शाम 4 बजे पुलिस ने छीने पुतले, फिर 1 घंटे चली धक्का-मुक्की: छाता मिल धरना अब आंदोलन

विजयादशमी की शाम, ठीक चार बजे। मथुरा के छाता चीनी मिल धरने पर बैठे किसानों ने गन्ना विकास मंत्री, जिले के चारों विधायकों और सांसद के मुखौटे वाले पुतले उठाए ही थे कि पुलिस ने बीच में रोक दिया। पुतले छीन लिए गए। देखते ही देखते धरनास्थल पर ऐसी धक्का-मुक्की शुरू हो गई जो करीब एक घंटे तक चली। इस पूरे टकराव के बीच आंदोलन में शामिल महिलाएं भी पुलिस से भिड़ गईं।
छाता चीनी मिल 2008 से बंद पड़ी है। उसे दोबारा चालू कराने की मांग को लेकर 13 अगस्त से धरना चल रहा है — यानी इस आंदोलन को ढाई महीने से ज्यादा हो चुके हैं। धरने की अगुवाई पूर्व सैनिक परिषद कर रहा है। विजयादशमी से पहले ही ऐलान हो चुका था — इस दिन जिले के जनप्रतिनिधियों का पुतला दहन होगा। सुबह से ही धरनास्थल पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
चार बजे के बाद क्या-क्या हुआ
पुलिस के पुतले छीनने के बाद आंदोलनकारियों ने एक और पुतला निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसे भी कब्जे में ले लिया। खबरों के मुताबिक धरनास्थल पर एक तीसरा पुतला भी रखा था, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया। छिपाकर रखे गए पुतले भी उठा लिए गए।
इसके बाद तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। आंदोलनकारी पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी पुलिस से भिड़ गईं, लेकिन पुतले बचा नहीं पाईं। करीब एक घंटे तक एडीएम प्रशासन अमरेश कुमार, एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह और एसपी देहात आलोक राज नारायण ने किसानों को समझाया और शांतिपूर्ण धरने की अपील की। आखिर में धरने के मुख्य संचालक पूर्व सूबेदार ललित कर्मयोगी ने पुतला दहन स्थगित करने का ऐलान कर दिया।
मौके पर एसडीएम अखिलेश सिंह, तहसीलदार नितिन, नायब तहसीलदार अनमोल गर्ग, सीओ छाता भूषण वर्मा और सीओ गोवर्धन अनिल कुमार समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। रिपोर्टों के मुताबिक आसपास के गांवों में भी कुछ स्थानों पर पुतले रखे गए थे। यानी आंदोलन का दायरा धरनास्थल से बाहर निकल चुका था।
दूर खेत में पुतला दहन का दावा
घटना के बाद जो मोड़ आया, वह सबसे दिलचस्प था। धरनास्थल से दूर एक खेत में किसी ने जनप्रतिनिधियों के मुखौटे वाला पुतला जला दिया। आंदोलनकारियों ने इस घटना का वीडियो प्रसारित किया और पुतला दहन का दावा किया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी फैल रहा है।
प्रदर्शनकारी किसानों ने इसके बाद कहा — “किसान भाइयों ने अपना फर्ज निभाया है और प्रशासन ने अपनी ड्यूटी पूरी की है।” किसानों का आरोप है कि प्रशासन उनके विरोध प्रदर्शन में बाधा डालता है, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा। पुतला दहन स्थगित जरूर हुआ है, मांग वापस नहीं ली गई है।
18 साल से बंद मिल और एथेनॉल प्लांट का विवाद
छाता चीनी मिल 2008 से बंद है — करीब 18 साल हो गए। मिल बंद होने से इलाके के गन्ना किसानों को अपना गन्ना दूर की मिलों तक ढोना पड़ता है। ढुलाई का खर्च बढ़ता है और भुगतान में देरी भी होती है। किसानों की मांग सीधी है — मिल दोबारा चालू हो।
सरकार की ओर से कहा जा चुका है कि छाता चीनी मिल तीन चरणों में शुरू होगी और पहले चरण में एथेनॉल प्लांट लगेगा। किसान इसी शर्त से नाराज हैं। उनका कहना है कि उन्हें एथेनॉल प्लांट नहीं, पहले चीनी मिल चाहिए, ताकि उनका गन्ना स्थानीय स्तर पर बिक सके और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ें।
गन्ना किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
छाता का मामला सिर्फ एक मिल का नहीं है। प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं और उनमें से कई पुरानी मिलें बंद पड़ी हैं। जहां मिल बंद है, वहां के किसानों को दोहरी चोट लगती है। गन्ना दूर ढोना पड़ता है, तौल केंद्र दूर पड़ता है, और भुगतान में भी देरी होती है।
एथेनॉल प्लांट बनाम चीनी मिल का सवाल भी यहीं नहीं रुकता। अगर सरकार की तीन चरणों वाली योजना में पहले चरण के बाद काम अटक जाता है, तो इलाके के किसान एक और लंबा इंतजार झेलेंगे। यही वजह है कि छाता के किसान पहले चीनी मिल पर अड़े हैं।
जिन किसानों का गन्ना बंद मिलों के इलाके में बोया जाता है, उन्हें सलाह है कि सट्टा, सर्वे रिकॉर्ड और बैंक खाता अपडेट रखें। भुगतान संबंधी दिक्कत हो तो गन्ना विकास विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज कराएं।
आगे क्या होगा
फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी जगह खड़े हैं। किसान पुतला दहन स्थगित कर चुके हैं, लेकिन आंदोलन जारी रखने का ऐलान दोहरा चुके हैं। प्रशासन ने शांतिपूर्ण धरने की अपील की है। विजयादशमी की घटना इस आंदोलन की अब तक की सबसे तीखी घड़ी बन गई है — देखना होगा कि सरकार तीन चरणों की योजना पर ठोस कदम उठाती है या आंदोलन और तेज होता है।
मुख्य बातें
- विजयादशमी पर छाता चीनी मिल धरने में पुतला दहन रोकने पर पुलिस और किसानों में तीखी झड़प और करीब एक घंटे धक्का-मुक्की हुई।
- धरना 13 अगस्त से जारी है; मुख्य मांग 2008 से बंद चीनी मिल को दोबारा चालू करना है, किसान पहले चीनी मिल चाहते हैं, एथेनॉल प्लांट नहीं।
- एडीएम और एसपी स्तर के अधिकारियों के समझाने के बाद पुतला दहन स्थगित हुआ, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा।
स्रोत: दैनिक जागरण — “छाता चीनी मिल आंदोलन: मथुरा में पुतला दहन रोकने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प” (20 अक्टूबर 2026), “मथुरा के छाता चीनी मिल आंदोलन के दौरान पुतला दहन को लेकर पुलिस और किसानों में तीखी झड़प” (21 अक्टूबर 2026); स्थानीय न्यूज रिपोर्ट (20 अक्टूबर 2026)
