गोदाम में 70.64 लाख क्विंटल चीनी, फिर भी दाम ऊंचे? CM योगी के दावे पर DM को जांच के आदेश

गोदामों में 70.64 लाख क्विंटल चीनी पड़ी है, दुकान पर भाव फिर भी ऊंचे हैं। बुधवार को CM योगी ने अधिकारियों से उपलब्धता का ब्योरा मांगा तो विभाग बोला: कमी नहीं है, अफवाहों पर ध्यान न दें। सवाल जस का तस है: स्टॉक इतना है तो दाम थम क्यों नहीं रहे?
इसी का जवाब खोजने गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है: मिलों के गोदामों में दर्ज और असल स्टॉक का मिलान होगा, दामों पर लगातार नजर रहेगी। दिवाली से ठीक पहले सरकार ने लगाम कसने का सबसे सख्त इंतजाम किया है।
70.64 लाख क्विंटल का हिसाब: स्टॉक कहां-कहां पड़ा है
चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के मुताबिक राज्य के गोदामों में फिलहाल कुल 70.64 लाख क्विंटल चीनी मौजूद है। इसका बंटवारा कुछ यूं है: सहकारी चीनी मिलों के पास 13.40 लाख क्विंटल, निगम की चीनी मिलों के पास 2.93 लाख क्विंटल और निजी क्षेत्र की मिलों के पास 54.3 लाख क्विंटल से ज्यादा चीनी है।
विभाग का तर्क सीधा है: इतना स्टॉक होने से त्योहारी सीजन की मांग पूरी हो जाएगी, इसलिए घबराकर खरीदने या अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है।
मंगलवार दिल्ली, बुधवार लखनऊ: दो दिन में दो बड़े फैसले
यह कवायद अचानक नहीं है। इसके पीछे दो दिन की दो बड़ी समीक्षाएं हैं।
मंगलवार को केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव ने उच्च स्तरीय समीक्षा की और चीनी की सप्लाई बनाए रखने के साथ दामों पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए। देश भर में चीनी की सुचारु उपलब्धता बनाए रखना केंद्र की प्राथमिकता है, और उसी के तहत राज्यों को सख्ती बरतने को कहा गया।
अगले दिन बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से उपलब्धता का ब्योरा मांगा। इसके बाद गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस की बैठक में तीन निर्देश हुए: स्टॉक का भौतिक सत्यापन, दामों पर लगातार निगरानी और सत्यापन के बाद जरूरी कार्रवाई।
DM को पत्र, बाजार में टीमें: जांच से क्या बदलेगा
सबसे अहम कदम गन्ना आयुक्त का सभी जिलाधिकारियों को लिखा पत्र है। इसमें कहा गया है कि जिलों में चीनी मिलों से हो रही चीनी की निकासी, बाजार में उपलब्धता और एक्स-मिल, थोक व खुदरा दामों की सतत निगरानी की जाए। इसके लिए विशेष विभागीय टीमें गठित की जाएंगी, जो बाजारों और चीनी मिलों में जाकर जांच करेंगी।
कागजों में दर्ज स्टॉक का असल में मौजूद चीनी से मिलान होगा, ताकि स्टॉक दबाने वालों की पकड़ हो सके। मकसद साफ है: कमी का बहाना बनाकर कोई मनमाने दाम न वसूल सके।
भौतिक सत्यापन पहले भी होता रहा है, लेकिन इस बार जांच DM स्तर से और केंद्र के सीधे निर्देश के बाद हो रही है। यानी मिलों और डीलरों पर दबाव पहले से ज्यादा है, और चीनी की आवक पर दोहरी नजर रहेगी।
नई चीनी कब आएगी: अक्टूबर के आखिर से मिलें दोबारा चालू
पुराना स्टॉक एक तरफ, अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से मिलों का संचालन दोबारा शुरू होगा। पेराई के बाद नवंबर में नए सत्र 2026-27 की चीनी बाजार में पहुंचेगी।
त्योहारों में मिठाइयों की खपत बढ़ती है, और पुराना स्टॉक व नई चीनी की आवक मिलकर मांग पूरी करेगी। सरकार का गणित साफ है: दिवाली तक सप्लाई में खलल नहीं पड़ना चाहिए।
गन्ना किसान के लिए 4 काम की बातें
पहली बात, पेराई की घड़ी नजदीक है। अक्टूबर के आखिर से मिलें चालू होने की तैयारी में हैं, यानी पर्ची का इंतजार अब लंबा नहीं है। अपना सट्टा, सर्वे और समिति से जुड़े कागज पहले से दुरुस्त रखिए, ताकि मिल चलते ही दौड़भाग न करनी पड़े। ई-गन्ना ऐप पर पर्ची और कैलेंडर समय-समय पर चेक करते रहिए।
दूसरी बात, दाम को लेकर अफवाहों से बचिए। चीनी महंगी है, इसलिए गन्ने का दाम बढ़ने की चर्चा हर तरफ है। केंद्र ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू है। यूपी का नया एसएपी (2026-27) अभी घोषित नहीं हुआ है, और एसएपी हमेशा एफआरपी से ऊपर रहता है। इसलिए 365 रुपये से कम दाम मिलने का सवाल ही नहीं उठता, बाकी आधिकारिक घोषणा का इंतजार कीजिए।
तीसरी बात, स्टॉक जांच का फायदा किसान को भी है: जमाखोरी की गुंजाइश घटेगी, दाम स्थिर रहेंगे तो मिलों पर भुगतान का दबाव कम होगा। बकाया भुगतान पर 15 प्रतिशत ब्याज का नियम पहले से तय है, देरी हो तो उसका इस्तेमाल कीजिए।
चौथी बात, कोल्हू-गुड़ के लालच से सावधान रहिए। त्योहार में गुड़ के दाम ऊंचे हैं, लेकिन मिल की पर्ची और तौल का रिकॉर्ड ही असली सुरक्षा है। गन्ना कहां देना है, पहले से तय कर लीजिए।
मुख्य बातें
- यूपी के गोदामों में 70.64 लाख क्विंटल चीनी का दावा: सहकारी मिलों के पास 13.40 लाख, निगम की मिलों के पास 2.93 लाख, निजी मिलों के पास 54.3 लाख क्विंटल से ज्यादा।
- गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने सभी DM को पत्र लिखकर स्टॉक के भौतिक सत्यापन और दामों की सतत निगरानी के निर्देश दिए; विशेष टीमें बाजारों और मिलों में जांच करेंगी।
- अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से मिलें दोबारा चालू होंगी, नवंबर में 2026-27 सत्र की नई चीनी बाजार में आएगी; किसानों को पर्ची और कागज तैयार रखने की सलाह।
स्रोत: दैनिक जागरण (15 अक्टूबर 2026), किसान तक (15 अक्टूबर 2026), किसान इंडिया (15 अक्टूबर 2026)
