर्नाटक में
पीटीआई और बिजनेस स्टैंडर्ड की 15 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र की 55 मिलों में से 15 मिलों ने 8 अक्टूबर से पेराई शुरू की थी और गुरुवार तक चार और मिलें चलीं। बाकी मिलों ने पूजा तो कर ली है, लेकिन आंदोलन की वजह से पूरी रफ्तार से काम शुरू नहीं कर पाईं। कर्नाटक में कोई भी रेगुलर सीजन मिल नहीं चली, हालांकि राज्य की 28 में से 8 मिलें स्पेशल सीजन की पेराई कर रही हैं।
किसान संगठन अपनी मांगों पर अड़े हैं। बेलगावी में किसान नेता चुनप्पा पुजेरी ने मिलों के बाहर धरना देकर चीनी ₹60 किलो से कम में न बेचने देने की चेतावनी दी है। महाराष्ट्र में राजू शेट्टी ने सतारा-सांगली में मिलों के बाहर प्रदर्शन किया और कहा कि सांगली की चार मिलों को संचालन रोकना पड़ा। डेक्कन क्रॉनिकल के अनुसार महाराष्ट्र के किसान चीनी का MSP मौजूदा ₹31 किलो से बढ़ाकर ₹50 किलो और एथेनॉल की खरीद दर ₹58 से ₹70 लीटर करने की मांग कर रहे हैं।
केंद्र ने कमेटी बनाई, किसान नाराज
राष्ट्रीय राजमार्ग जाम की धमकी के बाद केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान संगठनों से बात की। इसके बाद नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में कमेटी बनी, जो गन्ना किसानों के भुगतान और चीनी के MSP की समीक्षा करेगी।
लेकिन किसान संगठनों ने इस कमेटी को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट की कोई समय सीमा तय नहीं है, और उनका कहना है कि मांगें तुरंत पूरी होनी चाहिए, अध्ययन में नहीं उलझनी चाहिए। यानी यह संकट जल्द सुलझता नजर नहीं आ रहा।
मांग मानी गई तो UP किसान को ये 3 फायदे
चीनी का MSP फरवरी 2019 से ₹31 किलो पर टिका है, जबकि इसी दौरान गन्ने का FRP हर साल बढ़ा है। यही असंतुलन इस आंदोलन की जड़ है। अगर MSP बढ़ा, तो यूपी के गन्ना किसान को तीन सीधे फायदे मिलेंगे।
पहला फायदा: भुगतान में तेजी। चीनी का दाम बढ़ने से मिलों की कमाई सुधरेगी और बकाया भुगतान अटकने का दबाव घटेगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में बकाया गन्ना भुगतान पर 15% ब्याज के हक की बात कही है, लेकिन ब्याज का दावा तभी असरदार होता है जब मूल भुगतान समय पर आए।
दूसरा फायदा: गन्ना भाव पर ऊपर का दबाव। UP में गन्ने का मूल्य घोषित करने वाली सरकार भी इस बहस से अलग नहीं रहेगी। केंद्र में FRP की समीक्षा होगी तो राज्यों के SAP पर भी दबाव बनेगा। यूपी के किसान पहले से ही 2026-27 के SAP की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं, और MSP की बढ़ोतरी इस इंतजार को उनके हक में मोड़ सकती है।
तीसरा फायदा: एथेनॉल की दर। महाराष्ट्र के किसानों ने एथेनॉल की खरीद दर ₹58 से बढ़ाकर ₹70 लीटर करने की मांग रखी है। एथेनॉल से मिलों को अलग आमदनी मिलती है और यही आमदनी भुगतान का भरोसेमंद जरिया बनती जा रही है। दर बढ़ी तो डिस्टिलरी वाली मिलों की तिजोरी भरेगी और भुगतान की गुंजाइश बढ़ेगी।
अगर मांग टली तो क्या होगा
ईमानदारी से यह भी समझना जरूरी है कि अभी MSP बढ़ा नहीं है और कमेटी रिपोर्ट की कोई समय सीमा नहीं है। अगर मांग टली तो महाराष्ट्र-कर्नाटक में पेराई रुकी रहेगी और दिवाली के आसपास चीनी के भाव ऊपर जा सकते हैं।
यूपी में मिलों का संचालन अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होगा और नवंबर में नए सत्र की चीनी बाजार में आने लगेगी। लखीमपुर खीरी की बेलरायां मिल ने 15 नवंबर से पेराई शुरू कर करीब 70 लाख क्विंटल गन्ना पेरने का लक्ष्य रखा है।
UP किसान के लिए सलाह
महाराष्ट्र-कर्नाटक का आंदोलन इस बात का सबूत है कि गन्ने के दाम पर चुप्पी अब लंबी नहीं चलती। यूपी के किसान इस घटनाक्रम पर नजर रखें, क्योंकि केंद्र का कोई भी फैसला उनके भुगतान और आने वाले SAP पर सीधा असर डालेगा। पेराई शुरू होने से पहले अपने सट्टे, पर्ची और पिछले बकाये का हिसाब दुरुस्त रखें। ई-गन्ना ऐप पर बकाया राशि लगातार देखते रहें। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराएं। और याद रखें, 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है, इसलिए पिछले सीजन के ₹400 प्रति क्विंटल वाले भाव को इस साल का भाव मानने की गलती न करें।
मुख्य बातें
- महाराष्ट्र की 55 में से सिर्फ 15-19 मिलों में पेराई शुरू, कर्नाटक का रेगुलर सीजन अभी बंद — किसान चीनी का MSP ₹60 किलो चाहते हैं।
- केंद्र ने रमेश चंद की अध्यक्षता में कमेटी बनाई, लेकिन किसान संगठनों ने इसे खारिज कर दिया और रिपोर्ट की कोई समय सीमा तय नहीं है।
- MSP बढ़ा तो UP किसानों को 3 फायदे: भुगतान में तेजी, SAP/भाव पर ऊपर का दबाव और एथेनॉल दर बढ़ने से मिलों की आमदनी।
स्रोत: द प्रिंट (पीटीआई), बिजनेस स्टैंडर्ड, डेक्कन क्रॉनिकल, द हिंदू — सभी की रिपोर्ट 14 से 16 अक्टूबर 2026 के बीच प्रकाशित।
