₹26 करोड़ बकाया, अब कलेक्ट्रेट पहुंचेगा गन्ना: बिलाई मिल के किसानों का ऐलान

बिजनौर गन्ना समिति के सभागार में शुक्रवार को हुई प्रेसवार्ता में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह ने एक लाइन में पूरी लड़ाई समेट दी। जब तक बिलाई चीनी मिल पिछले सत्र का पूरा बकाया नहीं चुकाती, किसान उसे गन्ना नहीं देंगे। और अगर मिल बिना भुगतान के पेराई शुरू करती है, तो गन्ना ट्रॉलियों में भरकर कलेक्ट्रेट पहुंचेगा।
इसके पीछे करीब एक साल से अटका भुगतान और बीस हजार से ज्यादा किसानों के शपथ पत्र हैं।
कलेक्ट्रेट तक गन्ना ले जाने की योजना क्या है
योजना के मुताबिक मिल में तौल वाले दिन एक हजार किसान, हर एक 50 क्विंटल गन्ना लेकर, कलेक्ट्रेट या जिलाधिकारी आवास की ओर चलेंगे। पहले दिन ही करीब 50 हजार क्विंटल गन्ना इकट्ठा होगा, बाद में संख्या बढ़ती जाएगी।
दिगंबर सिंह ने यह भी साफ किया कि किसान बैरिकेडिंग नहीं तोड़ेंगे। जहां पहला बैरियर लगेगा, वहीं गन्ना पलट दिया जाएगा। उनकी दलील है कि गन्ना प्रशासन के पास पलटने पर उसके पैसे की जिम्मेदारी भी प्रशासन की बनेगी। गन्ना देने के 14 दिन बाद किसान भुगतान भी जिलाधिकारी से ही मांगेंगे।
संगठन ने 3 नवंबर को मुरादाबाद मंडल में प्रदर्शन का भी ऐलान किया है।
बकाया कितना है, और आंकड़ा क्यों बदलता दिखता है
ताजा खबरों में बिलाई मिल पर बकाया 24 से 26 करोड़ रुपये के बीच बताया जा रहा है। अमर उजाला की 31 अक्तूबर की खबर में यह रकम करीब 26 करोड़ बताई गई है, जबकि एक दिन पहले दैनिक जागरण की रिपोर्ट में करीब 24 करोड़ का जिक्र था।
लंबी कहानी देखें तो अक्तूबर की शुरुआत में यही बकाया करीब 42 करोड़ रुपये बताया गया था। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने तब 41.98 करोड़ रुपये के बकाए की पुष्टि की थी। यानी अक्तूबर में कुछ भुगतान हुआ है, पर हिसाब अब भी पूरा नहीं हुआ। मिल से 31,752 किसान जुड़े हुए हैं, जिनमें से करीब 20 हजार शपथ पत्र देकर कह चुके हैं कि वे बिलाई मिल के क्रय केंद्रों पर गन्ना नहीं देंगे।
किसानों की नाराजगी का एक और कारण सुरक्षण आदेश है। बकाया भुगतान न करने के बावजूद बिलाई मिल के सिर्फ तीन क्रय केंद्र काटे गए: महमूदपुर मिलक, मुकरपुर गुर्जर और मंडावली ए। किसानों का कहना है कि जब बीस हजार किसान गन्ना न देने की लिखित बात कह चुके हैं, तब सिर्फ तीन केंद्र काटना नाकाफी है। उनकी मांग है कि बिलाई मिल का गन्ना दूसरी चीनी मिलों को डायवर्ट किया जाए।
जिले में अकेली मिल, जिस पर हिसाब अटका है
बिजनौर में दस चीनी मिलें चलती हैं। बैठकों में बार-बार यही बात सामने आई है कि बिलाई को छोड़कर बाकी नौ मिलों ने पिछले सत्र का भुगतान कर दिया है। 13 अक्तूबर को जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने सभी मिल प्रबंधकों के साथ समीक्षा बैठक में बिलाई मिल के प्रबंधक को बकाया जल्द चुकाने के निर्देश दिए थे और देरी पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
भुगतान अटकने की एक वजह बैंकों से मिलने वाली नकद साख सीमा यानी सीसीएल भी बताई जाती है। जिले की मिलों ने नए सत्र के भुगतान के लिए करीब 1,605 करोड़ रुपये की सीसीएल मांगी है, पर इस सूची में बिलाई मिल का हिस्सा शून्य है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक बिलाई मिल को बैंकों से सीसीएल नहीं मिलता, इसलिए उसके किसानों का भुगतान महीनों तक लटक जाता है।
भाव का सवाल भी इसी लड़ाई से जुड़ा है
2026-27 सत्र का राज्य परामर्श मूल्य यानी SAP अभी घोषित नहीं हुआ है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती गन्ने का SAP 400 रुपये, सामान्य का 390 रुपये और अनुपयुक्त किस्म का 355 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ था। किसान संगठन इस बार कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।
बिलाई के किसानों के लिए यह दोहरी मार है। एक तरफ पिछले सत्र का पैसा नहीं मिला, दूसरी तरफ नए सत्र का भाव तय नहीं है। जिन परिवारों ने महीनों तक भुगतान का इंतजार किया, उनके लिए घर के खर्च तक उधार पर चल रहे हैं। यही वजह है कि संगठन भुगतान को पेराई की शर्त बनाकर चल रहा है।
बिलाई क्षेत्र के किसान अभी क्या करें
पेराई सिर पर है, इसलिए कुछ काम टालने लायक नहीं हैं। अपनी पर्ची पर क्रय केंद्र का नाम जरूर मिलान कर लें, क्योंकि सुरक्षण आदेश में कई केंद्रों की अदला-बदली हुई है। अगर आपने गन्ना न देने का शपथ पत्र दिया है, तो उसकी प्रति संभालकर रखें।
आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कराना भी संगठन की रणनीति का हिस्सा है। किसी भी आंदोलन में जाने से पहले अपने गांव की समिति से ताजा कार्यक्रम जरूर पूछ लें, क्योंकि तारीख और जगह प्रशासन की अनुमति के हिसाब से बदल सकती है।
बिलाई मिल का मामला अब सिर्फ एक मिल के बकाए का नहीं रहा। सवाल यह है कि बिना पुराना हिसाब चुकाए नई पेराई शुरू हो सकती है या नहीं। किसान कह रहे हैं कि नहीं।
मुख्य बातें
- बिलाई चीनी मिल पर पिछले सत्र का करीब 24 से 26 करोड़ रुपये का गन्ना बकाया है, मिल से 31,752 किसान जुड़े हैं।
- भाकियू अराजनैतिक का ऐलान: भुगतान नहीं हुआ तो पहले दिन 1,000 किसान 50-50 क्विंटल गन्ना लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे।
- 20 हजार शपथ पत्रों के बावजूद सिर्फ तीन क्रय केंद्र काटे गए, किसान गन्ना दूसरी मिलों को देने की मांग कर रहे हैं।
स्रोत: अमर उजाला (31 अक्तूबर 2026), दैनिक जागरण (30 अक्तूबर 2026), टाइम्स ऑफ इंडिया (30 अक्तूबर 2026)
