चीनी ₹70 किलो पहुंची, पेराई नवंबर तक टली, किसान के गन्ने पर क्या असर होगा?

आगरा के पचकुइयां बाजार में इस हफ्ते चीनी ₹65 से ₹70 किलो तक बिकी। कुछ दिन पहले यही चीनी ₹50 के आसपास मिल रही थी। मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के कई जिलों में फुटकर दाम ₹62 से ₹70 किलो के बीच पहुंच गए हैं। त्योहार सिर पर है, मिठाई की मांग बढ़ रही है और बाजार में चीनी की आवक घट गई है।
मिलों से उठने वाली चीनी का भाव भी चार-पांच दिन में ₹300 से ₹400 प्रति क्विंटल बढ़कर करीब ₹4,650 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। आगरा के थोक बाजार में भाव ₹57 से ₹58 किलो दर्ज हुआ। बाजार के जानकारों का कहना है कि मांग और आपूर्ति का अंतर ही दाम बढ़ा रहा है।
पेराई 15 अक्टूबर को क्यों नहीं शुरू हुई
हर साल अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में पेराई की तैयारी तेज हो जाती है। इस बार ऐसा नहीं हुआ। वजह है रिकवरी। लगातार बारिश ने गन्ने की मिठास पर असर डाला है। गन्ना अभी पूरी तरह पका नहीं है। ऐसे में मिलों ने इस महीने पेराई शुरू करने का फैसला टाल दिया है।
रिकवरी का मतलब सीधा है। सौ किलो गन्ने से कितनी चीनी निकलेगी, यही रिकवरी है। गन्ना कच्चा हो तो चीनी कम निकलती है। पिछले सत्र में यूपी की औसत रिकवरी करीब 10.19 प्रतिशत रही थी। इस बार बारिश के बाद शुरुआती गन्ने में रिकवरी और कम रहने का अनुमान है।
बेलरायां मिल ने 15 नवंबर की तारीख तय की
लखीमपुर खीरी की सरजू सहकारी चीनी मिल बेलरायां ने नए सत्र की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। मिल में 15 नवंबर 2026 से 8 अप्रैल 2027 तक पेराई कराने की योजना है। 144 दिन के इस सत्र में 70 लाख क्विंटल गन्ना पेरने का लक्ष्य रखा गया है। 11 प्रतिशत रिकवरी के अनुमान पर करीब 7.70 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन का लक्ष्य तय हुआ है।
मिल की वार्षिक सामान्य निकाय बैठक में गन्ना खरीद केंद्रों पर भी चर्चा हुई। मिल गेट के साथ 32 खरीद केंद्र सुरक्षित करने का प्रस्ताव रखा गया। जिलाधिकारी ने मिल अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों के भुगतान में किसी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
बेलरायां अकेली मिसाल नहीं है। पश्चिमी यूपी की ज्यादातर मिलें अब नवंबर में ही पेराई शुरू करने की ओर बढ़ रही हैं।
किसान के लिए इसका सीधा मतलब क्या है
पहली बात, कच्चा गन्ना काटने का लालच मत पालिए। चीनी महंगी है तो लग सकता है कि गन्ना जल्दी बेच दें तो फायदा होगा। हकीकत उल्टी है। कच्चे गन्ने में चीनी कम निकलती है। मिल को घाटा होगा तो उसका असर आगे भुगतान और पर्ची की रफ्तार पर भी पड़ सकता है। नवंबर तक गन्ना पक जाए तो किसान और मिल दोनों को फायदा है।
दूसरी बात, पर्ची का इंतजार थोड़ा लंबा हो सकता है। पेराई टलने से शुरुआती पर्चियों में देरी स्वाभाविक है। इस बीच अपना सट्टा, सर्वे और समिति से जुड़े कागज पहले से दुरुस्त रखिए, ताकि पेराई शुरू होते ही दौड़भाग न करनी पड़े।
तीसरी बात, कोल्हू और गुड़ का लालच। गुड़ के दाम ऊंचे हैं और कोल्हू वाले नकद भुगतान का लालच भी देते हैं। मगर मिल की पर्ची, तौल की पर्ची और भुगतान का रिकॉर्ड किसान की सबसे बड़ी सुरक्षा है। कोल्हू पर गन्ना देने से पहले भाव, तौल और भुगतान की शर्तें साफ कर लीजिए।
रकबा भी थोड़ा घटा है, नजर रखिए
यूपी के 11 प्रमुख गन्ना जिलों में 2026-27 के लिए गन्ना रकबा करीब 1.6 प्रतिशत घटकर 17.14 लाख हेक्टेयर रह गया है। इन जिलों में पिछले सत्र में करीब 60.96 लाख टन चीनी बनी थी। रकबा घटने और रिकवरी कम रहने से इस सत्र में चीनी उत्पादन पर दबाव रह सकता है। कुछ जिलों में रकबा गिरावट 14 प्रतिशत तक है।
इसका मतलब यह है कि इस सत्र में गन्ने की हर ट्रॉली की कीमत है। अच्छा गन्ना, सही समय पर कटाई और सही जगह बिक्री, यही तीन बातें इस बार किसान की कमाई तय करेंगी।
अब किसान क्या करें
खेत में पानी भरा हो तो निकासी का इंतजाम कीजिए। ज्यादा नमी में गन्ना गिरता भी है और उसकी मिठास भी घटती है। गिरा हुआ गन्ना पेराई से पहले संभाल लीजिए, वरना तौल में कटौती का सामना करना पड़ सकता है। पेड़ी वाले खेतों में खरपतवार और चूहों पर नजर रखिए। अपने गन्ना सर्वे की पर्ची और समिति के रिकॉर्ड की जांच कर लीजिए। अगर सर्वे में गड़बड़ी लगे तो अभी शिकायत का सही समय है, पेराई शुरू होने के बाद नहीं।
चीनी के दाम कब नरम होंगे, यह पेराई शुरू होने और आपूर्ति सुधरने पर निर्भर करेगा। मिलें चलने लगीं तो बाजार में नई चीनी आएगी और दाम पर दबाव घटेगा। तब तक किसान के हाथ में सबसे बड़ा हथियार उसका पका हुआ गन्ना है।
मुख्य बातें
- यूपी में फुटकर चीनी ₹62-70 किलो तक पहुंची, मिलों से उठने वाली चीनी ₹4,650 प्रति क्विंटल के करीब
- बारिश से रिकवरी घटी, इसलिए 15 अक्टूबर से शुरू होने वाला पेराई सत्र नवंबर तक खिसका
- बेलरायां मिल में 15 नवंबर से पेराई, 70 लाख क्विंटल गन्ना पेरने और 7.70 लाख क्विंटल चीनी बनाने का लक्ष्य
- कच्चा गन्ना काटने से किसान को ही नुकसान, पेराई तक सट्टा-सर्वे के कागज दुरुस्त रखें
स्रोत: दैनिक जागरण (मेरठ, 14 अक्टूबर 2026; आगरा, 13 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी, द हिंदू बिजनेस लाइन
