₹400 वाला रेट ही रहेगा: कैबिनेट बैठक में गन्ने के नए भाव की घोषणा नहीं

₹400 और ₹390। पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले गन्ना किसानों के लिए यही दो संख्याएं सबसे ज्यादा मायने रखती हैं, क्योंकि फिलहाल इन्हीं भाव पर गन्ना बिकता रहेगा। इस हफ्ते लोक भवन, लखनऊ में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस ब्रीफिंग में गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (SAP) में बदलाव की कोई घोषणा नहीं हुई। चीनी उद्योग की खबरों पर नजर रखने वाली वेबसाइट चिनीमंडी ने 9 अक्टूबर को रिपोर्ट किया कि कैबिनेट बैठक में गन्ने के SAP संशोधन का ऐलान नहीं किया गया।
बैठक में क्या हुआ, क्या नहीं
7 अक्टूबर को लोक भवन में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई, जिसमें कई प्रस्तावों पर फैसले लिए गए। लेकिन गन्ने के भाव को लेकर कोई नया निर्णय सामने नहीं आया। किसानों को उम्मीद थी कि पेराई सत्र से पहले सरकार 2026-27 के लिए नया भाव घोषित करेगी, क्योंकि पिछले साल अक्टूबर के आखिर में ही ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का ऐलान हुआ था। इस बार वैसा नहीं हुआ। इसका सीधा मतलब यही है कि जब तक सरकार अगला फैसला नहीं लेती, गन्ने का भाव पुराने स्तर पर ही बना रहेगा।
फिलहाल कौन-सा भाव लागू है
पेराई सत्र 2025-26 के लिए राज्य कैबिनेट ने पिछले साल गन्ने का SAP बढ़ाकर ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती प्रजाति) और ₹390 प्रति क्विंटल (सामान्य प्रजाति) तय किया था। अनुपयुक्त प्रजातियों का भाव ₹355 प्रति क्विंटल रखा गया था। यह मंजूरी अक्टूबर 2025 में घोषित ₹30 की वृद्धि के बाद कैबिनेट से मिली थी, और उसी के आधार पर मिलें भुगतान कर रही हैं।
एक बात साफ रहे: यह भाव पेराई सत्र 2025-26 का है। पेराई सत्र 2026-27 के लिए SAP की घोषणा अभी बाकी है। सरकार ने इस पर कोई तारीख नहीं बताई है। किसानों के मन में यह भ्रम न रहे कि पुराना भाव ही नया भाव है। पुराना भाव तब तक लागू रहेगा, जब तक नया भाव घोषित नहीं होता।
सरकार का ₹3.30 लाख करोड़ का दावा
भले ही भाव न बढ़ा हो, सरकार ने गन्ना भुगतान के अपने रिकॉर्ड का बखान जरूर किया। मुख्यमंत्री ने सितंबर में एक कार्यक्रम में दावा किया कि पिछले 9 वर्षों में किसानों को ₹3.30 लाख करोड़ का गन्ना भुगतान किया गया है, और यह पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा गया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में भी सरकार के इसी दावे का जिक्र है।
सरकार का यह भी कहना है कि प्रदेश में इस समय 122 चीनी मिलें संचालित हैं और अधिकतर मिलें गन्ना खरीद के कुछ ही दिनों के भीतर भुगतान कर रही हैं। भुगतान का यह दावा सरकार की ओर से है। जमीनी हकीकत का दूसरा पहलू यह भी है कि कुछ मिल क्षेत्रों में बकाया अभी भी लंबित है, जिसकी वसूली के लिए प्रशासन को जमीन नीलामी तक की कार्रवाई करनी पड़ी है।
पेराई सत्र सिर पर, असमंजस बढ़ा
नया पेराई सत्र अक्टूबर के मध्य से शुरू होने जा रहा है। पश्चिमी यूपी की कई मिलें 15 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। ऐसे में भाव तय न होना किसानों के लिए असमंजस की स्थिति है। गन्ना मिल गेट तक पहुंचने लगा है, लेकिन किसान नहीं जानते कि इस बार उनकी फसल का सरकारी भाव क्या होगा।
किसान संगठनों की मांग लगातार बनी हुई है। खाद, डीजल, सिंचाई और मजदूरी की बढ़ती लागत का हवाला देकर संगठन भाव में बढ़ोतरी को जरूरी बता रहे हैं। पिछले महीनों में लखनऊ से लेकर मुजफ्फरनगर तक कई बैठकों और महापंचायतों में यही मुद्दा उठा है। अब सरकार पर दबाव और बढ़ेगा, क्योंकि पेराई शुरू होने के बाद भाव की मांग आमतौर पर और तेज हो जाती है।
अब किसान क्या करें
भाव की घोषणा का इंतजार करते हुए किसान अपने जरूरी काम न रोकें। अपने गन्ने के सट्टे की स्थिति, पर्ची का ब्योरा और अब तक हुए भुगतान की जानकारी ई-गन्ना ऐप या संबंधित चीनी मिल के पोर्टल पर नियमित रूप से जांचते रहें। अगर भुगतान में देरी हो रही है या पर्ची को लेकर कोई दिक्कत है, तो जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें।
शिकायत या जानकारी के लिए सरकार की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर कॉल किया जा सकता है। एसएमएस के जरिए जानकारी के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध है। पेराई शुरू होने से पहले अपने सट्टा-संबंधी कागजात दुरुस्त कर लें, ताकि मिल गेट पर कोई परेशानी न हो।
मुख्य बातें
- इस हफ्ते की कैबिनेट बैठक के बाद गन्ने के नए SAP की घोषणा नहीं हुई; 2025-26 का भाव (₹400 अगेती, ₹390 सामान्य) तब तक लागू रहेगा।
- पेराई सत्र 2026-27 के लिए नए भाव की घोषणा अभी बाकी है; सरकार ने कोई तारीख नहीं बताई।
- सरकार का दावा: 9 वर्षों में ₹3.30 लाख करोड़ का गन्ना भुगतान सीधे किसानों के खातों में; प्रदेश में 122 चीनी मिलें संचालित।
स्रोत: चिनीमंडी (9 अक्टूबर 2026); फ्री प्रेस जर्नल (सितंबर 2026); हिंदुस्तान टाइम्स (सितंबर 2026)
