पेराई से पहले बिलाई मिल घिरी: 5,000 किसानों के शपथ पत्र, ₹58 करोड़ बकाया पर अल्टीमेटम

नया पेराई सत्र दरवाजे पर है, लेकिन बिजनौर की बिलाई चीनी मिल में घड़ी उल्टी चल रही है। पिछले पेराई सत्र (2025-26) का किसानों का करीब ₹58 करोड़ 15 लाख का गन्ना मूल्य अभी तक मिल ने चुकाया नहीं है। ऐसे में भाकियू अराजनैतिक ने मिल के खिलाफ आंदोलन को नया हथियार दे दिया है: शपथ पत्र। करीब 5,000 किसान लिखित में शपथ लेंगे कि बकाया भुगतान न हुआ तो वे बिलाई चीनी मिल को अपना गन्ना नहीं देंगे।
संगठन की योजना इन्हें सीधे जिलाधिकारी को सौंपने की है, ताकि प्रशासन के सामने किसानों की सामूहिक इच्छा दर्ज हो।
शपथ पत्र — किसानों की नई रणनीति
भाकियू अराजनैतिक के किसान नेता दिगंबर सिंह का कहना है कि मिल के खिलाफ नाराजगी को एकजुट करने के लिए शपथ पत्र सबसे कारगर तरीका है। कागज पर लिखी प्रतिबद्धता से दबाव सामूहिक बनता है, और मिल प्रबंधन पर असर भी पड़ता है।
जिलाध्यक्ष नितिन कुमार सिरोही के नेतृत्व में संगठन की टीमें गांव-गांव पहुंच रही हैं। पहले चरण में छाछरी, मंडोरा जट और मंडावली समेत कई गांवों में बैठकें हुईं, जिनमें किसानों ने बिलाई मिल को गन्ना न देने की इच्छा जताई। इसके बाद पैहरुवाला, लाखुवाला, मलकपुर और डेहरी जैसे गांवों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए।
संगठन का स्पष्ट कहना है: जो मिल किसानों को समय पर भुगतान नहीं करती, उस मिल को गन्ना देने के लिए किसान पर कोई दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।
बिलाई का बकाया — कोई नई बात नहीं
यह बकाया कोई अचानक पैदा हुई समस्या नहीं है। गन्ना विभाग के आंकड़ों पर अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक बिजनौर की चार चीनी मिलों पर ₹195 करोड़ से ज्यादा बकाया था, जिसमें अकेली बिलाई मिल का हिस्सा ₹147.06 करोड़ था। तब मिल ने गन्ना मूल्य का सिर्फ 39.14 प्रतिशत भुगतान किया था। पुरानी कहानी वही है, सिर्फ अंक बदले हैं।
जिले की 10 मिलों में से छह समय पर भुगतान करती हैं। राहत की बात यही है कि ठीक-ठाक भुगतान करने वाली मिलें भी जिले में मौजूद हैं।
देरी की सबसे बड़ी कीमत किसान चुकाता है: घर का खर्च, बच्चों की स्कूल फीस, बीमारी का इलाज। धरने-प्रदर्शन और ज्ञापनों के बावजूद शत-प्रतिशत बकाया नहीं मिला, तो अब आंदोलन का तेवर बदलना स्वाभाविक था।
गन्ना दूसरी मिल को? — सट्टा और आवंटन का गणित
किसान नेता दिगंबर सिंह ने जिला प्रशासन से जो मांग रखी है, वह इस अभियान का सबसे व्यावहारिक हिस्सा है। उनकी अपील है कि जो किसान बिलाई मिल को गन्ना नहीं देना चाहते, उनके गन्ने का आवंटन समय पर भुगतान करने वाली दूसरी चीनी मिलों को कराया जाए।
किसान का गन्ना सट्टे और सर्वे रिकॉर्ड के जरिए तय क्रय केंद्र से जुड़ा होता है, इसलिए मिल बदलने के लिए प्रशासनिक आवंटन जरूरी है। अगर जिला प्रशासन इच्छुक किसानों का गन्ना दूसरी मिलों को आवंटित करता है, तो बिलाई मिल को इस सीजन कच्चे माल की कमी झेलनी पड़ेगी।
सट्टा-सर्वे रिकॉर्ड में नाम, रकबा और किस्म का ब्योरा सही न हो तो पर्ची और भुगतान दोनों अटकते हैं, इसलिए caneup.in पर भुगतान की स्थिति नियमित जांचते रहें।
पेराई का शेड्यूल टाइट है — अक्टूबर के आखिरी हफ्ते की उम्मीद
हिंदुस्तान की बिजनौर रिपोर्ट के मुताबिक बिलाई मिल के अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में चलने की उम्मीद है, और सितंबर के अंत में मिल क्रय केंद्रों पर तौल के कांटे भेजना शुरू कर सकती है।
यहीं विरोधाभास सबसे तीखा है। एक तरफ मिल नई पेराई की तैयारी में जुटी है, दूसरी तरफ किसानों का पुराना हिसाब अटका पड़ा है। संगठन के इस अल्टीमेटम का गणित मिल प्रबंधन के लिए भी साफ है: बिना किसानों के गन्ने के मिल नहीं चल सकती, और बिना भुगतान के किसान गन्ना देने को तैयार नहीं। शपथ पत्र इसी समीकरण का लिखित सबूत हैं।
15 प्रतिशत ब्याज — बकाया पर किसान का कानूनी हथियार
देर से भुगतान पर कानून किसान की तरफ है: गन्ना (नियंत्रण) आदेश 1966 के तहत मिलों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है, और देरी पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज का प्रावधान है। यानी ₹58.15 करोड़ के बकाए पर ब्याज की मांग भी किसान संगठनों के एजेंडे में है।
केंद्र सरकार इस व्यवस्था को और सख्त करने पर काम कर रही है: दैनिक जागरण की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक छह दशक पुराने गन्ना नियंत्रण आदेश में बदलाव का ड्राफ्ट तैयार है, जिसमें पूरे सीजन बकाया न चुकाने वाली मिल को तीन महीने में पूरी रकम जिलाधिकारी के पास जमा करनी होगी। शिकायत के रास्ते आज भी खुले हैं: जिला गन्ना अधिकारी को लिखित शिकायत दें, टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर समस्या दर्ज कराएं, और हर शिकायत का रिकॉर्ड संभालकर रखें। यही रिकॉर्ड बाद में बकाया और ब्याज की मांग में काम आता है।
मुख्य बातें
- बिलाई चीनी मिल पर पिछले पेराई सत्र का ₹58.15 करोड़ गन्ना भुगतान बकाया है; जिले की 10 मिलों में यही सबसे बड़ा बकाया है।
- भाकियू अराजनैतिक करीब 5,000 किसानों से शपथ पत्र भरवा रहा है और इन्हें जिलाधिकारी को सौंपकर इच्छुक किसानों के गन्ने का आवंटन दूसरी मिलों को दिलाने की मांग कर रहा है।
- गन्ना (नियंत्रण) आदेश के तहत 14 दिन में भुगतान और देरी पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज का प्रावधान है; बकाया के लिए जिला गन्ना अधिकारी और टोल-फ्री 1800-121-3203 पर शिकायत करें।
स्रोत: हिंदुस्तान (बिजनौर), दैनिक जागरण, चीनीमंडी (ChiniMandi)
