बिजनौर में हाथियों का कहर: एक रात में 14 बीघा गन्ना रौंदा, वन विभाग मौके पर

बिजनौर के इनायतपुर गांव में किसानों की सुबह इस बार हैरानी के साथ शुरू हुई। 17 अक्टूबर की सुबह जब किसान खेतों की ओर पहुंचे, तो वहां हरा-भरा गन्ना नहीं था। जहां तक नजर गई, टूटा और कुचला हुआ गन्ना बिखरा पड़ा था। रात में गांव के पास के जंगल से हाथियों का झुंड निकला और 14 बीघा से ज्यादा गन्ने की फसल को पैरों तले रौंदकर बर्बाद कर दिया।
यह घटना बिजनौर जिले के बढ़ापुर थाना क्षेत्र के इनायतपुर गांव की है। जंगल से सटे इस गांव के खेतों में रात के अंधेरे में हाथी दाखिल हो गए। सुबह तक खड़ा गन्ना जमीन पर गिर चुका था और चारों तरफ तबाही का मंजर था। एक ही रात में किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया।
रातभर में हुआ यह नुकसान
ग्रामीणों के मुताबिक, जंगली हाथियों का झुंड रात के समय जंगल से निकलकर गांव के आसपास के खेतों में पहुंच गया। गन्ने की तैयार फसल देखकर हाथी खेतों में घुस गए और फसल को बुरी तरह कुचल दिया। खेत में काम करने वालों को घटना का पता तब चला, जब सुबह खेतों में पहुंचने पर चारों तरफ बर्बाद फसल दिखी।
किसानों ने हाथियों के खेत में दाखिल होने की लाइव वीडियो भी कैमरे में कैद कर ली है। इसमें खेतों में हाथियों की मौजूदगी और उसके बाद ग्रामीणों की चिंता दोनों साफ दिख रही हैं। इनायतपुर के साथ-साथ आसपास के इलाकों में भी हाथियों की आवाजाही की खबर से डर का माहौल बन गया है।
कौन किसान आए चपेट में
इस घटना में किसान राजेश पाल, राजपाल सिंह, बलराज सिंह और राजेंद्र सिंह समेत कई अन्य किसानों की 14 बीघा से अधिक गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। यह नुकसान सिर्फ खेत में खड़ी फसल का नहीं है। गन्ने की खेती में किसान पूरे साल बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर पैसा लगाता है। फसल तैयार होने के बाद वह गन्ने की बिक्री से अच्छी कमाई की उम्मीद करता है। हाथियों के झुंड के एक रात के उत्पात ने इस पूरी उम्मीद को चोट पहुंचाई है।
सुबह जब एक बुजुर्ग किसान अपनी बर्बाद फसल को देखकर सिर पकड़कर बैठ गया, तो यह तस्वीर हर उस किसान की कहानी कहती है जिसकी मेहनत जंगली जानवरों की भेंट चढ़ जाती है। आंखों के सामने सालभर की मेहनत बिखरी पड़ी हो, तो किसी का भी दिल टूट जाए।
मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने प्रभावित खेतों का दौरा किया और गन्ने की फसल को हुए नुकसान का जायजा लिया। अब किसानों को उम्मीद है कि नुकसान का सही आकलन होगा और उसके बाद आगे की जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
किसानों की यह भी मांग है कि जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। इनायतपुर जैसे जंगल से सटे गांवों में यह डर नया नहीं है, और खेतों में काम करने वालों के लिए हाथियों की मौजूदगी सीधे खतरा भी है।
जंगल से सटे गांवों के किसानों की बढ़ी चिंता
इनायतपुर में जंगली हाथियों की आवाजाही ने आसपास के इलाकों के किसानों की भी चिंता बढ़ा दी है। गन्ने की पेराई का सीजन नजदीक है और खेतों में फसल खड़ी है। ऐसे में हाथियों का झुंड दोबारा खेतों की ओर आ जाए, इसका डर अब हर किसान के मन में बैठा है।
बिजनौर का एक बड़ा हिस्सा जंगलों से सटा हुआ है, जहां हाथियों और किसानों का टकराव पहले भी खबरों में आता रहा है। इन इलाकों में फसल के मौसम में हाथी अक्सर जंगल से बाहर आ जाते हैं। सवाल यह है कि जंगल से निकलकर खेतों तक पहुंच रहे हाथियों से किसानों की फसल की सुरक्षा कैसे होगी, ताकि अन्नदाता को अपनी मेहनत का नुकसान न झेलना पड़े।
फसल बर्बाद हुई हो तो किसान क्या करें
जंगली जानवरों से फसल बर्बाद होने की स्थिति में किसान के लिए सबसे जरूरी है तुरंत कार्रवाई करना। वन विभाग और ग्राम पंचायत को घटना की सूचना दें, ताकि नुकसान का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में दर्ज हो सके। फसल के नुकसान की फोटो और वीडियो बना लें, यह आगे नुकसान के आकलन में सबूत का काम करता है।
अगर फसल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित है, तो बैंक या बीमा कंपनी को तय समय के अंदर नुकसान की सूचना देनी जरूरी है। जंगली जानवरों से हुए नुकसान की सूचना के अपने नियम होते हैं, इसलिए देर करना भारी पड़ सकता है।
और सबसे अहम बात, हाथियों के झुंड से सामना हो जाए तो उनसे दूरी बनाए रखें। रात में खेत की ओर अकेले न जाएं और किसी भी हाल में हाथियों को उकसाने की कोशिश न करें। गांव के किसान आपस में समन्वय करके भी खेतों की निगरानी कर सकते हैं, ताकि एक साथ कई खेतों पर नजर रखी जा सके। फसल दोबारा लग सकती है, जान सबसे कीमती है।
मुख्य बातें
- बिजनौर के बढ़ापुर थाना क्षेत्र के इनायतपुर गांव में हाथियों के झुंड ने 14 बीघा से ज्यादा गन्ने की फसल रौंद दी।
- किसान राजेश पाल, राजपाल सिंह, बलराज सिंह और राजेंद्र सिंह समेत कई किसानों को भारी नुकसान, सालभर की मेहनत पर पानी।
- वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया, अब किसानों को आकलन और आगे की कार्रवाई का इंतजार।
स्रोत: आज तक (17 अक्टूबर 2026), किसान तक (18 अक्टूबर 2026), जीएनटी (17 अक्टूबर 2026)
