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बिजनौर: बिलाई मिल का बकाया 25 नवंबर तक, किसानों को मिलीं 5 बड़ी राहत

✍️ Aamir Raza · 🗓 03 Nov 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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बिजनौर: बिलाई मिल का बकाया 25 नवंबर तक, किसानों को मिलीं 5 बड़ी राहत

बिजनौर के गन्ना किसानों के लिए 2 नवंबर की बैठक एक ठोस तारीख लेकर आई है। विकास भवन सभागार में अपर जिलाधिकारी अंशिका दीक्षित की अध्यक्षता में हुई वार्ता में बिलाई चीनी मिल का पूरा बकाया 25 नवंबर तक चुकाने पर सहमति बनी। बजाज ग्रुप की मिलों के लिए 5 दिसंबर की तारीख तय हुई। भाकियू जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान के नेतृत्व में किसान नेताओं ने अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखीं।

बिलाई से जुड़े किसान के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि अब इंतजार की कोई खुली मियाद नहीं रही। तारीख तय है, और तारीख के बाद हिसाब मांगा जा सकता है।

बैठक में किसानों के हक में क्या-क्या तय हुआ

सबसे पहला फैसला जबरन स्मार्ट मीटर को लेकर था। अब किसी भी किसान के घर पर जबरदस्ती स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जाएगा।

दूसरा फैसला भुगतान की तारीखों का था। बिलाई चीनी मिल 25 नवंबर तक किसानों का पूरा बकाया चुकाएगी। बजाज ग्रुप की मिलें 5 दिसंबर तक शत-प्रतिशत भुगतान करेंगी। दोनों तारीखें बैठक में साफ-साफ दर्ज हुई हैं, इसलिए किसान अब इन्हीं तारीखों को आधार बनाकर अपने भुगतान का हिसाब रख सकते हैं।

तीसरा फैसला तौल से जुड़ा था। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने घोषणा की कि जिले की सभी शुगर मिलें पेराई शुरू होने के साथ ही किसानों को मौली देंगी। साथ ही, गन्ने के सूख के नाम पर किसानों से कोई कटौती नहीं की जाएगी। सूख का खर्च मिलें खुद उठाएंगी।

चौथा फैसला मुकदमों को लेकर था। नगीना तहसील में किसानों पर दर्ज मुकदमे दीपावली से पहले वापस लिए जाएंगे। वन विभाग की ओर से दर्ज फर्जी मुकदमों पर भी जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया गया। पांचवें मोर्चे पर धान खरीद और सड़क की राहत मिली। जिले के सभी धान क्रय केंद्रों को बिना रुकावट चलाने के निर्देश दिए गए, और गढ़ी गांव के लिए चक्कर रोड से जल्द पक्की सड़क का निर्माण शुरू कराया जाएगा।

बिलाई पर दबाव क्यों बना था

बिलाई मिल का मामला अचानक नहीं उभरा। अमर उजाला की 31 अक्टूबर की खबर के मुताबिक मिल पर करीब 26 करोड़ रुपये का बकाया था और उससे 31,752 किसान जुड़े हुए हैं। इनमें से करीब 20 हजार किसान शपथपत्र देकर कह चुके थे कि जब तक पुराना भुगतान नहीं मिलता, वे मिल को गन्ना नहीं देंगे। इसके बावजूद आरक्षण के दौरान मिल के केवल तीन क्रय केंद्र ही काटे गए थे।

द मूकनायक की 3 नवंबर की खबर में भी यही तस्वीर सामने आई। उसके मुताबिक जिले की कुल 10 चीनी मिलों में से नौ ने पिछले सीजन का पूरा भुगतान कर दिया है। सिर्फ बिलाई मिल ही ऐसी बची थी, जिस पर किसानों का बकाया लंबित था। इसी पृष्ठभूमि में भाकियू (अराजनीतिक) ने ‘भुगतान नहीं तो गन्ना नहीं’ का नारा दिया था। 21 अक्टूबर को बिजनौर के नुमाइश ग्राउंड में हुई महापंचायत के बाद से ही यह मुद्दा लगातार गरम था, और 2 नवंबर की बैठक उसी सिलसिले की अगली कड़ी मानी जा रही है।

बिलाई प्रबंधन का अलग लिखित आश्वासन

2 नवंबर की बैठक से अलग, बिलाई मिल प्रबंधन ने जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय में हुई वार्ता में भी लिखित आश्वासन दिया है। इस वार्ता में मिल के यूनिट हेड भूपेंद्र सिंह और महाप्रबंधक (गन्ना) सुभाष तोमर मौजूद रहे। आश्वासन के मुताबिक दीपावली से पहले डायवर्जन के 10 करोड़ रुपये और बची हुई चीनी के मूल्य के करीब 4 करोड़ रुपये, कुल 14 करोड़ रुपये, किसानों के बकाये में जारी किए जाएंगे।

इसके बाद मिल चलने के समय करीब 12 करोड़ रुपये का बकाया शेष रहेगा, जिसका भुगतान मिल संचालन शुरू होने की तारीख से 10 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा। नए सत्र का भुगतान भी मिल चलने के 20 से 25 दिनों के भीतर शुरू हो जाएगा। प्रबंधन ने यह भी लिखित में कहा है कि नए सत्र की चीनी से नए सत्र के गन्ने का ही भुगतान किया जाएगा, इस राशि का डायवर्जन नहीं होगा। भाकियू (अराजनीतिक) के प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह के मुताबिक यह व्यवस्था पिछले 13 वर्षों में पहली बार बदल रही है।

अब किसान क्या करें

पहला काम पर्चियों का हिसाब दुरुस्त रखना है। पिछले सत्र की तौल पर्ची, भुगतान की रसीद और बैंक खाते का ब्योरा एक जगह संभालकर रखें, ताकि 25 नवंबर के बाद किसी भी कमी पर तुरंत सवाल उठाया जा सके। किस्त आते ही खाते में मिलान कर लें, और गड़बड़ी दिखे तो समिति या जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय तक बात पहुंचाएं।

स्मार्ट मीटर को लेकर भी अब स्थिति साफ है। अगर किसी गांव में जबरन मीटर लगाने की कोशिश हो तो किसान बैठक में हुए फैसले का हवाला दे सकते हैं। इसी तरह तौल के समय सूख के नाम पर कटौती हो तो उसका विरोध करने का आधार भी अब बैठक के फैसले में मौजूद है। मगर तारीख तय होना ही आखिरी जीत नहीं है। असली परीक्षा 25 नवंबर और 5 दिसंबर को होगी, जब भुगतान खातों में दिखना चाहिए।

मुख्य बातें

  • बिलाई चीनी मिल का पूरा बकाया 25 नवंबर तक और बजाज ग्रुप की मिलों का भुगतान 5 दिसंबर तक कराने पर सहमति बनी।
  • किसी किसान के घर पर जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जाएगा, और गन्ने के सूख के नाम पर कोई कटौती नहीं होगी।
  • बिलाई प्रबंधन ने दीपावली से पहले 14 करोड़ रुपये देने और मिल चलने के 10 दिन में शेष बकाया चुकाने का लिखित आश्वासन भी दिया है।

स्रोत: अमर उजाला (3 नवंबर 2026), टारगेट टीवी लाइव (2 नवंबर 2026), द मूकनायक (3 नवंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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