एक दिन, दो धरने: स्याना में ₹600 और कलक्ट्रेट पर ₹500, गन्ना भाव की जंग तेज

पेराई सत्र अब चंद दिनों की दूरी पर है और गन्ने का नया भाव अभी तक तय नहीं हुआ। इसी सवाल ने शुक्रवार को बुलंदशहर में सैकड़ों किसानों को एक ही दिन में दो अलग-अलग मोर्चों पर खड़ा कर दिया। एक संगठन ने तहसील का घेराव कर ₹600 मांगा, तो दूसरे संगठन ने जिला मुख्यालय पर ₹500 की मांग दोहराई। आंकड़े भले अलग हों, किसानों की शिकायत एक ही है। लागत बढ़ती जा रही है और भाव उसी रफ्तार से नहीं बढ़ रहा।
स्याना तहसील का घेराव: ट्रैक्टरों के साथ ₹600 की मांग
बुलंदशहर की स्याना तहसील में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ता सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे और तहसील परिसर का घेराव कर धरने पर बैठ गए। किसानों का आरोप था कि तहसील में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है और लेखपाल किसानों के काम नहीं कर रहे हैं। (अमर उजाला, 16 अक्टूबर 2026)
धरने की सबसे अहम मांग गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल तय करना रही। जिला अध्यक्ष अरब सिंह ने कहा कि गन्ने की खेती में लागत लगातार बढ़ रही है, इसलिए भाव ₹600 प्रति क्विंटल होना ही चाहिए। उन्होंने आलू के करीब ₹10 लाख के बकाये का भुगतान जल्द कराने की मांग भी उठाई। (अमर उजाला, 17 अक्टूबर 2026)
स्याना के प्रदर्शन में गन्ने के अलावा कई और मुद्दे भी शामिल थे। किसानों ने आवारा गोवंश से फसलों को हो रहे नुकसान का स्थायी समाधान मांगा और बिजली विभाग पर किसानों को परेशान करने का आरोप लगाया। तहसील बाजार की व्यवस्था सुधारने की मांग भी उठी। किसानों ने जेवर एयरपोर्ट तक प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेस-वे में सठला गांव पर कट बनाने की मांग भी की।
प्रदर्शन के बाद किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा, जिसमें गन्ना भुगतान सहित सभी लंबित मुद्दों के निस्तारण की मांग की गई। विशन सिंह सिरोही, लोकेंद्र प्रधान, राहुल चौधरी समेत कई कार्यकर्ता धरने में शामिल रहे। (अमर उजाला, 17 अक्टूबर 2026)
कलक्ट्रेट पर दूसरा मोर्चा: ₹500 और छह सूत्री मांगें
उसी दिन जिला मुख्यालय पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले किसान राजेबाबू पार्क में एकत्रित हुए और सभा के बाद जुलूस निकालकर कलक्ट्रेट पहुंचे। कलक्ट्रेट का गेट बंद मिलने पर किसान वहीं धरने पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद अधिकारियों को किसानों के बीच आकर ज्ञापन लेना पड़ा। प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मांगेराम त्यागी और जिलाध्यक्ष शैलेंद्र आर्य ने किया। (अमर उजाला, 17 अक्टूबर 2026)
संगठन ने छह सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रमुख मांग पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी बढ़ाकर ₹500 प्रति क्विंटल करना रही। किसानों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवारों की आजीविका गन्ने की खेती पर निर्भर है, जबकि डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है। ज्ञापन में किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर दिलाने की मांग भी शामिल रही।
गन्ने के अलावा आलू किसानों का मुद्दा भी ज्ञापन में उठा। उद्यान विभाग से मिल रहे ₹3,600 प्रति क्विंटल के आलू बीज का मूल्य घटाकर अधिकतम ₹1,500 प्रति क्विंटल करने और कोल्ड स्टोरेज किराया सहायता योजना में शासनादेश से पहले आलू निकाल चुके किसानों को भी शामिल करने की मांग की गई। सैकड़ों किसान इस प्रदर्शन में शामिल रहे। (अमर उजाला, 17 अक्टूबर 2026)
₹500 और ₹600: मांग के पीछे का गणित
दोनों मांगों के आंकड़ों में अंतर है, लेकिन तर्क एक जैसा है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश का एसएपी अगेती किस्म के लिए ₹400 और सामान्य किस्म के लिए ₹390 प्रति क्विंटल घोषित था। इस हिसाब से ₹500 की मांग का मतलब मौजूदा भाव से करीब ₹100 की बढ़ोतरी है, और ₹600 की मांग का मतलब करीब ₹200 की बढ़ोतरी।
एक बात साफ करना जरूरी है: पेराई सत्र 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। किसान संगठन इसी घोषणा से पहले सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं, ताकि नया भाव उनके पक्ष में तय हो। अमर उजाला के मुताबिक किसानों का तर्क है कि खुदरा बाजार में चीनी महंगी बिक रही है, तो गन्ना उगाने वाले किसान को भी लागत के हिसाब से भाव मिलना चाहिए।
गन्ना किसान के लिए आगे क्या
बुलंदशहर के ये दो प्रदर्शन अकेली घटनाएं नहीं हैं। पश्चिमी यूपी में भाव की मांग हर जिले में सड़कों पर उतर आई है, और एसएपी की घोषणा अब सबसे बड़ा इंतजार है।
सबसे पहले एसएपी 2026-27 की घोषणा पर नजर रखें। भाव तय होते ही उसका असर इस सीजन के हर क्विंटल गन्ने पर पड़ेगा। दूसरा, पेराई शुरू होते ही गन्ना आपूर्ति पर्ची और कैलेंडर के हिसाब से होगी। ई-गन्ना ऐप पर अपना सर्वे डेटा और कैलेंडर पहले से जांच लें, ताकि तौल और आपूर्ति में देरी न हो। तीसरा, अगर किसी मिल पर पुराना बकाया है तो उसका रिकॉर्ड और पर्चियां संभालकर रखें। बकाये से जुड़े हर दस्तावेज का भुगतान के समय काम आता है।
मुख्य बातें
- बुलंदशहर में 16 अक्टूबर को दो किसान संगठनों ने दो अलग-अलग प्रदर्शन किए: भाकियू (टिकैत) ने स्याना तहसील घेरकर ₹600 तो भाकियू (अराजनैतिक) ने कलक्ट्रेट पर ₹500 प्रति क्विंटल गन्ना भाव मांगा।
- दोनों संगठनों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे; एसएपी 2026-27 की घोषणा अभी बाकी है, इसी से पहले किसान दबाव बना रहे हैं।
- गन्ना किसानों को सलाह: एसएपी की घोषणा पर नजर रखें, ई-गन्ना ऐप पर पर्ची-कैलेंडर पहले से जांचें और पुराने बकाये के दस्तावेज संभालकर रखें।
स्रोत: अमर उजाला (16 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (17 अक्टूबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (एसएपी 2025-26: अगेती ₹400, सामान्य ₹390)
