₹58 करोड़ बकाया पर 20 हजार किसानों ने उठाया बड़ा कदम, आगे क्या होगा?

जिलाधिकारी की कड़ी चेतावनी के तीन दिन बाद भी जब खाते में पैसा नहीं आया, तो बिजनौर के किसानों ने तरीका बदल दिया। अब उन्होंने सिर्फ नारेबाजी नहीं की, बल्कि कागज पर मोहर लगा दी।
शुक्रवार को बिजनौर गन्ना समिति में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) की मासिक बैठक हुई। बैठक के बाद संगठन ने करीब 20 हजार किसानों के शपथपत्र प्रशासन को सौंप दिए। इनमें लिखा था कि जब तक पिछले सत्र का बकाया भुगतान नहीं मिलता, किसान बिलाई चीनी मिल को अपना गन्ना नहीं देंगे। और अगर मिल चलने से पहले पैसा न आया, तो किसान जिलाधिकारी की कोठी में गन्ना भर देंगे। यह खबर अमर उजाला की 17 अक्टूबर की रिपोर्ट में सामने आई है।
मामले की गंभीरता इस बात से समझिए कि बिजनौर जिले में कुल 10 चीनी मिलें हैं, लेकिन पिछले पेराई सत्र का भुगतान पूरा न करने वाली बिलाई अकेली मिल है। बाकी नौ मिलें अपने किसानों का पूरा हिसाब चुका चुकी हैं।
58.15 करोड़ का सवाल: पैसा कहां फंसा है
हिंदुस्तान और चिनीमंडी की रिपोर्टों के मुताबिक बिलाई चीनी मिल पर पिछले पेराई सत्र (2025-26) का करीब ₹58 करोड़ 15 लाख का गन्ना मूल्य बकाया है। नया पेराई सत्र 2026-27 अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। ऐसे में पुराने सत्र का करोड़ों का भुगतान अटका होने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
बैठक में किसानों ने एक बड़ा आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि मिल ने करीब ₹8 करोड़ का शीरा और ₹10 करोड़ की खोई बेच दी, फिर भी किसानों को भुगतान नहीं किया। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान किसानों ने जिला आबकारी अधिकारी को अपने बीच बैठाकर इस मामले में जवाब मांगा और किसानों के गन्ना भुगतान के लिए निर्धारित धनराशि के उपयोग की जांच कराने की मांग उठाई।
डीएम की चेतावनी और उसका असर
इसे यूं ही नहीं हो रहा। 14 अक्टूबर को जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने कलेक्ट्रेट के महात्मा विदुर सभागार में जिले की सभी चीनी मिलों के प्रबंधकों के साथ बैठक की थी। समीक्षा में जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि बिलाई को छोड़कर सभी मिलों ने पिछले सत्र का भुगतान कर दिया है। डीएम ने बिलाई मिल प्रबंधन को जल्द भुगतान के सख्त निर्देश दिए और साफ कहा कि देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, वरना नियमानुसार कार्रवाई होगी। यह जानकारी अमर उजाला और रॉयल बुलेटिन दोनों की रिपोर्टों में दर्ज है।
तीन दिन बीत गए, लेकिन किसानों के खातों में पैसा नहीं पहुंचा। किसान संगठनों का कहना है कि चेतावनी से बात बनती नहीं दिखी, इसलिए अब उन्होंने दबाव का नया हथियार निकाला है।
शपथपत्र क्यों खास हथियार माना जा रहा है
शपथपत्र महज एक कागज नहीं, बल्कि सामूहिक दबाव की रणनीति है। एक-एक किसान लिखित में कह रहा है कि बकाया न मिलने तक वह बिलाई मिल को गन्ना नहीं देगा। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक संगठन के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि इन किसानों ने बिलाई मिल को गन्ना न देने की मांग की है, और भुगतान के बिना गन्ना न काटा गया तो किसान डीएम के घर में गन्ना भरेंगे।
बैठक की अध्यक्षता मुखिया रामफल सिंह ने की और संचालन जिला महासचिव नितेंद्र प्रधान ने किया। जिलाध्यक्ष नितिन कुमार सिरोही समेत कई नेता मौजूद रहे। प्रदर्शन के बाद किसानों ने एडीएम प्रशासन अंशिका दीक्षित को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा।
500 का भाव और 20 अक्टूबर की डेडलाइन
संगठन ने पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही 20 अक्टूबर तक किसानों के भुगतान, गन्ना आवंटन, नकली बीज-दवाइयों के कारोबार, प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के सर्वे और तहसीलों में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर प्रशासन से ठोस कदम की मांग की गई है। अगर 20 अक्टूबर तक कार्रवाई न हुई, तो 20 हजार किसान ऑनलाइन आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कराएंगे, ऐसा संगठन ने चेतावनी दी है।
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
इस पूरे घटनाक्रम से बिलाई क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए तीन बातें साफ हैं। पहली, पेराई सत्र शुरू होने से पहले बकाये का भुगतान कराने का दबाव अब पहले से कहीं ज्यादा संगठित है, शपथपत्र और आईजीआरएस की दोहरी रणनीति प्रशासन को जवाब देने पर मजबूर करेगी। दूसरी, पर्ची और तौल की व्यवस्था पर इस बार जिला प्रशासन की सीधी नजर है, क्योंकि डीएम खुद समीक्षा कर चुके हैं। तीसरी, अगर मिल भुगतान किए बिना पेराई शुरू करने की कोशिश करती है, तो गन्ना देने या न देने का फैसला हर किसान को अपने सट्टा और समिति के निर्देशों के साथ सोच-समझकर लेना चाहिए।
बहरहाल, 20 अक्टूबर की डेडलाइन अब सिर्फ दो दिन दूर है। सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन और मिल प्रबंधन 58 करोड़ के इस बकाये पर क्या फैसला लेते हैं।
मुख्य बातें
- बिलाई चीनी मिल पर पिछले पेराई सत्र का करीब ₹58.15 करोड़ गन्ना बकाया है, जिले की 10 मिलों में भुगतान बाकी रखने वाली यह अकेली मिल है।
- भाकियू अराजनैतिक ने 20 हजार किसानों के शपथपत्र प्रशासन को सौंपे; भुगतान न मिला तो डीएम कोठी में गन्ना भरने की चेतावनी।
- संगठन की मांग: पेराई से पहले 500 रुपये प्रति कुंतल भाव घोषित हो, और 20 अक्टूबर तक भुगतान समेत सभी मुद्दों पर कार्रवाई हो।
स्रोत: अमर उजाला (17 अक्टूबर 2026; 14 अक्टूबर 2026), हिंदुस्तान के हवाले से चिनीमंडी (सितंबर 2026), रॉयल बुलेटिन (14 अक्टूबर 2026)
