गन्ना भाव

चीनी 65 रुपये किलो, फिर भी गन्ने का भाव लटका — 500 रुपये की मांग

✍️ Aamir Raza · 🗓 15 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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चीनी 65 रुपये किलो, फिर भी गन्ने का भाव लटका — 500 रुपये की मांग

कानपुर की शक्करपट्टी मंडी में मंगलवार को थोक भाव 6000 रुपये क्विंटल के पार चला गया। फुटकर दुकानों पर चीनी 65 रुपये किलो बिक रही है, जबकि सितंबर के आखिर में यही भाव 5400 से 5500 रुपये क्विंटल था। पंद्रह दिन में 600 से 700 रुपये की छलांग ने सबके होश उड़ा दिए हैं।

फिरोजाबाद में दैनिक जागरण की 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक थोक में 61 और फुटकर में 65 रुपये किलो भाव है। एक महीने पहले यही चीनी 55 रुपये किलो मिल रही थी। आगरा में फुटकर भाव 62 रुपये किलो पहुंच गया है। रक्षाबंधन पर 70 रुपये किलो बिकी चीनी के बाद राहत आई थी, पर दीपावली से पहले बाजार फिर भड़क गया है।

इन आंकड़ों के बीच गन्ना किसान के मन में एक ही सवाल खलता है: चीनी अगर 65 रुपये किलो बिक रही है, तो उसके गन्ने का दाम क्यों वहीं अटका है?

कोटे की कहानी: रिकॉर्ड आवंटन, फिर भी किल्लत

कानपुर शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखी है। एसोसिएशन का दावा है कि केंद्र ने अक्टूबर के पहले पखवाड़े के लिए 14 लाख टन और दूसरे पखवाड़े के लिए 16 लाख टन चीनी का कोटा दिया है। संगठन के मुताबिक यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक आवंटन है।

फिर भी किल्लत बनी हुई है। एसोसिएशन का आरोप है कि पहले पखवाड़े के कोटे की 75 से 80 प्रतिशत चीनी मिलों ने यूपी के बाहर और बड़े खरीदारों को बेच दी। सरकार ने आम ग्राहकों के लिए मिल भाव 4500-4600 रुपये क्विंटल (जीएसटी अलग) तय किया था, पर यूपी के बाहर या बल्क खरीदारों के लिए कोई सीमा नहीं है। अध्यक्ष गोपाल किशन माहेश्वरी की चिट्ठी के मुताबिक यूपी के व्यापारियों को 4600, जबकि बाहर के व्यापारियों को करीब 5000 रुपये क्विंटल पर चीनी मिल रही है। संगठन ने मांग की है कि यह भाव अंतर खत्म किया जाए।

फिरोजाबाद के व्यापारी भी कोटा कम मिलने की बात कह रहे हैं, और 6 से 12 अक्टूबर के बीच मिल भाव 13 प्रतिशत बढ़कर 4600 से 5200 रुपये क्विंटल हो गया।

उत्पादन का गणित भी बिगड़ा

अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने 8 अक्टूबर की रिपोर्ट में 2026-27 का उत्पादन अनुमान 33.6 से घटाकर 29.5 मिलियन टन कर दिया, यानी करीब 14 प्रतिशत की कटौती। बारिश की कमी से गन्ने की रिकवरी घटने और गन्ना उत्पादन 455 से घटकर 434 मिलियन टन रहने का अनुमान है। द हिंदू बिजनेसलाइन का विश्लेषण तो 270 लाख टन तक कह रहा है। राहत की बात यह है कि यूपी का अनुमान 96 लाख टन पर स्थिर है, क्योंकि नहर और ट्यूबवेल की सिंचाई ने यूपी की फसल को संभाल रखा है। सरकार ने 10 लाख टन शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है, पर त्योहारी मांग के बीच तेजी थमी नहीं है।

गन्ने का भाव: किसान को क्या मिला

केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये क्विंटल तय किया है, जो पिछले सत्र के 355 से सिर्फ 10 रुपये ज्यादा है। यह फैसला 1 अक्टूबर 2026 से लागू है।

यूपी के किसानों के लिए असली भाव एसएपी से तय होता है। पिछले सत्र 2025-26 में एसएपी अगेती के लिए 400 और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये क्विंटल था। नए सत्र 2026-27 के एसएपी की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है। पेराई सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन भाव का फैसला लंबित है। यही देरी किसान संगठनों की नाराजगी की बड़ी वजह है।

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने 60 रुपये से ऊपर की चीनी पर गन्ने का भाव कम से कम 500 रुपये क्विंटल करने की मांग की है। संगठन ने 16 अक्टूबर को सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। मुरादाबाद की किसान युवा संसद में भी 500 रुपये की मांग पुरजोर उठी, जहां बताया गया कि कोल्हू-क्रशरों पर गन्ना 490 से 500 रुपये क्विंटल पर खरीदा जा रहा है।

किसान के लिए इसका क्या मतलब

सवाल यह नहीं है कि चीनी 65 रुपये किलो बिक रही है या 70 रुपये। सवाल यह है कि इस महंगाई का फायदा किसकी जेब में जा रहा है। मिलें 4600 से 5200 रुपये क्विंटल पर चीनी बेच रही हैं, यानी प्रति किलो करीब 46 से 52 रुपये के भाव पर। किसान को उसके गन्ने के लिए 365 से 400 रुपये क्विंटल मिलते हैं। बीच का यह अंतर ही टकराव की जड़ है।

पेराई से पहले किसानों के लिए तीन काम सबसे अहम हैं: समिति से पर्ची और तौल की पूरी जानकारी लें; पिछले सत्र का बकाया लंबित हो तो लिखित शिकायत दर्ज कराएं, क्योंकि देरी पर 15 प्रतिशत ब्याज का नियम किसानों के पक्ष में है; और बीज की बुवाई व पेड़ी प्रबंधन पर ध्यान दें, क्योंकि यूपी में इस साल फसल की हालत दूसरे राज्यों से बेहतर है।

दीपावली के बाजार में चीनी के दाम और उछल सकते हैं, पर गन्ने का भाव सरकार के ऐलान से ही बदलेगा। 16 अक्टूबर के प्रदर्शन पर किसानों की नजर रहेगी।

मुख्य बातें

  • कानपुर में चीनी 65 रुपये किलो, थोक भाव 6000 रुपये क्विंटल पार; सितंबर अंत से 600-700 रुपये की तेजी।
  • व्यापारी संगठनों का आरोप: रिकॉर्ड कोटे के बावजूद 75-80% चीनी यूपी के बाहर बेची गई; मुख्यमंत्री को चिट्ठी।
  • केंद्र ने FRP 365 रुपये क्विंटल तय किया; यूपी के 2026-27 एसएपी का ऐलान बाकी; किसान संगठन 500 रुपये की मांग पर 16 अक्टूबर को प्रदर्शन करेंगे।

स्रोत: दैनिक जागरण (कानपुर व फिरोजाबाद, अक्टूबर 2026), नारद संवाद, रॉयटर्स/USDA रिपोर्ट (8 अक्टूबर 2026), द हिंदू बिजनेसलाइन (13 अक्टूबर 2026), रूरल वॉयस, रॉयल बुलेटिन, वेबवर्ता।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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