चीनी 13 रुपये किलो सस्ती, दिवाली से पहले और गिरेगी? गन्ना किसान के लिए आगे का हाल

दिवाली की मिठाइयों की सूची बनाते वक्त इस बार जेब को राहत मिलेगी। जो चीनी एक महीने पहले बाजार में 65 रुपये किलो तक बिक रही थी, वह अब उत्तर प्रदेश के कई शहरों में 52 से 55 रुपये किलो में मिल रही है। यानी एक महीने में 13 रुपये प्रति किलो की सीधी गिरावट आई है। थोक बाजार में कमी और तेज है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक मिलों से निकलने वाली चीनी का भाव करीब 25 से 30 प्रतिशत घट चुका है। त्योहारी मांग के बावजूद उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में खुदरा दाम और घट सकते हैं।
थोक से खुदरा तक: दाम कितने गिरे
इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी के मुताबिक पूरे देश में एक्स-मिल चीनी का औसत भाव अब करीब 4,450 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बना हुआ है। खुदरा दुकानों पर इसका असर थोड़ा धीमा है, क्योंकि मिल से निकलने के बाद चीनी कई हाथों से होकर ग्राहक तक पहुंचती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन हफ्तों में औसत खुदरा भाव 65 रुपये से घटकर 58.50 रुपये प्रति किलो रह गया है, यानी करीब 10 प्रतिशत की कमी।
यूपी के बाजारों में क्या भाव चल रहा है
सरकारी औसत से भी सस्ती चीनी मिल रही है यूपी की कई मंडियों में। समाचार वार्ता की रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी, लखनऊ और गोंडा बेल्ट में चीनी अब 52 से 55 रुपये प्रति किलो बिक रही है। एक हफ्ते पहले यही चीनी 58 रुपये किलो थी और एक महीने पहले 65 रुपये किलो तक पहुंच गई थी।
दाम नीचे रखने के लिए सरकार के 4 कदम
त्योहारी सीजन से पहले सरकार ने एक के बाद एक कई कदम उठाए हैं, जिससे चीनी के दाम नीचे बने रहें।
बल्क खरीदारों को 30 दिन का स्टॉक: 18 सितंबर को सरकार ने बड़ी मात्रा में चीनी इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के लिए स्टॉक सीमा 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दी। शर्त यह है कि अतिरिक्त स्टॉक सिर्फ आयातित चीनी से पूरा होगा, ताकि घरेलू बाजार पर दबाव न बढ़े। हर शुक्रवार कंपनियों को foodstock.dfpd.gov.in पोर्टल पर अपना स्टॉक बताना अनिवार्य है।
व्यापारियों की स्टॉक सीमा आधी: सितंबर में सरकार ने चीनी व्यापारियों की स्टॉकहोल्डिंग सीमा 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी, ताकि जमाखोरी रुके और बाजार में सप्लाई बनी रहे।
खुदरा तक फायदा पहुंचाने का निर्देश: खाद्य सचिव ने उद्योग और व्यापारिक संगठनों के साथ बैठक में कहा कि थोक में 25 प्रतिशत की गिरावट आई है, पर ग्राहक को इसका सिर्फ 10 प्रतिशत फायदा मिला है। सरकार ने थोक दरों की कमी का पूरा फायदा तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का निर्देश दिया है।
आयात से सप्लाई मजबूत: सरकार ने टैरिफ रेट कोटा के तहत 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति दी है, ताकि त्योहारी मांग में कोई कमी न पड़े।
गन्ना किसान के लिए इसका मतलब क्या है
किसान इस खबर को दो नजरों से देख सकता है। घर के खर्च के हिसाब से तो यह राहत है। दिवाली पर मिठाई और घरेलू इस्तेमाल की चीनी सस्ती मिलेगी, त्योहारी बजट हल्का होगा। लेकिन गन्ना बेचने वाले के तौर पर एक सवाल भी उठता है। चीनी के दाम गिरने का मतलब है मिलों की कमाई घट रही है, और मिलों की कमाई ही गन्ना भुगतान की नींव है। आज 1 अक्टूबर 2026 से नया चीनी सत्र शुरू हो गया है और इसी के साथ केंद्र का एफआरपी बढ़कर 365 रुपये प्रति क्विंटल लागू हो गया है। यानी मिलों को किसानों को भाव ज्यादा देना होगा, जबकि चीनी बेचकर मिलने वाला पैसा घट रहा है।
ऊपर से यूपी के 2026-27 सत्र का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। पुराने 2025-26 सत्र का 400 रुपये वाला भाव (अगेती) इस नए सत्र पर लागू नहीं माना जाएगा। अगर थोक दाम कमजोर बने रहे तो नए सत्र में भुगतान की रफ्तार पर दबाव आ सकता है। यह अभी आशंका है, हकीकत नहीं। इसीलिए आने वाले हफ्तों में भुगतान की स्थिति पर नजर रखना समझदारी होगी।
भुगतान की स्थिति खुद जांचते रहें
गन्ना डालने से पहले और बाद में, अपने भुगतान की स्थिति खुद देखते रहें। caneup.in पोर्टल और eGanna ऐप पर पर्ची, तौल और भुगतान का ब्योरा उपलब्ध है। अपनी पर्ची की कॉपी संभालकर रखें और किसी भी समस्या पर गन्ना विकास विभाग के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
पश्चिम यूपी में मिलों के चलने की तारीखों और नए सत्र की तैयारियों पर हमने अलग से खबर दी है: पश्चिम यूपी की मिलें अक्टूबर से चलेंगी, किसानों को पर्ची कैलेंडर पर नजर रखने की सलाह। पुराने सत्र के भुगतान के आंकड़ों की जानकारी यहां पढ़ें: गन्ना भुगतान 97 प्रतिशत पूरा होने का दावा, बकाया 35,000 करोड़।
मुख्य बातें
- त्योहारों से पहले चीनी सस्ती: यूपी के कई शहरों में एक महीने में 65 से 52 रुपये किलो, थोक भाव करीब 25-30% घटा।
- सरकार ने बल्क खरीदारों का स्टॉक 30 दिन तक बढ़ाया, व्यापारियों की सीमा आधी की और थोक गिरावट का पूरा फायदा खुदरा ग्राहक तक पहुंचाने का निर्देश दिया।
- 1 अक्टूबर से एफआरपी 365 रुपये लागू, पर 2026-27 का यूपी एसएपी अभी घोषित नहीं; चीनी के कम दाम मिलों की कमाई घटा सकते हैं, इसलिए caneup.in और eGanna पर भुगतान की स्थिति देखते रहें।
स्रोत: एनडीटीवी इंडिया, न्यूज़18 हिंदी, डेक्कन हेराल्ड, बिजनेस स्टैंडर्ड, समाचार वार्ता।
