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₹4,500 चीनी पर मिलें कमा रहीं, गन्ने का 2026-27 भाव अभी लटका — 7 साल बाद बड़ा फैसला

✍️ Aamir Raza · 🗓 11 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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₹4,500 चीनी पर मिलें कमा रहीं, गन्ने का 2026-27 भाव अभी लटका — 7 साल बाद बड़ा फैसला

मिल गेट पर ट्रॉली खड़ी करके गन्ना तौलाने की तैयारी कर रहे किसान के मन में इस बार एक सवाल सबसे ऊपर है। चीनी का भाव सवा चार हजार रुपये प्रति क्विंटल के पार चल रहा है, तो उसके गन्ने का इस साल का भाव कब तय होगा? इसी सवाल के बीच बिजनौर की दस चीनी मिलों ने सात साल बाद अपनी पूरी रणनीति बदल दी है। इस पेराई सत्र में वे सिर्फ चीनी बनाएंगी। न बी-हैवी शीरा, न गन्ने के रस से सीधा एथनॉल, न विदेशी बाजार के लिए रॉ शुगर।

मिलों ने क्या तय किया है

दैनिक जागरण की 9 अक्टूबर की बिजनौर रिपोर्ट के मुताबिक जिले की दस चीनी मिलें इस बार केवल सी-हैवी शीरे पर चलेंगी। सी-हैवी शीरा वह बचा हुआ रस है, जिसमें मिठास लगभग नहीं के बराबर होती है। अगर इसी रस में 15 प्रतिशत तक मिठास छोड़ दी जाए तो वह बी-हैवी शीरा कहलाता है। बी-हैवी से एथनॉल बनता है, लेकिन उससे चीनी कम निकलती है। जब चीनी का बाजार चढ़ा हो तो मिल के लिए सबसे फायदेमंद काम पूरा गन्ना चीनी में बदलना होता है। बिजनौर की मिलें अब ठीक यही करने जा रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार धामपुर, स्योहारा, बरकातपुर, बुंदकी और चांगीपुर मिलें अब तक बी-हैवी बनाती थीं। अब ये सभी सी-हैवी पर चलकर केवल चीनी का उत्पादन करेंगी। एक दौर था जब मिलों की कमाई सिर्फ चीनी पर टिकी थी, फिर बिजली बनी, एथनॉल प्लांट लगे, रॉ शुगर का निर्यात शुरू हुआ। चढ़े दामों ने मिलों को सात साल पुराने रास्ते पर वापस मोड़ दिया है।

इस फैसले के पीछे का गणित

मिलों के इस फैसले की जड़ देश के दो बड़े गन्ना राज्यों की फसल में है। जागरण की रिपोर्ट में मिल प्रबंधनों के हवाले से कहा गया है कि कम बरसात के चलते इस बार महाराष्ट्र में गन्ने की पैदावार करीब 20 प्रतिशत और कर्नाटक में करीब 30 प्रतिशत तक रहने की आशंका है। यानी देश में चीनी का उत्पादन दबाव में रहेगा और बाजार चढ़ा ही रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक चीनी के दाम सवा चार से साढ़े चार हजार रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे हैं।

तेजी पर सरकार की नजर भी है। रूरल वॉइस की रिपोर्ट के अनुसार बिजनौर के जिला गन्ना अधिकारी बी.के. पटेल ने 3 सितंबर को सभी मिलों को चीनी की बिक्री 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर न करने का निर्देश दिया था।

चीनीमंडी की रिपोर्ट के मुताबिक बिजनौर की मिलों को 43,000 मीट्रिक टन रॉ शुगर निर्यात का कोटा मिला था, लेकिन एक दाना भी विदेश नहीं भेजा गया। घरेलू बाजार में बेहतर दाम मिल रहे थे।

मिल की कमाई और किसान का भाव: दो अलग खाते

मिलों की कमाई बढ़ना और गन्ने का भाव बढ़ना, ये दो अलग-अलग फैसले हैं। केंद्र सरकार 2026-27 सीजन का एफआरपी पहले ही तय कर चुकी है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मई 2026 में एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल मंजूर किया था, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू है। यह दर 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर आधारित है।

लेकिन यूपी के किसान के लिए असली भाव एसएपी होता है, और 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी तक नहीं हुई है। अब तक घोषित अंतिम भाव 2025-26 सत्र का है: अगेती किस्म के लिए 400 रुपये, सामान्य के लिए 390 रुपये और अनुपयुक्त किस्म के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल। इस बार का भाव पूरी तरह राज्य सरकार के फैसले पर टिका है।

इसी खाली जगह को भरने की मांग किसान संगठन उठा रहे हैं। हापुड़ की सहकारी गन्ना विकास समिति की बैठक में 2026-27 के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल भाव और 2025-26 के बकाये पर 15 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान का प्रस्ताव पारित हुआ। अमरोहा में भाकियू (लोकहित) की पंचायत में भी 500 रुपये भाव की मांग तेज हुई। वहीं राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर 600 रुपये प्रति क्विंटल भाव मांगा है। संगठन का कहना है कि गन्ने की उत्पादन लागत करीब 392 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है।

पेराई 20 अक्टूबर के आसपास, किसान अभी क्या करें

पश्चिमी यूपी की मिलें इस बार करीब 10 दिन पहले पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया और चीनीमंडी की रिपोर्टों के मुताबिक 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू हो सकती है, बशर्ते मौसम साथ दे। जागरण की 29 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार बरकातपुर मिल ने 16 अक्टूबर की संभावित तिथि दी थी। उत्तर प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी यूपी में हैं।

पेराई से पहले तीन काम सबसे जरूरी हैं। पहला, सट्टा और सर्वे का ब्योरा जांच लें। रकबा और किस्म की पुष्टि करा लें। दूसरा, बैंक खाता सक्रिय रखें और दस्तावेजों से जुड़ा हो, ताकि भुगतान में देरी न हो। तीसरा, पर्ची और कैलेंडर पर नजर रखें। ई-गन्ना ऐप और caneup.in पोर्टल पर पर्ची देखी जा सकती है।

भुगतान का नियम साफ है। गन्ना तौल के 14 दिन के भीतर भुगतान अनिवार्य है। हापुड़ की समिति बैठक में डिफाल्टर मिलों से 15 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान की मांग रखी गई, और 22 सितंबर को बिजनौर की किसान महापंचायत में भी यही मांग उठी थी। भुगतान अटके तो जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी मदद मिलती है, और 51969 पर एसएमएस से जानकारी ली जा सकती है।

मुख्य बातें

  • बिजनौर की दस मिलें सात साल बाद सिर्फ सी-हैवी शीरे से चीनी बनाएंगी, एथनॉल और रॉ शुगर नहीं।
  • चीनी ₹4,250-4,500 प्रति क्विंटल पर है, लेकिन 2026-27 का गन्ना एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ।
  • पेराई 20 अक्टूबर के आसपास शुरू हो सकती है; सट्टा, सर्वे और बैंक खाता अभी से दुरुस्त रखें।

स्रोत: दैनिक जागरण, बिजनौर (9 अक्टूबर 2026); चीनीमंडी; रूरल वॉइस; टाइम्स ऑफ इंडिया। चित्र: Shakher59, Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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