छत्तीसगढ़ में गन्ना ₹425 प्रति क्विंटल, यूपी में ₹400 पर अटका: किसानों ने मांगा ₹600

₹70 प्रति क्विंटल। यही वो संख्या है जिसने शुक्रवार देर रात छत्तीसगढ़ के गन्ना किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी, और साथ ही उत्तर प्रदेश के किसानों के सवाल को और तीखा कर दिया: अगर पड़ोसी राज्य ₹425 दे सकता है, तो यूपी में भाव ₹400 पर ही क्यों अटका है?
रायपुर से 10 अक्टूबर को आई खबर के मुताबिक, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने शक्कर कारखानों में गन्ने की खरीद दर ₹355 से बढ़ाकर ₹425 प्रति क्विंटल करने का फैसला किया है। यह फैसला भारतीय किसान संघ के प्रदेश प्रतिनिधिमंडल के साथ चली गहन चर्चा के बाद लिया गया। नईदुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन के प्रदेश अध्यक्ष माधो सिंह ठाकुर के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में संगठन मंत्री मनीष शर्मा और महामंत्री नवीन शेष शामिल थे। बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा भी मौजूद रहे।
खास बात यह है कि यह बढ़ी दर सिर्फ आगे की खरीद पर लागू नहीं होगी। पेराई सत्र 2025-26 के दौरान अब तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान भी नए भाव से किया जाएगा।
आंदोलन के बाद फैसला
यह फैसला यूं ही नहीं हुआ। 8 अक्टूबर को भारतीय किसान संघ के आह्वान पर छत्तीसगढ़ भर के किसानों ने गन्ने के भाव और बकाया भुगतान को लेकर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था। कबीरधाम जिले में किसान ट्रैक्टर रैली निकालकर कई प्रमुख मार्गों पर चक्काजाम कर चुके थे। यही दबाव सरकार को देर रात किसान नेताओं से बातचीत पर लाया।
विस्तार न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों की प्रमुख मांगों में गन्ने के मूल्य में बढ़ोतरी के साथ बकाया भुगतान और खेती से जुड़ी अन्य समस्याओं का समाधान शामिल था। बैठक में संगठन ने धान किसानों के करीब ₹1700 करोड़ के बकाया बोनस पर भी तेज निर्णय की मांग रखी।
अब देश में दूसरा सबसे ज्यादा भाव छत्तीसगढ़ में
इस बढ़ोतरी के बाद छत्तीसगढ़ पूरे देश में गन्ने का दूसरा सबसे ऊंचा भाव देने वाला राज्य बन गया है। नईदुनिया के मुताबिक, पंजाब में गन्ने का भाव ₹485 प्रति क्विंटल के साथ पहले नंबर पर है, और अब छत्तीसगढ़ ₹425 के साथ दूसरे स्थान पर आ गया है। इसके बाद हरियाणा में ₹415, उत्तराखंड में ₹405, उत्तर प्रदेश में ₹400 और मध्य प्रदेश में करीब ₹350 प्रति क्विंटल भाव है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ की ₹425 की दर अब उत्तर प्रदेश के ₹400 के SAP से ₹25 प्रति क्विंटल ज्यादा हो गई है। दो साल पहले तक यूपी का भाव कई पड़ोसी राज्यों से ऊपर था, लेकिन अब तस्वीर उलटती दिख रही है।
यूपी के किसानों की बढ़ी उम्मीद, सरकार पर दबाव
यह खबर यूपी के गन्ना किसानों के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने को है और नए भाव की घोषणा अभी बाकी है। 7 अक्टूबर को लखनऊ के लोक भवन में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में गन्ने के SAP संशोधन की कोई घोषणा नहीं हुई। फिलहाल पेराई सत्र 2025-26 का भाव ही लागू है: अगेती प्रजाति के लिए ₹400 और सामान्य प्रजाति के लिए ₹390 प्रति क्विंटल।
साफ रहे कि यह 2025-26 का भाव है। पेराई सत्र 2026-27 के लिए SAP की घोषणा अभी बाकी है, और सरकार ने कोई तारीख नहीं बताई है। किसान संगठनों की ओर से लगातार ₹600 प्रति क्विंटल भाव की मांग उठ रही है, जो खाद, डीजल, सिंचाई और मजदूरी की बढ़ती लागत को देखते हुए रखी गई है।
अब छत्तीसगढ़ की ₹425 की घोषणा ने इस मांग को नैतिक बल दिया है। किसान संगठनों का तर्क सीधा है: जब छत्तीसगढ़ जैसे राज्य ने आंदोलन के बाद ₹70 बढ़ा दिया, तो 122 चीनी मिलों वाला देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य पीछे क्यों रहे?
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
छत्तीसगढ़ की बढ़ोतरी सीधे यूपी किसानों की जेब में नहीं डालती, लेकिन इसका असर दो तरह से होगा। पहला, प्रदेश सरकार पर नया भाव घोषित करने का दबाव और बढ़ेगा। जब पड़ोसी राज्य भाव बढ़ा देता है, तो किसान संगठनों को आंदोलन का ठोस आधार मिल जाता है।
शिकायत या जानकारी के लिए सरकार की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर कॉल किया जा सकता है। एसएमएस के जरिए जानकारी के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध है।
मुख्य बातें
- छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ने की खरीद दर ₹355 से बढ़ाकर ₹425 प्रति क्विंटल की; ₹70 की वृद्धि का फायदा पेराई सत्र 2025-26 की अब तक की खरीद पर भी मिलेगा।
- फैसला 8 अक्टूबर के किसान आंदोलन और भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के बाद 10 अक्टूबर देर रात लिया गया।
- अब छत्तीसगढ़ देश का दूसरा सबसे ऊंचा भाव देने वाला राज्य (पंजाब ₹485, हरियाणा ₹415, उत्तराखंड ₹405, यूपी ₹400, मध्य प्रदेश ~₹350); यूपी में 2026-27 का SAP घोषित होना बाकी है और किसान संगठन ₹600 की मांग कर रहे हैं।
स्रोत: नईदुनिया (10 अक्टूबर 2026); विस्तार न्यूज़ (10 अक्टूबर 2026)
