बिजनौर बनेगा सीएनजी हब: गन्ने की मैली से रोज 60 टन गैस, 550 करोड़ का निवेश

बुंदकी चीनी मिल के ठीक बगल में जिस संयंत्र का ढांचा इन दिनों तेजी से खड़ा हो रहा है, वह 31 अक्टूबर से गैस बनाना शुरू कर देगा। युवा बायो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से रोज 10 टन सीएनजी बनाने का प्लांट तैयार कर रही है। कच्चा माल वही मैली होगी, जो हर पेराई सीजन में चीनी मिलों के पिछवाड़े ढेर बनी रहती है। गन्ने की पेराई के बाद निकलने वाली इस प्रेसमड को अब तक मिलों के लिए निपटान की सिरदर्दी माना जाता था। अब यही मैली वाहनों का ईंधन बनने जा रही है।
यह खबर सिर्फ एक प्लांट की नहीं, पूरे बिजनौर जिले की है। दैनिक जागरण की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार जिले में गन्ने की प्रेसमड, नेपियर ग्रास और पशुओं के गोबर से सीएनजी बनाने के लिए 550 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो रहा है। इसमें से 138 करोड़ रुपये का निवेश पहले ही धरातल पर उतर चुका है। अनुमान है कि जिले में रोज 60 टन सीएनजी का उत्पादन संभव है। यह मात्रा बिजनौर के अलावा एक और जिले की खपत भी पूरी कर सकती है।
क्यों चुना गया बिजनौर
बिजनौर में कुल दस चीनी मिलें हैं। हाल में हुए एक सर्वे के मुताबिक देश में सीएनजी के संभावित उत्पादन का करीब 24 प्रतिशत हिस्सा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तैयार किया जा सकता है, और इस बेल्ट में बिजनौर जिला सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। कच्चे माल की कोई कमी नहीं है। पेराई सीजन में मिलों से निकलने वाली प्रेसमड के अलावा नेपियर ग्रास और पशुओं का गोबर भी सीबीजी प्लांटों के काम आ सकता है।
पश्चिम एशिया में संकट के बाद देश की पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भरता कम करने के प्रयास तेज हुए हैं। उसी कड़ी में चीनी मिलें अब गन्ने की प्रेसमड और अनाज से एथनॉल के साथ-साथ बायो-सीएनजी की ओर भी बढ़ रही हैं। पेट्रोल की खपत घटाने में यह प्रयोग अहम भूमिका निभा सकता है।
बुंदकी प्लांट: 31 अक्टूबर से उत्पादन की तैयारी
युवा बायो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड बुंदकी चीनी मिल के पास 100 करोड़ रुपये की लागत से रोज 10 टन क्षमता का सीएनजी उत्पादन प्लांट बना रही है। निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। प्रेसमड की आपूर्ति के लिए बुंदकी समेत द्वारिकेश समूह की मिलों के साथ समझौते हो चुके हैं। कंपनी 31 अक्टूबर से सीएनजी उत्पादन शुरू करने की तैयारी कर रही है। सुपर नेपियर ग्रास भी इस प्लांट का बड़ा कच्चा माल होगा।
जागरण की रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तराखंड की एक बड़ी कंपनी नजीबाबाद में 10 टीपीडी क्षमता का सीबीजी प्लांट लगाने जा रही है। यहां सुपर नेपियर ग्रास से सीएनजी बनाई जाएगी, जबकि मिलों की प्रेसमड और पशुओं के गोबर का विकल्प भी खुला रखा गया है। गैस बनने के बाद बचा हुआ माल जैविक खाद के काम आएगा।
इन मिलों ने भी भेजे प्रस्ताव
बिजनौर की कई चीनी मिलें सीबीजी प्लांट लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। स्योहारा और बिलाई चीनी मिलों ने सीबीजी प्लांट लगाने के प्रस्ताव भेजे हैं। चांदपुर चीनी मिल की ओर से भी इस वर्ष प्लांट लगाने पर विचार किया जा रहा है। धामपुर चीनी मिल ने प्रेसमड आपूर्ति के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ एमओयू साइन किया है। अफजलगढ़ और बुंदकी ने युवा बायो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौते किए हैं।
रिलायंस के बाद उत्तराखंड की कंपनी के आने से जिले में निवेश की रफ्तार और तेज हो गई है। बिजनौर चीनी मिल अपनी सहइकाई में इस्तेमाल के लिए धनौरा स्थित इकाई में प्रेसमड भेजने की योजना बना रही है।
375 करोड़ की चार परियोजनाएं, 360 रोजगार की उम्मीद
दूसरी ओर हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार जिलाधिकारी जसजीत कौर ने जनपद में स्वच्छ ऊर्जा की चार परियोजनाओं के तहत 375 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव की जानकारी दी है। इनसे करीब 360 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।
चारों प्रस्ताव इस प्रकार हैं। कृषि अवशेष और प्रेसमड जैसे मिश्रित फीडस्टॉक पर आधारित 25 टीपीडी क्षमता के सीबीजी प्रोजेक्ट और फीडस्टॉक कलेक्शन सेंटर के लिए 250 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है, जिससे करीब 150 लोगों को रोजगार मिलेगा। युवा बायो एनर्जी की ओर से 10 टीपीडी क्षमता के प्लांट के लिए 60 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है, जिससे करीब 80 रोजगार सृजित हो सकते हैं। AAGMIK ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड ने सीबीजी और बायो-फर्टिलाइजर निर्माण के लिए 40 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे करीब 100 लोगों को रोजगार मिलेगा। UP ग्रीन वेंचर्स LLP ने 6 टीपीडी क्षमता के प्लांट के लिए 25 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है, जिससे करीब 30 लोगों को रोजगार मिलेगा।
जिलाधिकारी जसजीत कौर के मुताबिक जनपद में निवेशकों को आवश्यक सहयोग और सुविधाएं देने के लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है। स्वच्छ ऊर्जा आधारित परियोजनाओं को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
किसानों को क्या फायदा मिलेगा
इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा संभावित फायदा स्थानीय किसानों और पशुपालकों को हो सकता है। गन्ने की प्रेसमड, नेपियर ग्रास और पशुओं के गोबर जैसे कच्चे माल की मांग बढ़ने से इनके लिए बाजार तैयार होगा। पशुपालकों के लिए गोबर अब सिर्फ अपशिष्ट नहीं रहेगा। उसे ऊर्जा उत्पादन के कच्चे माल के रूप में बेचने का विकल्प मिल सकता है। इसी तरह नेपियर ग्रास की खेती करने वाले किसानों के लिए भी अतिरिक्त बाजार तैयार होने की संभावना है।
गैस उत्पादन के बाद बचने वाले जैविक पदार्थ से खाद तैयार होगी, जिसका लाभ खेती को मिलेगा। मिलों को प्रेसमड बेचने से जो अतिरिक्त आय मिलेगी, उससे गन्ना भुगतान की तरलता भी सुधर सकती है। हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की भी उम्मीद जताई गई है।
मुख्य बातें
- बिजनौर में प्रेसमड, नेपियर ग्रास और गोबर से सीएनजी बनाने के लिए 550 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो रहा है, जिसमें से 138 करोड़ धरातल पर उतर चुका है।
- बुंदकी में 100 करोड़ की लागत से बन रहा 10 टीपीडी प्लांट 31 अक्टूबर से गैस उत्पादन शुरू करेगा; स्योहारा, बिलाई, चांदपुर और धामपुर की मिलें भी सीबीजी की ओर बढ़ रही हैं।
- जिलाधिकारी जसजीत कौर के अनुसार चार स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं से 375 करोड़ का निवेश और करीब 360 रोजगार सृजित होने की संभावना है।
स्रोत: दैनिक जागरण (बिजनौर रिपोर्ट, सितंबर 2026); लाइव हिंदुस्तान/हिंदुस्तान (सितंबर 2026); उदयपुर टाइम्स हिंदी (सितंबर 2026)
