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9 अक्टूबर से चीनी मिलों की भौतिक जांच: किसानों के बकाया भुगतान से क्या नाता

✍️ Aamir Raza · 🗓 08 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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9 अक्टूबर से चीनी मिलों की भौतिक जांच: किसानों के बकाया भुगतान से क्या नाता

मिल के गोदाम में चीनी कितनी है और कागजों पर कितनी दिखाई गई है, अब यह अंतर गिनकर पकड़ा जाएगा। केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को सख्त पत्र भेजा है और 9 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में मिलों का भौतिक सत्यापन अभियान शुरू हो रहा है। जीएसटी के बिक्री आंकड़ों से मिलों की घोषणाओं का मिलान होगा। बोरी-बोरी की गिनती होगी और कागज पर लिखा हिसाब कंप्यूटर के रिकॉर्ड से टकराएगा।

यह फैसला अचानक नहीं आया है। इसके पीछे एक पूरी कहानी है, और यह कहानी गन्ना किसानों की जेब से जुड़ती है।

मिलों में पकड़ी गईं गड़बड़ियां

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अंतर्गत चीनी निदेशालय ने 14 अगस्त 2026 को सभी चीनी मिलों को एक पत्र भेजा था। उस पत्र में कहा गया था कि जांच में कुछ मिलें ऐसे स्टॉक के साथ पकड़ी गई हैं जो उनके बताए गए आंकड़ों से ज्यादा था। यानी कागजों पर चीनी कम दिखाई जा रही थी, गोदाम में ज्यादा पड़ी थी।

एक और खेल भी उजागर हुआ। कुछ मिलें महीने की शुरुआत में चीनी बेच देती थीं, लेकिन खरीदार को उठाने की इजाजत महीने के आखिर तक देती थीं। बिक्री कागज पर हो गई, माल गोदाम में पड़ा रहा। इससे बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी बनती थी।

इसी पत्र में चेतावनी दी गई थी कि केंद्रीय और राज्य सरकारों की टीमें भौतिक जांच करती रहेंगी। गलत जानकारी देने वाली मिलों पर शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर 2025 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कानूनी कार्रवाई होगी।

7 दिन का नियम और अक्टूबर का सख्त कोटा

14 अगस्त वाले पत्र में सबसे अहम आदेश यह था कि कोई भी चीनी मिल बिक्री के बाद अपना माल परिसर में 7 दिन से ज्यादा नहीं रख सकती। खरीदार को 7 दिन के अंदर स्टॉक उठाना ही होगा। यह नियम 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा।

अक्टूबर की व्यवस्था और भी सख्त है। सरकार ने अक्टूबर की पहली पखवाड़े के लिए 14 लाख टन का बिक्री कोटा तय किया है। मिलों को आदेश है कि वे 8 अक्टूबर तक अपने कोटे का कम से कम 45 प्रतिशत बेचें और खरीदार उसे उठा भी लें।

बिक्री का पूरा ब्योरा 18 अक्टूबर तक सरकार को देना होगा। जो मिल समय पर ब्योरा नहीं देगी, उसे नवंबर का कोटा नहीं मिलेगा।

डीलरों पर भी शिकंजा

सिर्फ मिलों पर नहीं, चीनी के डीलरों पर भी नकेल कसी गई है। डीलरों की स्टॉक सीमा 200 टन से घटाकर 100 टन कर दी गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगी। साथ ही स्टॉक रखने की अवधि भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी गई है।

इसका मकसद साफ है। त्योहारों का मौसम आ रहा है और चीनी की मांग बढ़ रही है। सरकार नहीं चाहती कि कोई व्यापारी चीनी दबाकर रखे और दाम बढ़ाए।

मिलों को यह भी कहा गया है कि 7 अक्टूबर तक सितंबर महीने का P-II रिटर्न API के जरिए दाखिल करें। 30 सितंबर का क्लोजिंग स्टॉक अब भौतिक जांच में मिलाया जाएगा।

किसानों की जेब से क्या नाता

चीनी मिल का पूरा पैसों का चक्र गन्ना भुगतान से जुड़ा है। मिल चीनी बेचती है, पैसा आता है, उसी पैसे से किसानों का गन्ना मूल्य चुकाया जाता है। जब मिल चीनी दबाकर रखती है या बेचने में देरी करती है, तो उसका नकद प्रवाह अटकता है। इसका सीधा असर किसानों के भुगतान पर पड़ता है।

यूपी के किसानों ने पिछले सत्रों में भुगतान में देरी का दर्द झेला है। केंद्र की इस सख्ती से चीनी की बिक्री तेज होगी। बिक्री तेज होगी तो मिलों के पास पैसा जल्दी आएगा और भुगतान का दबाव बनेगा। यह कोई गारंटी नहीं है, लेकिन दिशा सही है।

एक और अहम बात। अक्टूबर में पेराई शुरू करने वाली मिलों को छूट दी गई है कि वे अक्टूबर में बनी चीनी को अक्टूबर और नवंबर में बेच सकती हैं। पश्चिमी यूपी की मिलें इस बार 20 अक्टूबर के आसपास चलने की तैयारी में हैं। यानी नए सत्र की चीनी की बिक्री पर भी रोक नहीं होगी, पैसा घूमता रहेगा।

किसानों को क्या करना है

इस पूरी कार्रवाई में किसानों को सीधे तौर पर कुछ करने की जरूरत नहीं है। यह निगरानी मिलों पर है। लेकिन तीन बातें ध्यान रखने लायक हैं।

पहली, अगर आपके इलाके की मिल में जांच टीमें आती हैं तो यह सामान्य प्रक्रिया है। इसमें घबराने की कोई बात नहीं। दूसरी, नए सत्र की पेराई शुरू होने से पहले अपना गन्ना सर्वे का रिकॉर्ड, रकबा और किस्म की जानकारी जांच लें। तीसरी, अगर गन्ना भुगतान में देरी हो रही है तो जिला गन्ना अधिकारी से लिखित में शिकायत करें। केंद्र की सख्ती का फायदा तभी मिलेगा जब किसान अपने हक के लिए आवाज उठाए।

मुख्य बातें

  • 9 अक्टूबर 2026 से चीनी मिलों में भौतिक सत्यापन अभियान; GST बिक्री आंकड़ों से स्टॉक का मिलान होगा।
  • बिक्री के 7 दिन के अंदर स्टॉक उठाना होगा (30 नवंबर 2026 तक लागू); अक्टूबर की पहली पखवाड़े का कोटा 14 लाख टन, 8 अक्टूबर तक 45 प्रतिशत बेचना जरूरी।
  • डीलरों की स्टॉक सीमा 15 अक्टूबर से घटकर 100 टन, होल्डिंग अवधि 15 दिन; उल्लंघन पर शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर 2025 और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई।
  • मिलों की बिक्री तेज होने से नकद प्रवाह सुधरेगा, जिससे गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर सकारात्मक दबाव बनेगा।

स्रोत: चाइनीमंडी (8 अक्टूबर 2026), रूरल वॉयस, इनफॉर्मिस्ट मीडिया (1 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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