गन्ना बकाया पर ब्याज की लड़ाई: बिजनौर महापंचायत में वीएम सिंह की बड़ी मांग

गन्ना मिल को दे दिया, तौल पर्ची कट गई, समिति का कागज भी बन गया। अब बस पैसे का इंतजार रहता है। तीन महीने, छह महीने, कभी-कभी पूरा साल। और इसी बीच किसान को बीज-खाद, डीजल और बच्चों की फीस के लिए महाजन से ब्याज पर पैसा उठाना पड़ता है। अब सवाल सीधा है: जब देरी की कीमत किसान को चुकानी पड़ती है, तो चीनी मिलें देरी की कीमत क्यों न चुकाएं?
इसी सवाल को लेकर 22 सितंबर को बिजनौर कलेक्ट्रेट परिसर में हजारों किसानों ने महापंचायत की। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के आह्वान पर हुई इस महापंचायत की सबसे बड़ी मांग थी: बकाया गन्ना मूल्य पर किसानों को ब्याज दिया जाए।
ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान
मंगलवार, 22 सितंबर को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले बिजनौर कलेक्ट्रेट परिसर में हुई महापंचायत में पश्चिमी यूपी के लगभग सभी जिलों से किसान पहुंचे। रिपोर्टों के मुताबिक हजारों किसान सैकड़ों ट्रैक्टर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान किसानों ने नारेबाजी की और प्रशासनिक अधिकारियों से मांगों को लेकर बातचीत भी हुई।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह खुद मौजूद थे, और मांगें न मानी जाने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई।
मांगों में ब्याज सबसे ऊपर, साथ में भाव और सर्किल रेट
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक महापंचायत में तीन बड़ी मांगें प्रमुखता से उठीं। पहली, गन्ना मूल्य भुगतान में विलंब पर किसानों को ब्याज दिलाया जाए। दूसरी, गंगा एक्सप्रेसवे में चिह्नित भूमि का सर्किल रेट वर्तमान स्थिति के अनुसार तय किया जाए। तीसरी, गन्ने का मूल्य उत्पादन लागत के हिसाब से घोषित किया जाए।
किसानों का कहना है कि पुराने सर्किल रेट पर जमीन अधिग्रहण से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। एक्सप्रेसवे के लिए ली जा रही जमीन की कीमत आसपास के मौजूदा भाव से जुड़नी चाहिए, न कि सालों पुराने रेट से।
इसके अलावा गन्ने के खेतों में गुलदार की बढ़ती आमद से राहत की मांग भी उठी। संगठन का कहना है कि गुलदार की दहशत से किसान खेत में काम करने से डर रहे हैं।
“30 साल के ब्याज” का दावा और हाईकोर्ट का हवाला
ब्याज की यह मांग बिजनौर तक सीमित नहीं रही। 25 सितंबर को बागपत के गुराना गांव में हुई एक और महापंचायत में सरदार वीएम सिंह ने इसे और आगे बढ़ा दिया। वहां करीब 400 से 500 किसानों की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार किसानों को पिछले 30 वर्षों के बकाए का ब्याज तत्काल अदा किया जाए।
वॉइस ऑफ न्यूज 24 की रिपोर्ट के मुताबिक वीएम सिंह ने चेतावनी दी कि अगर कोई प्रशासनिक अधिकारी या जिला गन्ना अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। यह संगठन का दावा है; आधिकारिक ब्याज-भुगतान की कोई घोषणा अब तक नहीं हुई है।
आंदोलन सिर्फ बिजनौर तक नहीं थमा
बिजनौर के अलावा पीलीभीत, मुरादाबाद समेत पश्चिमी यूपी के कई जिलों में कलेक्ट्रेट और गन्ना आयुक्त कार्यालयों के परिसरों में किसानों के प्रदर्शन कई दिनों से चल रहे हैं। पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले किसान अपनी शर्तें साफ करना चाहते हैं।
मिलें चलने को तैयार, लेकिन भाव की घोषणा बाकी
महापंचायत की मांगों के बीच पेराई सत्र की तैयारियां भी जोरों पर हैं। गन्ना आयुक्त ने चीनी मिलों को 15 अक्टूबर तक पेराई शुरू करने का लिखित आदेश दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया (मेरठ) की 29 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलों में अक्टूबर के पहले हफ्ते तक बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल पूरे करने का लक्ष्य है।
सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें 71 से ज्यादा पश्चिमी यूपी में ही हैं। लेकिन भाव को लेकर तस्वीर अभी अधूरी है। पिछले पेराई सत्र 2025-26 का एसएपी अगेती किस्मों के लिए ₹400 प्रति क्विंटल था, और 2026-27 की एसएपी दर की घोषणा अभी बाकी है। किसानों का दबाव है कि मिलें चलने से पहले भाव घोषित किया जाए।
किसान के लिए अभी क्या जरूरी है
ब्याज की लड़ाई कागजों पर जीती जाती है। इसलिए गन्ना आपूर्ति की हर तौल पर्ची, समिति की रसीद और भुगतान का रिकॉर्ड संभाल कर रखें। बैंक खाता चालू रहे और आधार से लिंक हो, वरना भुगतान अटक सकता है। अपनी गन्ना विकास परिषद या समिति से बकाए की स्थिति लिखित में लें।
आंदोलन की अगली कड़ी की भी तारीख सामने आई है। एनएचपी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक किसान मजदूर संगठन ने 15 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में महापंचायत का ऐलान किया है। वहां गन्ने का मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल करने की मांग प्रमुख एजेंडे में है। ध्यान रहे, यह आयोजन राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन से अलग संगठन का है।
मुख्य बातें
- 22 सितंबर को बिजनौर कलेक्ट्रेट में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की महापंचायत में हजारों किसानों ने बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज की मांग उठाई।
- संगठन के नेता सरदार वीएम सिंह ने बागपत के गुराना गांव में 30 वर्षों के बकाए पर हाईकोर्ट के आदेशानुसार ब्याज भुगतान का दावा किया और अधिकारियों को चेतावनी दी।
- पेराई सत्र से पहले पीलीभीत, मुरादाबाद समेत कई जिलों में प्रदर्शन जारी है, जबकि 2026-27 की एसएपी दर की घोषणा अभी बाकी है।
स्रोत: अमर उजाला, 22 सितंबर 2026; Kisan India, 22 सितंबर 2026; Voice of News 24, 25 सितंबर 2026
