चीनी ₹57.82 किलो, स्टॉक 10 साल में सबसे कम: यूपी गन्ना किसानों को 3 बड़े फायदे

लखनऊ, 17 अक्टूबर। दिवाली से पहले चीनी ₹57.82 किलो तक पहुंच गई है। उपभोक्ता के लिए यह खबर चिंता की है, लेकिन गन्ना किसान के लिए इसमें एक अच्छी खबर छिपी है: देश में चीनी का स्टॉक एक दशक में सबसे कम बचा है, और मिलों को अब तुरंत गन्ना चाहिए।
सीधी भाषा में समझें तो इस बार किसानों के तीन फायदे साफ दिख रहे हैं। पहला, मिलें पेराई जल्दी शुरू कर रही हैं, यानी कटाई और तौल का समय जल्दी आएगा। दूसरा, स्टॉक की कमी का मतलब है कि मिलों को गन्ने की ज्यादा जरूरत होगी, जो भुगतान की मांग को भी मजबूत करेगा। तीसरा, सरकार खुद दाम पर नजर रख रही है और आपूर्ति बढ़ाने के कदम उठा रही है।
स्टॉक घटकर 3.5-3.6 मिलियन टन: एक दशक का सबसे निचला स्तर
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की 17 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026-27 चीनी सत्र की शुरुआत में मिलों के पास ओपनिंग स्टॉक घटकर 3.5 से 3.6 मिलियन टन रह गया है। उद्योग सूत्रों ने कहा है कि यह एक दशक से ज्यादा समय में सबसे कम स्टॉक है; तुलना के लिए, 1 अक्टूबर 2025 को यह करीब 5 मिलियन टन था।
कारण साफ है। पांच साल में देश का चीनी उत्पादन 2021-22 के 35.8 मिलियन टन से घटकर 2025-26 में करीब 28.1 मिलियन टन रह गया, जबकि खपत 27.3 से बढ़कर 28.7 मिलियन टन हो गई। ऊपर से दिवाली की मांग तेज है।
खुदरा भाव भी यही कहता है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रकोष्ठ के हवाले से बताया गया कि शुक्रवार को चीनी का औसत खुदरा भाव ₹57.82 प्रति किलो दर्ज हुआ, जो पिछले साल से 24 फीसदी ज्यादा है। एक सरकारी अधिकारी के अनुमान के मुताबिक, अगले दो हफ्तों में यूपी, महाराष्ट्र और कर्नाटक में पेराई शुरू होते ही भाव ₹52 किलो तक आ सकता है।
सरकार ने मिलों को दी एक्स्ट्रा बिक्री की छूट
शुक्रवार को खाद्य मंत्रालय ने निर्देश दिया: मिलें अक्टूबर 2026 में बनी चीनी को अक्टूबर और नवंबर दोनों महीनों में बेच सकती हैं, और यह बिक्री नियमित मासिक कोटे के ऊपर होगी। यह छूट त्योहारी सीजन में आपूर्ति बनाए रखने के लिए दी गई है।
मंत्रालय अब घरेलू बिक्री का कोटा हर पखवाड़े तय करता है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख टन और दूसरे पखवाड़े (16-31 अक्टूबर) के लिए 14 लाख टन कोटा दिया गया है। द हिंदू बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले पखवाड़े के कोटे में तीन बड़े राज्यों की मिलों को 10.77 लाख टन मिला, जिसमें उत्तर प्रदेश को 4.18 लाख टन, महाराष्ट्र को 4.39 लाख टन और कर्नाटक को 2.20 लाख टन आवंटित हुआ।
AISTA चेयरमैन प्रफुल विथलानी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे त्योहारी सीजन में घरेलू आपूर्ति काफी बढ़ जाएगी। उन्होंने बताया कि कई मिलों ने सामान्य समय से करीब एक महीने पहले गन्ना पेराई शुरू कर दी है।
सरकार ने इसके अलावा दो और कदम उठाए हैं। पिछले महीने एक दशक में पहली बार 1 मिलियन टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात किया गया। जमाखोरी रोकने के लिए व्यापारियों की स्टॉक सीमा 200 टन से घटाकर 100 टन कर दी गई, जो 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगी, और स्टॉक रखने की अवधि 30 दिन से घटाकर 15 दिन की गई है।
उत्पादन का अनुमान: 28 मिलियन टन तक गिर सकता है
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बलानी के हवाले से फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने बताया कि 2026-27 सत्र में शुद्ध चीनी उत्पादन घटकर 28 मिलियन टन रह सकता है, जबकि पिछले सत्र में यह 31 मिलियन टन था। वजह महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में कम बारिश से उपज पर असर है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने भी 2026-27 का पूर्वानुमान 336 लाख टन से घटाकर 295 लाख टन कर दिया है।
एथेनॉल की दिशा में भी बड़ा बदलाव आया है। क्रिसिल के मुताबिक, एथेनॉल की ओर जाने वाली चीनी पांच साल में चार गुना बढ़कर करीब 3 मिलियन टन (2025-26) हो गई थी। लेकिन अब सरकार ने तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि 2026-27 में चीनी का एथेनॉल में डायवर्जन शून्य किया जाए। यानी ज्यादा चीनी बाजार में रहेगी, एथेनॉल में कम जाएगी।
यूपी के गन्ना किसान के लिए इसका क्या मतलब है
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, और यहां की 122 चीनी मिलों में अगले दो हफ्तों में पेराई शुरू हो रही है। देवबंद समेत कई मिलें 28 अक्टूबर से पेराई शुरू करने जा रही हैं।
गन्ना कटाई तैयार रखें: मिलें सामान्य समय से करीब एक महीने पहले पेराई शुरू कर चुकी हैं। पर्ची और सट्टा eGanna पर जांच लें, ताकि तौल के समय दिक्कत न हो। समस्या हो तो टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
भुगतान पर भी नजर रखें: स्टॉक कम है, तो मिलों को गन्ना ज्यादा चाहिए होगा। जमाखोरी पर सरकार की कड़ाई से बाजार का दबाव मिलों पर रहेगा, किसानों पर नहीं।
एक सलाह और। भाव कम रहने की उम्मीद में गन्ना रोके रखना हर बार समझदारी नहीं होता। इस बार मांग और स्टॉक की तस्वीर मिलों के पक्ष में नहीं है, जो किसानों की सौदेबाजी की स्थिति को मजबूत करती है।
मुख्य बातें
- चीनी का ओपनिंग स्टॉक 3.5-3.6 मिलियन टन: एक दशक में सबसे कम; खुदरा भाव ₹57.82 किलो, एक साल में 24 फीसदी बढ़ा
- सरकार ने मिलों को अक्टूबर की चीनी अक्टूबर-नवंबर में नियमित कोटे के ऊपर बेचने की छूट दी; यूपी को पहले पखवाड़े में 4.18 लाख टन कोटा
- यूपी की 122 मिलों में पेराई शुरू होने वाली है; कटाई-तौल और भुगतान, दोनों मोर्चों पर किसानों का पलड़ा भारी
स्रोत: फाइनेंशियल एक्सप्रेस (17 अक्टूबर 2026), पीटीआई (डेली पायनियर/फ्री प्रेस जर्नल, 16 अक्टूबर 2026), द हिंदू बिजनेसलाइन, रूरल वॉयस
