16 अक्टूबर: हर जिले के DM दफ्तर पर धरना, गन्ना भाव ₹500 से कम मंजूर नहीं

पेराई सत्र सिर पर है, लेकिन यूपी के गन्ना किसान को इस बार का भाव अभी तक नहीं पता। 2026-27 सीजन का एसएपी सरकार ने घोषित नहीं किया है, केंद्र ने एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय कर दिया है और अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से मिलों के पहिए घूमने की तैयारी है। भाव की इसी अनिश्चितता के बीच भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने ऐलान किया है कि 16 अक्टूबर को प्रदेश के हर जिले के जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर किसान धरना देंगे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। सबसे बड़ी मांग है गन्ने का भाव कम से कम ₹500 प्रति क्विंटल घोषित हो।
राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि भाव तय करते समय सरकार सिर्फ मिलों की आर्थिक स्थिति न देखे, किसान की बढ़ती लागत और जोखिम भी हिसाब में आए।
16 अक्टूबर को क्या होगा
रॉयल बुलेटिन की रिपोर्ट के मुताबिक सहारनपुर और मेरठ मंडल की बैठक में फैसला हुआ कि 16 अक्टूबर को प्रदेशभर के सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर एक साथ प्रदर्शन होगा। बागपत में हुई आगरा मंडल की बैठक में भी इसी कार्यक्रम पर मुहर लगी, जिसमें आठ जिलों के जिलाध्यक्षों समेत सैकड़ों पदाधिकारी मौजूद रहे। हर जिले के किसान डीएम दफ्तर पहुंचकर गन्ने का लाभकारी मूल्य घोषित करने की मांग रखेंगे।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा ने कहा कि प्रदेश में करीब 45 लाख गन्ना किसानों के हितों की रक्षा संगठन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वह खुद गन्ना आयुक्त कार्यालय पहुंचकर किसानों की समस्याएं अधिकारियों के सामने रखेंगे।
मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में बड़ी पंचायत पर भी विचार चल रहा है, हालांकि अंतिम तारीख घोषित नहीं हुई है।
₹500 की मांग के पीछे संगठन का तर्क
धर्मेंद्र मलिक के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में चीनी के बाजार मूल्य में वृद्धि हुई है, लेकिन गन्ने के दाम में उसके अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई। संगठन का दावा है कि खुदरा बाजार में चीनी ₹60 प्रति किलो के पार बिक रही है (यह संगठन का दावा है, खुदरा भाव शहर और दुकान के हिसाब से अलग हो सकते हैं), इसलिए किसान को भी उसकी मेहनत और लागत के हिसाब से उचित मूल्य मिलना चाहिए।
लागत का हिसाब भी संगठन ने सामने रखा है। खाद, बीज, दवाएं, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च लगातार बढ़ा है, और वैश्विक बाजार में चीनी की स्थिति मजबूत बनी हुई है। इसलिए सरकार बढ़ती लागत को ध्यान में रखकर भाव तय करे। संगठन इस मांग को लेकर गांव-गांव किसानों के बीच जाएगा और सरकार पर दबाव बनाए रखेगा।
सिर्फ भाव नहीं, बारिश और खाद भी एजेंडे पर
16 अक्टूबर के प्रदर्शन का एजेंडा सिर्फ गन्ने के भाव तक सीमित नहीं है। हाल की बेमौसम बारिश ने धान और उड़द समेत कई फसलों को नुकसान पहुंचाया है, और खेतों में गन्ना गिरने से भी परेशानी बढ़ी है। संगठन ने प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का निष्पक्ष आकलन कराकर पात्र किसानों को जल्द मुआवजा देने की मांग उठाई है।
खाद की किल्लत भी मांग-पत्र में है। मलिक ने कहा कि यूरिया और एनपीके जैसे उर्वरकों पर सब्सिडी बढ़ाए जाने के बावजूद जरूरत के समय किसानों को खाद नहीं मिल पा रही, और सब्सिडी वाले यूरिया के गैर-कृषि इस्तेमाल की शिकायतों पर कार्रवाई होनी चाहिए। आलू किसानों को राहत दिलाने की मांग भी संगठन ने रखी है।
चुनाव आयुक्त वाले आंदोलन पर सवाल
बैठक में धर्मेंद्र मलिक ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग वाले आंदोलन में किसान संगठनों की भागीदारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को क्या लाभ होगा, यह स्पष्ट करना चाहिए। उनके मुताबिक किसान संगठनों की ताकत गन्ना मूल्य, मुआवजा, खाद और भुगतान जैसे जमीनी मुद्दों पर लगनी चाहिए।
अभी गन्ने का आधिकारिक भाव क्या है
केंद्र ने 2026-27 चीनी सीजन के लिए एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है (10.25 प्रतिशत बेसिक रिकवरी पर, कैबिनेट मंजूरी के साथ)। उत्तर प्रदेश में 2025-26 का राज्य परामर्श मूल्य अगेती किस्मों का ₹400 और सामान्य किस्मों का ₹390 प्रति क्विंटल था, लेकिन 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। यही वजह है कि किसान संगठन एक सुर में नहीं हैं। भाकियू (टिकैत) गुट ₹600 प्रति क्विंटल की मांग कर चुका है और कर्नाटक के गन्ना किसान संगठन कम से कम ₹550 पर अड़े हैं। इस बीच केंद्र ने तौल और रिकवरी जैसे तकनीकी विवादों पर किसानों की शिकायतों के लिए एक सप्ताह में उच्चस्तरीय समिति बनाने का भी ऐलान किया है।
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
16 अक्टूबर का प्रदर्शन ऐसे समय हो रहा है जब नया पेराई सत्र बस शुरू होने वाला है। दबाव बनता है तो 2026-27 के एसएपी की घोषणा में तेजी आ सकती है। किसान पेराई से पहले अपनी पर्ची, सट्टा और सर्वे का ब्योरा दुरुस्त कर लें, ताकि भुगतान में देरी न हो। नियमानुसार गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान होना चाहिए और देरी पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान है। शिकायत टोल-फ्री 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर दर्ज कराई जा सकती है।
मुख्य बातें
- भाकियू (अराजनैतिक) ने 16 अक्टूबर को प्रदेश के हर जिले के डीएम दफ्तर पर धरने का ऐलान किया है, मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
- सबसे बड़ी मांग गन्ने का भाव कम से कम ₹500 प्रति क्विंटल घोषित करने की है।
- बेमौसम बारिश से बर्बाद फसलों का मुआवजा, खाद की उपलब्धता और आलू किसानों को राहत भी मांग-पत्र में शामिल है।
स्रोत: रॉयल बुलेटिन (12 अक्टूबर 2026), हिंदुस्तान सिटी न्यूज; एफआरपी/एसएपी आंकड़े — डेक्कन हेराल्ड, चिनीमंडी और बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट से।
