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चीनी 56 रुपये किलो, गन्ना अब भी 400 पर: पेराई से पहले बढ़ा दबाव, 16 अक्टूबर को प्रदर्शन

✍️ Aamir Raza · 🗓 15 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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चीनी 56 रुपये किलो, गन्ना अब भी 400 पर: पेराई से पहले बढ़ा दबाव, 16 अक्टूबर को प्रदर्शन

खुदरा बाजार में चीनी 56.67 रुपये किलो पर बिक रही है। मिल के गेट से बाहर निकलते-निकलते उसके भाव पिछले 10 दिनों में करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल चढ़ गए। लेकिन खेत में खड़ा गन्ना आज भी उसी भाव पर बिकेगा जिस भाव पर पिछले सत्र में बिका था। यह अंतर ही इस हफ्ते पश्चिमी यूपी की गन्ना बेल्ट का सबसे बड़ा सवाल बन गया है, और पेराई शुरू होने से ठीक पहले यह सवाल सड़कों तक पहुंचने वाला है।

दाम का गणित: चीनी महंगी, गन्ना वहीं का वहीं

आंकड़े खुद कहानी कहते हैं। उपभोक्ता कार्य विभाग के अनुसार 13 अक्टूबर को चीनी का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 56.67 रुपये प्रति किलो था, जबकि थोक भाव 5,254.91 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज हुआ। त्योहारी मांग के चलते भाव और ऊपर जाने का डर है।

दूसरी तरफ गन्ने के भाव की तस्वीर यह है। केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 फीसदी चीनी रिकवरी पर लागू होगा। पिछले सत्र यह 355 रुपये था। उत्तर प्रदेश में 2025-26 के लिए राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) अगेती किस्म के लिए 400 रुपये और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था। 2026-27 के लिए यूपी का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। किसान संगठन पिछले सत्र के भाव से संतुष्ट नहीं हैं और उनकी मांग 500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। चीनी के खुदरा भाव में आई तेजी ने इस मांग को और धार दे दी है।

एक हफ्ते में दिल्ली से बाजार तक: क्या-क्या हुआ

गन्ने के मुद्दे पर केंद्र सरकार की सक्रियता भी इसी हफ्ते दिखी। 13 अक्टूबर को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी की मौजूदगी में किसान संगठनों के साथ बैठक हुई, जिसमें तौल और रिकवरी के आंकड़ों में गड़बड़ी के मुद्दे उठे। बैठक के बाद एक उच्चस्तरीय समिति एक सप्ताह के भीतर गठित करने की घोषणा हुई है, जो तय समयसीमा में सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी।

बाजार की तरफ भी कदम उठे। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने 13 से 31 अक्टूबर के लिए 14 लाख टन चीनी का बिक्री कोटा तय समय से दो दिन पहले जारी कर दिया, ताकि दिवाली से पहले बाजार में आपूर्ति बनी रहे। इसमें यूपी को 4.51 लाख टन का हिस्सा मिला है। साथ ही डीलरों के स्टॉक पर शिकंजा कसा गया है। 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक कोई भी डीलर 1,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख पाएगा और स्टॉक 15 दिन के भीतर बेचना होगा। इससे पहले अगस्त में यह सीमा 4,000 क्विंटल थी।

16 अक्टूबर: जिलाधिकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन

इस बीच किसान संगठनों का दबाव सड़क पर उतरने वाला है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने 16 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का ऐलान किया है। मुजफ्फरनगर में हुई सहारनपुर और मेरठ मंडल की बैठक में नौ जिलों के पदाधिकारी शामिल हुए थे।

संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने मांग रखी है कि जब चीनी के दाम 60 रुपये किलो को पार कर गए हैं, तो गन्ने का मूल्य कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए। प्रदेश अध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा के अनुसार मूल्य तय करते समय उत्पादन लागत, मजदूरी, सिंचाई, किसान के श्रम और खेती के जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए। बेमौसम बारिश से बर्बाद फसलों का मुआवजा और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी प्रदर्शन की प्रमुख मांगों में शामिल है।

किसान पर इसका क्या असर पड़ेगा

चीनी के भाव ऊंचे रहने का एक सीधा फायदा यह है कि मिलों की वित्तीय स्थिति सुधरती है, जिससे किसानों के गन्ना भुगतान की संभावना बेहतर होती है। प्रदेश की 122 चीनी मिलों में से बड़ी संख्या पश्चिमी यूपी में है। लेकिन भाव का असली फैसला एसएपी की घोषणा पर टिका है, जो अभी बाकी है।

पेराई शुरू होने से पहले किसानों के लिए कुछ काम जरूरी हैं। अपना गन्ना सर्वे रिकॉर्ड जांच लें, रकबा और किस्म सही दर्ज है या नहीं। बैंक खाता चालू और आधार से लिंक रखें ताकि भुगतान में देरी न हो। अपने क्रय केंद्र की जानकारी पहले से ले लें। रिकॉर्ड में गड़बड़ी दिखे तो गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। टोल-फ्री किसान हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर भी मदद मिलती है। नियम के अनुसार मिल को गन्ना लेने के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है।

मुख्य बातें

  • चीनी का खुदरा भाव 56.67 रुपये किलो (13 अक्टूबर), लेकिन यूपी का एसएपी 2026-27 अभी घोषित नहीं हुआ; 2025-26 में अगेती का भाव 400 रुपये था।
  • केंद्र ने 14 लाख टन कोटा दो दिन पहले जारी किया और 15 अक्टूबर से डीलरों पर 1,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा लगाई।
  • भाकियू (अराजनैतिक) 16 अक्टूबर को सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन करेगी; मांग: गन्ने का भाव 500 रुपये क्विंटल, बारिश से बर्बाद फसल का मुआवजा और खाद की उपलब्धता।

स्रोत: बिजनेस स्टैंडर्ड और एबीपी लाइव (चीनी कोटा और स्टॉक सीमा, 14 अक्टूबर 2026), किसान तक (केंद्र की बैठक और एफआरपी 365, 13 अक्टूबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (एफआरपी वृद्धि), जी बिजनेस और किसान इंडिया (एसएपी 2025-26), रॉयल बुलेटिन और लाइव हिंदुस्तान (भाकियू प्रदर्शन, 12-13 अक्टूबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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