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बिजनौर में 3 दिन में 225 मिमी बारिश, 2.5 लाख हेक्टेयर गन्ना चपेट में: पेराई पर संकट

✍️ Aamir Raza · 🗓 03 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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बिजनौर में 3 दिन में 225 मिमी बारिश, 2.5 लाख हेक्टेयर गन्ना चपेट में: पेराई पर संकट

पेराई का महीना सिर पर है और खेतों में पानी भरा है. ये हालात किसी एक गांव के नहीं हैं. पश्चिम यूपी के गन्ना बेल्ट से लेकर तराई और पूर्वांचल तक, देर मानसून की बारिश ने इस बार वही किया जिससे किसान सबसे ज्यादा डरता है. कटाई से ऐन पहले फसल खेत में फंस गई.

नगीना कृषि अनुसंधान केंद्र के आंकड़े: बिजनौर में तीन दिन में करीब 225 मिलीमीटर बारिश. जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल का कहना है कि लेटी फसल से उपज के साथ चीनी की रिकवरी भी घट सकती है, ठीक तब जब मिलें नए पेराई सत्र की तैयारी कर रही हैं. यानी नुकसान सिर्फ खेत का नहीं, गन्ने की मिठास का भी है.

बिजनौर: गन्ना बेल्ट पर सबसे भारी मार

बिजनौर में गन्ना करीब ढाई लाख हेक्टेयर में लगा है और यही जिला इस बार की बारिश का सबसे बड़ा निशाना बना. धान 50 हजार हेक्टेयर में लगा था, जिसमें से 7 से 10 फीसदी फसल कटाई से ऐन पहले खराब हो गई. कृषि उपनिदेशक घनश्याम वर्मा के मुताबिक नुकसान का सर्वे चल रहा है.

गन्ना किसान नितिन सिरोही की मांग सीधी है: बर्बाद फसल का मुआवजा मिलना चाहिए. लेकिन कई खेतों में अब भी पानी जमा है, और खड़ा पानी गन्ने की जड़ों के लिए सबसे खतरनाक होता है. लेटी फसल में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ता है.

अमरोहा: 70 फीसदी फसल तबाह, ₹9.50 करोड़ का प्रस्ताव

गंगा की बाढ़ ने अमरोहा की हसनपुर और धनौरा तहसीलों में 70 प्रतिशत तक फसलें नष्ट कर दीं. हसनपुर में 2534.38 हेक्टेयर और धनौरा में 2749.877 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई. उड़द, धान, गन्ना और सब्जियों की खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं. 59 गांवों के खेतों में पानी अब भी भरा है, इसलिए लेखपालों का सर्वे भी पूरा नहीं हो पाया.

प्रशासन ने मुआवजे के लिए करीब ₹9.50 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा है: हसनपुर के लिए ₹4.81 करोड़ और धनौरा के लिए ₹4.67 करोड़. जिला आपदा विशेषज्ञ पवन शुक्ला के मुताबिक प्रस्ताव जिलाधिकारी के जरिए भेजा गया ताकि बर्बाद फसल का मुआवजा किसानों तक पहुंच सके. फसल बीमा का सर्वे इफ्को टोकियो ने पूरा किया: 8825 बीमित किसानों में से करीब 2100 की 70 प्रतिशत तक फसल बेकार हो गई.

लखीमपुर के 155 गांव, अयोध्या का किसान

लखीमपुर खीरी के धौरहरा तहसील में तीन दिन की मूसलाधार बारिश से 155 गांव प्रभावित हुए. लोनियन पुरवा के सोबरन लाल ने कर्ज लेकर गन्ना और धान लगाया था: फसल डूब गई और कच्चा मकान भी गिर गया. प्रशासन का दावा है कि करीब 4 हजार बाढ़ राहत किट बांटी गईं और सर्वे हो रहा है.

अयोध्या के तारुन विकासखंड के करनाईपुर गांव में किसान राज बहादुर वर्मा के खेत में करीब 6 इंच पानी भर गया. मालवीय सुगंधा 156 धान में बालियां निकलनी शुरू ही हुई थीं कि पूरा प्लॉट डूब गया. तेज हवा से गन्ने का पूरा खेत धराशायी हो गया, जबकि उन्होंने फसल को कई बार बांधने की कोशिश की थी. उनका कहना है कि गन्ना लंबे समय तक जमीन पर पड़ा रहा तो गांठों के आसपास फसल फटने का खतरा बढ़ जाएगा.

मिलों की योजना बनाम खेतों का हाल

पश्चिमी यूपी की चीनी मिलें इस बार पेराई सत्र 10 दिन पहले शुरू करने की तैयारी में थीं. बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलों में बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल अक्टूबर के पहले हफ्ते तक पूरे करने की योजना थी, और पेराई 20 अक्टूबर के आसपास शुरू होने की उम्मीद थी. सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह ने खुद कहा है कि तैयारियां मौसम पर निर्भर करेंगी.

प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी यूपी में. किसानों से सर्वेक्षण रिकॉर्ड जांचने और बैंक खाते सक्रिय रखने को कहा गया है. लेकिन खेतों में खड़े पानी के बीच कटाई और ट्रॉली की आवाजाही अभी फंसी है.

गन्ने का रकबा भी घटा है: 28.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 28.40 लाख हेक्टेयर, यानी करीब 47 हजार हेक्टेयर की कमी. बिजनौर, लखीमपुर और पीलीभीत में ये गिरावट दर्ज हुई. किसान इसकी वजह बढ़ती लागत, मजदूरी-सिंचाई खर्च और मिलों से देर से भुगतान बताते हैं.

अब किसान के पास क्या रास्ता है

बारिश थमने के बाद का समय फसल बचाने के लिहाज से सबसे अहम होता है. सबसे पहला काम खेत से पानी निकालना है. निचले हिस्से में नाली बनाकर पानी बाहर निकालें, क्योंकि जड़ों में देर तक पानी ठहरना उपज के लिए सबसे खतरनाक है. गीली मिट्टी में गन्ना काटने की जल्दबाजी न करें, इससे जड़ें खराब होती हैं और पेड़ी की फसल भी बिगड़ती है.

लेटी फसल पर नजर रखें: लंबे समय तक नमी रहने से बीमारी जल्दी फैलती है, इसलिए लाल सड़न या फफूंदी के लक्षण दिखें तो जिला गन्ना अधिकारी या कृषि विभाग से संपर्क करें. नुकसान बड़ा है तो पटवारी को लिखित सूचना दें और फसल बीमा का दावा समय पर दाखिल करें. कई जगह सर्वे खेतों में पानी की वजह से अटका है, इसलिए कागजी काम पहले कर लेना फायदेमंद होगा.

मुख्य बातें

  • बिजनौर में तीन दिन में 225 मिमी बारिश से ढाई लाख हेक्टेयर गन्ना चपेट में, रिकवरी घटने का खतरा
  • अमरोहा में 70% फसल तबाह, ₹9.50 करोड़ मुआवजा प्रस्ताव शासन को भेजा गया
  • 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की योजना मौसम पर टिकी, खेतों में पानी से कटाई फंसी

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया (बिजनौर/मेरठ), दैनिक जागरण (अमरोहा), ईटीवी भारत (लखीमपुर खीरी), किसान तक (अयोध्या)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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