चीनी 59.50 रुपये किलो पहुंची, कोलकाता में 65: गन्ना किसान को कब मिलेगा फायदा?

बरेली के श्यामगंज बाजार में एक दुकानदार चार दिन पहले 60 रुपये किलो का भाव सुनकर लौटा था। चार दिन में 400 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी ने गन्ना बेल्ट में एक ही सवाल खड़ा कर दिया है। जब चीनी इतनी महंगी बिक रही है तो गन्ने का दाम अब तक क्यों नहीं बढ़ा?
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में चीनी का औसत खुदरा भाव 59.50 रुपये प्रति किलो और थोक भाव 55.40 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। एक महीने में ही दोनों बाजारों में भाव 4 रुपये प्रति किलो से ज्यादा बढ़ चुका है। साल भर पहले खुदरा भाव 46.50 रुपये और थोक भाव 43.23 रुपये प्रति किलो था। यानी एक साल में चीनी 12 से 13 रुपये प्रति किलो महंगी हो गई है।
महानगरों में सबसे महंगी चीनी कहां
3 नवंबर को कोलकाता में खुदरा चीनी 65 रुपये प्रति किलो बिकी, जबकि एक साल पहले यही भाव 50 रुपये था। दिल्ली में भाव 64 रुपये रहा, साल भर पहले यह 46 रुपये था। मुंबई में चीनी 61 रुपये प्रति किलो बिकी, पिछले साल यह 45 रुपये थी। सितंबर में बरेली में चीनी करीब 40 रुपये प्रति किलो थी, अब वह 64 रुपये तक पहुंच गई है।
दाम बढ़ने के पीछे क्या है
भाव बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पिछले सत्र का उत्पादन है। 2025-26 के सत्र में चीनी का उत्पादन पहले के अनुमान से कम रहा, इसलिए त्योहारी मांग के समय बाजार में कसावट आ गई। सरकार ने स्टॉक सीमा लगाई, आयात की अनुमति दी और बाजार की निगरानी कड़ी की। पेराई सत्र भी जल्दी शुरू कराया गया। राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ के मुताबिक 2026-27 का पेराई सत्र 8 अक्टूबर से शुरू हुआ और 30 अक्टूबर तक देश की 152 मिलों ने 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन कर लिया है।
बरेली का विरोधाभास: मिल में स्टॉक, बाजार में महंगाई
बरेली में एक विरोधाभास भी सामने आया है। जिले की सेमीखेड़ा मिल में 57 हजार क्विंटल और फरीदपुर मिल में 67 हजार क्विंटल चीनी का स्टॉक बताया गया है। दोनों को मिलाकर 1.24 लाख क्विंटल चीनी मिलों में पड़ी है। मिलों से थोक भाव 4,500 से 4,700 रुपये प्रति क्विंटल, यानी 45 से 47 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। इसके बावजूद फुटकर बाजार में भाव 60 से 64 रुपये तक पहुंच गया है। जिला गन्ना अधिकारी का कहना है कि मिलों से चीनी का उठान ही नहीं हो रहा है। फिर भी मिल भाव और बाजार भाव के बीच 15 रुपये से ज्यादा का फर्क आम ग्राहक के गले नहीं उतर रहा है। यही फर्क किसानों के मन में भी सवाल पैदा करता है। अगर चीनी मिल से 45 रुपये में निकल रही है और बाजार में 64 रुपये में बिक रही है, तो इस बीच की कमाई का हिस्सा गन्ना उगाने वाले तक क्यों नहीं पहुंच रहा?
यूपी के किसान के लिए असली सवाल: SAP कब
यहीं से बात गन्ने के मूल्य पर आकर रुकती है। पश्चिमी यूपी में पेराई सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य, यानी SAP, अब तक घोषित नहीं हुआ है। पिछले सत्र 2025-26 में अगैती किस्म का SAP 400 रुपये और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल तय था। इस बार किसान संगठन 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने लागत में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की बात कही है। सरकार की तरफ से 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार की खबरें आई हैं, लेकिन अंतिम फैसला अब तक नहीं हुआ है। डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी की लागत बढ़ी है, और जब चीनी का भाव साल भर में 12 से 13 रुपये किलो बढ़ गया है तो गन्ने का दाम कम से कम लागत के हिसाब से तो बढ़ना ही चाहिए।
काश्तकार को इस खबर से क्या करना चाहिए
चीनी महंगी होने का मतलब यह नहीं है कि गन्ने का भुगतान अपने आप बढ़ जाएगा। SAP सरकार तय करती है और भुगतान मिलों से आता है, इसलिए दोनों पर अलग अलग नजर रखनी होगी। जो किसान इस सत्र में गन्ना दे रहे हैं, उनके लिए पर्ची, तौल और भुगतान की तारीख का रिकॉर्ड सबसे बड़ा सहारा है। पर्ची संभालकर रखें, तौल के समय केंद्र पर मौजूदगी रखें और भुगतान में देरी हो तो समिति के जरिए लिखित में सवाल उठाएं। SAP की घोषणा पर भी नजर रखें, क्योंकि तभी यह साफ होगा कि इस सत्र में अगैती और सामान्य गन्ने का क्या भाव मिलेगा। तब तक पुराने सत्र के 400 रुपये के भाव को इस सत्र का भाव मानकर हिसाब लगाना गलत होगा, क्योंकि 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है।
मुख्य बातें
- देश में चीनी का औसत खुदरा भाव 59.50 रुपये किलो पहुंचा, एक महीने में 4 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।
- कोलकाता में 65, दिल्ली में 64 और मुंबई में 61 रुपये किलो भाव रहा, जबकि बरेली में चार दिन में 400 रुपये क्विंटल की बढ़ोतरी हुई।
- 2026-27 का SAP अब तक घोषित नहीं हुआ है, किसान 500 रुपये मांग रहे हैं और सरकार 10 से 20 रुपये बढ़ोतरी पर विचार कर रही है।
स्रोत: उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़े, पीटीआई के हवाले से बिजनेस लाइन (4 नवंबर 2026); अमर उजाला, बरेली (2 नवंबर 2026); बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी (3 नवंबर 2026)।
