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एक हफ्ते में 600 रुपये महंगी हुई चीनी — गन्ना किसान के लिए खुशखबरी या नया झटका?

✍️ Aamir Raza · 🗓 10 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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एक हफ्ते में 600 रुपये महंगी हुई चीनी — गन्ना किसान के लिए खुशखबरी या नया झटका?

पिछले हफ्ते तक खबर यह चल रही थी कि चीनी सस्ती हो रही है। अब कहानी पलट गई है। चीनी उद्योग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक एक हफ्ते के अंदर मिलों से निकलने वाली चीनी का भाव करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल चढ़ गया है, क्योंकि मिलों से बाजार में चीनी की आवक घट गई है।

यह उलटफेर इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि 1 अक्टूबर को सरकार ने कहा था कि एक्स-मिल भाव 28 प्रतिशत घटकर तीन हफ्तों से स्थिर हैं। अब बड़ा सवाल है कि यह तेजी टिकेगी या सरकार दखल देगी। उद्योग जगत के मुताबिक अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी है।

बाजार में कहां, कितना भाव

9 अक्टूबर के ताजा बाजार भाव देखें तो महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी के दाम एक हफ्ते में 80 से 100 रुपये प्रति क्विंटल सुधरे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के भाव स्थिर बताए गए हैं। कोल्हापुर में S-grade चीनी 4,780 से 4,850 और मुजफ्फरनगर में M-grade 4,600 से 4,680 रुपये प्रति क्विंटल बिकी। खुदरा मंडियों में दिल्ली का भाव 4,935 और कानपुर का 4,956 रुपये प्रति क्विंटल रहा।

मुजफ्फरनगर यूपी की चीनी का सबसे बड़ा थोक केंद्र है, इसलिए यहां का भाव सीधे पश्चिमी यूपी की मिलों और गन्ना किसानों से जुड़ता है।

तेजी के पीछे तीन बड़ी वजहें

सबसे बड़ी वजह मिलों से घटी आपूर्ति है। नया चीनी सीजन 1 अक्टूबर से शुरू हो चुका है, लेकिन पुराने सीजन का स्टॉक लगभग खत्म है और नई चीनी अभी बाजार में पूरी तरह उतरी नहीं है। ऊपर से महाराष्ट्र और कर्नाटक में पेराई देर से शुरू हुई है: महाराष्ट्र में अभी सिर्फ 2-3 मिलों ने ही पेराई शुरू की है, कर्नाटक में तो पेराई शुरू ही नहीं हुई। बाजार को अंदेशा है कि सप्लाई और तंग रहेगी, इसलिए व्यापारी ऊंचे भाव पर भी खरीद रहे हैं।

दूसरी तरफ त्योहारी मांग जोरों पर है। दिवाली नजदीक है और मिठाई-नमकीन बनाने वाली फैक्ट्रियों की खरीद बढ़ी हुई है। मांग ज्यादा, माल कम, भाव चढ़ना स्वाभाविक था। 5 अक्टूबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक खुदरा बाजार में चीनी 55 से 70 रुपये किलो तक बिक रही है, जो सालाना आधार पर करीब 28 प्रतिशत महंगी है।

सरकार की नजर, डीलरों पर लगाम

केंद्र सरकार पहले से सतर्क है। 1 अक्टूबर की प्रेस रिलीज़ में खाद्य मंत्रालय ने 15 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक चीनी डीलरों के लिए सख्त स्टॉक सीमा तय कर दी है: कोई भी डीलर एक समय में 1,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी नहीं रख सकेगा और मिला स्टॉक 15 दिन के अंदर बेचना होगा। कोलकाता महानगरीय क्षेत्र और असम में सीमा 2,000 क्विंटल है।

मकसद साफ है: त्योहारों में जमाखोरी रोकना और मिल से दुकान तक चीनी की निर्बाध आवाजाही बनाए रखना। अगर तेजी जारी रही तो सरकार और कड़े कदम उठा सकती है। यही वजह है कि कारोबारियों से लेकर किसानों तक सबकी नजर अब केंद्र के अगले फैसले पर है।

यूपी के गन्ना किसान पर क्या असर पड़ेगा

अब वह सवाल जो हर गन्ना किसान के मन में है: चीनी महंगी होने से मुझे क्या फायदा?

सीधा फायदा मिलों की जेब को होता है, और वहीं से किसान तक पहुंचता है। मिल जितनी महंगी चीनी बेचेगी, उसके पास गन्ने का बकाया चुकाने की उतनी ही गुंजाइश बनेगी। यूपी में जिन मिलों पर करोड़ों का बकाया अटका है, वहां के किसानों के लिए यह सकारात्मक संकेत है। बकाया भुगतान की लड़ाई में मिल की माली हालत ही सबसे बड़ा हथियार है।

पेराई सत्र 2026-27 सिर पर है। यूपी की 122 चीनी मिलों में से पश्चिमी यूपी की कई मिलें अक्टूबर के दूसरे-तीसरे हफ्ते में पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं, और सत्र से ठीक पहले मिलों की कमाई बढ़ना राहत की खबर है।

सबसे अहम बात गन्ने के दाम की है। 2026-27 के लिए राज्य परामर्श मूल्य (SAP) की घोषणा अभी बाकी है। 9 अक्टूबर को लखनऊ की बैठक में किसानों की ओर से 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग उठी थी, पर कैबिनेट से कोई ऐलान नहीं हुआ। चीनी के बढ़ते दाम इस मांग को वजन देते हैं। जब चीनी महंगी बिक रही है, तो गन्ने का भाव बढ़ाने की मांग टालना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

पर्ची के सीजन में किसान क्या करें

पर्ची का सीजन शुरू होने वाला है, इसलिए अभी से तैयारी कर लें। अपना गन्ना सर्वे और सट्टा e-Ganna पोर्टल या ऐप पर जांच लें ताकि पर्ची में गड़बड़ी न हो। जिनका बकाया अटका है, वे समिति से बकाये का लिखित हिसाब जरूर लें। मिल की माली हालत सुधर रही है, यह आपके पक्ष में है। चीनी के भाव पर नजर बनाए रखें, क्योंकि यही तय करेगा कि इस सत्र में मिलें कितनी आसानी से भुगतान कर पाएंगी।

मुख्य बातें

  • एक हफ्ते में एक्स-मिल चीनी करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल महंगी हुई; वजह मिलों से घटी आपूर्ति और महाराष्ट्र-कर्नाटक में पेराई की देरी (ChiniMandi, 9 अक्टूबर 2026)।
  • मुजफ्फरनगर में M-grade चीनी 4,600-4,680 रुपये क्विंटल; 15 अक्टूबर से डीलरों पर 1,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा लागू, सरकार के अगले कदम पर नजर।
  • 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी; चीनी की तेजी से गन्ना भाव बढ़ाने की मांग को बल मिलेगा।

स्रोत: ChiniMandi (9 अक्टूबर 2026), ChiniMandi डेली शुगर मार्केट अपडेट (9 अक्टूबर 2026), जागरण जोश (5 अक्टूबर 2026), उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की प्रेस रिलीज़ (1 अक्टूबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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