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पेराई से पहले बिजनौर में बवाल: किसान बोले, गन्ने का भाव ₹580 करो

✍️ Aamir Raza · 🗓 16 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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पेराई से पहले बिजनौर में बवाल: किसान बोले, गन्ने का भाव ₹580 करो

गन्ना किसानों की सबसे बड़ी मांग का आंकड़ा बुधवार को बिजनौर की सड़कों पर दिखा। भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) की महापंचायत के बाद हजारों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ गन्ना समिति की ओर बढ़े। संगठन के जिला अध्यक्ष ने गन्ने का भाव ₹580 प्रति क्विंटल करने की मांग रखी। नुमाइश ग्राउंड पर पुलिस की बैरिकेडिंग को लेकर किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, और कुछ देर तनावपूर्ण माहौल रहा।

यह सब ऐसे समय पर हुआ है, जब पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत बस कुछ दिन दूर है। गन्ना आयुक्त के हवाले से आई खबरों के मुताबिक चीनी मिलें अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से चलना शुरू हो जाएंगी। लेकिन अभी तक नए सत्र के लिए गन्ने का उचित मूल्य घोषित ही नहीं हुआ है। मिल चलने वाली है, भाव घोषित नहीं है। किसानों की नाराजगी की जड़ असल में यहीं है।

नुमाइश ग्राउंड पर क्या हुआ

भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति के कार्यकर्ता जिला अध्यक्ष चौधरी वीर सिंह सहरावत के नेतृत्व में सेंट मैरीज़ स्कूल चौराहे के पास एकत्र हुए। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी महापंचायत में मौजूद थे। यहां से किसान ट्रैक्टरों और पैदल नारेबाजी करते हुए गन्ना समिति की ओर बढ़ने लगे।

पुलिस ने नुमाइश ग्राउंड चौराहे पर बैरिकेडिंग लगाकर किसानों को रोकने की कोशिश की। किसान बैरिकेडिंग हटाने लगे, तो दोनों पक्षों में कहासुनी और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ देर तक चौराहे पर तनाव बना रहा, लेकिन किसान पीछे नहीं हटे। वे गन्ना समिति पहुंच गए और वहां धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

मंच से ₹580, ज्ञापन में ₹600

महापंचायत में जिला अध्यक्ष ने गन्ना क्रय केंद्रों पर कथित घटतौली पर रोक लगाने की मांग के साथ गन्ने का भाव बढ़ाकर ₹580 प्रति क्विंटल करने की मांग रखी। रॉयल बुलेटिन की रिपोर्ट के अनुसार, किसान नेताओं का कहना है कि गन्ना किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए और तौल में किसी तरह की अनियमितता नहीं होनी चाहिए।

दिलचस्प यह है कि महापंचायत के बाद मुख्यमंत्री के नाम भेजे गए ज्ञापन में ₹600 प्रति क्विंटल भाव की मांग का भी उल्लेख सामने आया है। वीडियो रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञापन में चीनी मिलें अक्टूबर में ही चालू कराने जैसी मांगें भी शामिल हैं। यानी मंच से बोला गया आंकड़ा ₹580 और कागज पर दर्ज मांग ₹600। किसान संगठनों की यह रणनीति नई नहीं है। भाव की बातचीत में ऊंची बोली लगाकर असल सौदे का रास्ता खोला जाता है।

पेराई बस कुछ दिन दूर, भाव अभी अघोषित

बिजनौर के आंदोलन की टाइमिंग को समझना जरूरी है। किसान तक की रिपोर्ट में गन्ना आयुक्त के हवाले से कहा गया है कि चीनी मिलों का संचालन अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हो जाएगा। पीलीभीत में भी चारों चीनी मिलें नवीन पेराई सत्र 2026-27 के लिए अक्टूबर के अंत तक शुरू होने की उम्मीद जताई गई है। उधर संयुक्त किसान मोर्चा ने चीनी मिलें 25 अक्टूबर से चालू कराने की मांग की है।

किसान संगठनों का गणित साफ है। पेराई शुरू होने से पहले भाव तय कराने का दबाव सबसे ज्यादा असर करता है। मिल चल गई और भाव बाद में घोषित हुआ, तो किसान के पास सौदेबाजी की कोई जगह नहीं बचती।

घटतौली और बकाया भुगतान: कागज संभालकर रखें

भाव के साथ-साथ दो और मुद्दे किसानों के एजेंडे में सबसे ऊपर हैं। पहला है गन्ना क्रय केंद्रों पर घटतौली की शिकायत। दूसरा है बकाया गन्ना भुगतान। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ईटीवी भारत से कहा, “किसानों की प्रमुख मांगों में गुलदार की समस्या से निजात दिलाना, गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाना और बकाया गन्ना भुगतान जल्द कराना शामिल है।”

पेराई शुरू होने से पहले हर किसान के लिए कुछ जरूरी काम हैं। अपने बकाया भुगतान का पूरा रिकॉर्ड संभालकर रखें। तौल पर्चे, पर्चियां और भुगतान विवरण यही दस्तावेज शिकायत के समय काम आते हैं। क्रय केंद्र पर तौल की प्रक्रिया पर खुद नजर रखें। किसी अनियमितता पर जिला गन्ना अधिकारी या गन्ना समिति में शिकायत दर्ज कराएं। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी शिकायत की जा सकती है। एसएमएस के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 उपलब्ध है। ई-गन्ना ऐप या गन्ना समिति से अपना सट्टा और आपूर्ति कार्यक्रम भी पहले से जांच लें, ताकि पेराई शुरू होते ही कोई अड़चन न आए।

आगे क्या

बिजनौर के धरने के बाद अब नजर जिला प्रशासन और गन्ना विभाग की प्रतिक्रिया पर है। किसान संगठनों का कहना है कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज होगा। दूसरी ओर, मिलें और प्रशासन चाहते हैं कि पेराई सत्र शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हो। भाव की घोषणा कब होगी, यह अब सरकार के पाले में है। लेकिन इतना साफ है कि पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत इस बार किसानों के दबाव की छाया में होने जा रही है।

मुख्य बातें

  • बिजनौर में भाकियू लोकशक्ति की महापंचायत के बाद किसानों का प्रदर्शन; नुमाइश ग्राउंड पर पुलिस से धक्का-मुक्की, फिर गन्ना समिति पर धरना।
  • जिला अध्यक्ष ने गन्ने का भाव ₹580 प्रति क्विंटल करने की मांग रखी; मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में ₹600 भाव की मांग का उल्लेख।
  • चीनी मिलें अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से चलने वाली हैं, लेकिन 2026-27 सत्र का गन्ना भाव अभी तक घोषित नहीं हुआ।

स्रोत: ईटीवी भारत (14 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (15 अक्टूबर 2026), किसान तक (16 अक्टूबर 2026), हिंदुस्तान (15 अक्टूबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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