19 महीने की ऊंचाई पर चीनी: विदेशी भाव 21.24 सेंट तक पहुंचा, यूपी गन्ना किसानों पर 3 असर

रसोई के डिब्बे की चीनी भी अब महंगी पड़ने लगी है। सितंबर से अक्टूबर के बीच खुदरा बाजार में चीनी का भाव करीब 43 रुपये से बढ़कर 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। लेकिन इसी खबर का दूसरा पहलू उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान के काम का है। जब चीनी का भाव चढ़ता है, तो फायदा मिलों तक पहुंचेगा या किसान तक भी आएगा?
वैश्विक बाजार में 19 महीने की रिकॉर्ड तेजी
पिछले हफ्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची चीनी के दाम ने करीब 19 महीने का रिकॉर्ड तोड़ दिया। लंदन के ICE एक्सचेंज पर 5 अक्टूबर को कच्ची चीनी का वायदा भाव 20.65 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंचा। अगले दिन यानी 6 अक्टूबर को यह कारोबार के दौरान 20.90 सेंट तक गया और 20.75 सेंट पर बंद हुआ। बुधवार को यह 21.24 सेंट के शिखर को छूकर थोड़ा फिसला।
इतनी तेज हलचल का कारण है ब्राजील का मौसम। दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश ब्राजील के सेंटर-साउथ क्षेत्र में भारी बारिश हो रही है। अगले दो हफ्तों में और बारिश का पूर्वानुमान है। बारिश की वजह से गन्ने की कटाई और मिलों तक पहुंच धीमी पड़ गई है। बाजार का अनुमान है कि इस सीजन ब्राजील का चीनी उत्पादन 38 मिलियन टन से नीचे रह सकता है। जुलाई के आखिर में रॉयटर्स के सर्वे में यह अनुमान करीब 40 मिलियन टन था। यानी दो महीने में अनुमान 2 मिलियन टन घट गया।
ग्रीन पूल के मुताबिक ब्राजील में सितंबर रिकॉर्ड बारिश वाला महीना रहा और पहले पखवाड़े में ही चीनी उत्पादन पिछले साल से 41.6 प्रतिशत गिर गया। बारिश ने खेतों में काम और बंदरगाहों के संचालन दोनों को थाम दिया है। अंतरराष्ट्रीय चीनी संगठन (ISO) के अनुसार अब ब्राजील का उत्पादन 39 मिलियन टन के उस अनुमान से भी नीचे रह सकता है जो छह हफ्ते पहले लगाया गया था। सफेद चीनी का भाव भी 551 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया, जो अगस्त के आखिर के बाद का उच्चतम स्तर है।
सिर्फ ब्राजील नहीं, आपूर्ति चारों तरफ से सिकुड़ी
दबाव सिर्फ ब्राजील से नहीं आ रहा। जर्मनी के चीनी उद्योग संघ के मुताबिक 2026-27 सीजन में जर्मनी का चुकंदर से चीनी उत्पादन घटकर 3.33 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले सीजन में यह 4.421 मिलियन टन था। यानी करीब 25 प्रतिशत की गिरावट।
थाईलैंड में सूखा, भारत में कमजोर मानसून और यूरोप में एक दशक की सबसे खराब चुकंदर फसल से भी आपूर्ति पर दबाव है। अक्टूबर में अब तक चीनी के भाव 8 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुके हैं और जुलाई से करीब 40 प्रतिशत की तेजी आई है।
यूपी के किसान के लिए इसके 3 सीधे असर
लंदन के भाव से यूपी के खेत का लेना-देना सीधा है।
पहला असर: मिलों की भुगतान क्षमता पर। जब चीनी का बाजार चढ़ा रहता है, तो मिलों की आमदनी सुधरती है और गन्ना बकाया भुगतान में देरी का पुराना बहाना कमजोर पड़ता है। यही वह समय है जब भुगतान की मांग जोरदार तरीके से रखी जा सकती है। अपनी पर्ची, तौल पर्ची और भुगतान के रिकॉर्ड संभालकर रखें। बकाया फंसे तो गन्ना विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज कराएं।
दूसरा असर: भाव तय करने की राजनीति पर। केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर से शुरू हुए 2026-27 चीनी सीजन के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) बढ़ाकर 365 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। पहले यह 355 रुपये था। लेकिन यूपी में 2026-27 के राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) की घोषणा अभी बाकी है। 2025-26 सीजन में यूपी में अगैती गन्ने का SAP 400 रुपये और सामान्य का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। चीनी का बाजार चढ़ा रहने से SAP बढ़ाने की किसान संगठनों की मांग को बल मिलता है, खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर। किसान अफवाह वाले “नए भाव” पर भरोसा न करें, सरकारी घोषणा या गन्ना आयुक्त कार्यालय की सूचना ही अंतिम है।
तीसरा असर: मिलों की रणनीति पर। बिजनौर की चीनी मिलें सात साल बाद इस बार सिर्फ सी-हैवी शीरे से चीनी बनाने पर जोर दे रही हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की कम पैदावार से चीनी का बाजार चढ़ा रहने का अनुमान है। जिले में चीनी का भाव सवा चार से साढ़े चार हजार रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहा है। इसका मतलब है इस पेराई सत्र में मिलों को गन्ने की भरपूर जरूरत रहेगी। किसान अपनी पर्ची और SMS अलर्ट (शॉर्ट कोड 51969) पर नजर रखें ताकि सप्लाई की तारीख चूके नहीं।
एक बात साफ है। अंतरराष्ट्रीय भाव चढ़ने से किसान को फायदा तभी मिलेगा जब मिल समय पर भुगतान करे और सरकार भाव बढ़ाए। तेजी अपने आप किसी की जेब में नहीं आती। पर्ची का रिकॉर्ड, समय पर शिकायत और सरकारी घोषणाओं पर नजर, यही इस तेजी से फायदा उठाने के तीन हथियार हैं।
मुख्य बातें
- ICE एक्सचेंज पर कच्ची चीनी का भाव 21.24 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंचा, करीब 19 महीने का उच्चतम स्तर।
- ब्राजील के सेंटर-साउथ में बारिश से उत्पादन 38 मिलियन टन से नीचे रहने का अनुमान; जर्मनी और थाईलैंड से भी आपूर्ति घटने की खबर।
- यूपी के किसानों के लिए तीन असर: भुगतान की मांग मजबूत होगी, FRP 365 रुपये तय लेकिन 2026-27 का SAP घोषित नहीं, मिलों का चीनी पर जोर।
स्रोत: Business Recorder (6 अक्टूबर 2026), UkrAgroConsult (7 अक्टूबर 2026), NDTV इंडिया और किसान तक (सितंबर 2026), दैनिक जागरण बिजनौर (9 अक्टूबर 2026), ET Now हिंदी (10 अक्टूबर 2026)।
