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70.64 लाख क्विंटल चीनी: अब कागज़ और गोदाम का होगा मिलान, डीएम को पत्र

✍️ Aamir Raza · 🗓 23 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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70.64 लाख क्विंटल चीनी: अब कागज़ और गोदाम का होगा मिलान, डीएम को पत्र

गोदामों में चीनी भरी पड़ी है, लेकिन किसानों के खाते में गन्ना बकाया अब भी अटका है। यह सवाल इस बार सरकार की फाइलों में भी पहुंचा, और जवाब में गन्ना आयुक्त ने प्रदेश के हर जिलाधिकारी को सीधा पत्र लिख दिया है। पत्र का मतलब साफ है — अब कागज़ पर बताए गए स्टॉक और गोदाम में मौजूद असल स्टॉक का मिलान होगा।

चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के गोदामों में इस समय कुल 70.64 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक मौजूद है। इतनी बड़ी मात्रा में चीनी होते हुए भी अगर बाज़ार में कीमतें बढ़ें या किसानों का भुगतान रुक जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है।

कागज़ पर दावा, गोदाम में सच्चाई — अब होगी मिलान

विभाग के आंकड़ों के अनुसार 70.64 लाख क्विंटल के इस स्टॉक में तीन हिस्से हैं। सहकारी चीनी मिलों के पास 13.40 लाख क्विंटल, निगम की चीनी मिलों के पास 2.93 लाख क्विंटल और निजी क्षेत्र की मिलों के पास 54.3 लाख क्विंटल से अधिक चीनी बताई जा रही है।

लेकिन इस बार प्रशासन सिर्फ आंकड़ों पर भरोसा नहीं करेगा। गन्ना आयुक्त ने विभागीय स्तर पर विशेष टीमें गठित करने की योजना बनाई है। ये टीमें चीनी मिलों के गोदामों में जाकर भौतिक जांच करेंगी, यानी मिल ने कागज़ में जितनी चीनी बताई है, गोदाम में उतनी है भी या नहीं, इसका सीधा सत्यापन होगा। बाज़ारों में भी टीमें उतरेंगी ताकि यह पता चल सके कि मिलों से चीनी की निकासी और बाज़ार में आपूर्ति सुचारु रूप से हो रही है या नहीं।

डीएम को लिखे पत्र में तीन काम

गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर तीन बिंदुओं पर निगरानी का अनुरोध किया है। पहला — जिले की चीनी मिलों से होने वाली चीनी की निकासी पर नज़र रखी जाए। दूसरा — बाज़ार में चीनी के स्टॉक की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली जाए। तीसरा — थोक और खुदरा कीमतों की नियमित समीक्षा हो।

सत्यापन में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई के निर्देश भी हैं — यानी स्टॉक दबाकर रखना अब पहले जैसा आसान नहीं रहेगा।

केंद्र से लखनऊ तक: मंगलवार से बुधवार तक

यह पूरा घटनाक्रम दो दिन के भीतर घटी दो बड़ी बैठकों का नतीजा है। पहले मंगलवार को केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव ने उच्चस्तरीय समीक्षा की, जिसमें देशभर में चीनी की सुचारु उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण के स्पष्ट निर्देश दिए गए।

अगले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभागीय अधिकारियों से चीनी की उपलब्धता की जानकारी मांगी। मुख्यमंत्री के पूछने के बाद चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने 70.64 लाख क्विंटल के स्टॉक का आंकड़ा सामने रखा और त्योहारों में कोई कमी न होने का भरोसा दिया। उसी दिन गन्ना आयुक्त ने क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ बैठक कर स्टॉक के भौतिक सत्यापन और कीमतों की सतत निगरानी के निर्देश जारी किए।

किसान को इससे क्या फायदा — स्टॉक से भुगतान तक का हिसाब

सवाल यही है कि गोदामों की जांच-परख से गन्ना किसान का क्या लेना-देना। जवाब सीधा है। चीनी का स्टॉक मिलों की नकदी स्थिति तय करता है, और मिलों की नकदी स्थिति से ही किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान जुड़ा है।

जब प्रशासन खुद चीनी की निकासी पर नज़र रखेगा, तो मिलों को चीनी बेचकर नकदी जुटानी ही पड़ेगी। जमाखोरी या जानबूझकर स्टॉक रोके रखने की गुंजाइश घटेगी। और जहां चीनी बिकेगी, वहां किसानों के बकाये के भुगतान की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद रहेगी। स्थिर कीमतों से सरकार और मिलों के बीच हिसाब-किताब भी खुला रहेगा।

एक सलाह भी बनती है: नया पेराई सत्र शुरू होने से पहले पर्ची, सट्टा और तौल की रसीदें दुरुस्त कर लें, पुराने बकाये की स्थिति एक बार जांच लें। बकाया लंबे समय से रुका हो तो जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें।

अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से नए पेराई सत्र की आहट

चीनी की उपलब्धता को लेकर सरकार को आगामी पेराई सत्र से भी राहत की उम्मीद है। विभाग की जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह से चीनी मिलों का संचालन दोबारा शुरू होने की संभावना है। इसके बाद नवंबर में पेराई सत्र 2026-27 की नई चीनी बाज़ार में आने लगेगी।

नई चीनी से बाज़ार पर त्योहारी मांग का दबाव घटेगा, लेकिन असल फायदा तभी जब मिलें समय पर चलें। प्रशासन की यह सख्ती नए सत्र में कड़ी निगरानी का संकेत है।

अब कसौटी एक ही है: आने वाले दिनों में बाज़ार में चीनी की उपलब्धता और कीमतें क्या रहती हैं। यह समय किसानों के लिए अपनी तैयारियां पूरी करने का है।

मुख्य बातें

  • उत्तर प्रदेश के गोदामों में 70.64 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक है — सहकारी मिलों में 13.40 लाख, निगम की मिलों में 2.93 लाख और निजी मिलों में 54.3 लाख क्विंटल से अधिक।
  • गन्ना आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर मिलों से चीनी की निकासी, बाज़ार स्टॉक और थोक-खुदरा कीमतों की नियमित निगरानी का अनुरोध किया है; विशेष टीमें गोदामों की भौतिक जांच करेंगी।
  • केंद्र सरकार के खाद्य सचिव की मंगलवार की समीक्षा और मुख्यमंत्री के पूछने के बाद बुधवार को गन्ना आयुक्त की बैठक — दो दिन में तीन स्तर पर कार्रवाई।
  • अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से चीनी मिलों का संचालन शुरू होने की संभावना, नवंबर में पेराई सत्र 2026-27 की नई चीनी बाज़ार में आएगी।
  • किसानों के लिए सलाह: पर्ची, सट्टा और तौल की रसीदें दुरुस्त रखें, पुराने बकाये की स्थिति जांच लें।

स्रोत: कृषिभूमि (अक्टूबर 2026), सबसच (अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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