पेराई से पहले ही ₹1,605 करोड़ का बंदोबस्त: बिजनौर के गन्ना किसानों की जेब कब भरेगी

गन्ना किसान की सबसे बड़ी चिंता पर्ची नहीं होती, भुगतान होता है। पर्ची तो कट जाएगी, पर पैसा कब आएगा? यह सवाल हर पेराई सत्र की शुरुआत में गन्ना बेल्ट में घूमता है। बिजनौर से आई ताजा खबर इस सवाल का भरोसेमंद जवाब लेकर आई है। जिले की चीनी मिलों ने गन्ना पेराई शुरू होने से पहले ही बैंकों से 1,605 करोड़ रुपये का कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) मांग लिया है। कई मिलों का लोन मंजूर भी हो चुका है। (दैनिक जागरण, 19 अक्टूबर 2026)
पैसा कब मिलेगा? सीधा जवाब
द्वारिकेष शुगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के सीनियर एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट (कॉरपोरेट) सलिल आर्य ने कहा है कि सीसीएल से मिलने वाले पैसों से किसानों का भुगतान किया जाता है, और पेराई शुरू होते ही भुगतान शुरू कर दिया जाएगा। जिले में इस वर्ष करीब 10.26 करोड़ क्विंटल गन्ना पैदावार का अनुमान है, और लोन इसी अनुमान पर आधारित है। (दैनिक जागरण, 19 अक्टूबर 2026)
मिल बैंक से कर्ज लेकर भुगतान क्यों करती है
मिल एक साथ सारी चीनी बेच नहीं सकती और न ही उसका पूरा पैसा एक साथ मिल के पास आता है। इसलिए मिल चीनी को बैंक में गिरवी रखकर कैश क्रेडिट लिमिट लेती है, उससे किसानों का समय पर भुगतान करती है और बाद में चीनी बेचकर कर्ज चुकाती रहती है। लोन की रकम अनुमानित चीनी उत्पादन और मौजूदा दामों पर तय होती है। (दैनिक जागरण, 19 अक्टूबर 2026)
किस मिल ने कितना मांगा: पूरा हिसाब
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक मिलवार ब्योरा इस प्रकार है (करोड़ रुपये में):
- चांगीपुर मिल: 330
- धामपुर मिल: 250
- बरकातपुर मिल: 250
- स्योहारा मिल: 225
- बहादरपुर मिल: 150
- बुंदकी मिल: 150
- बिजनौर मिल: 125
- चांदपुर मिल: 125
- बिलाई मिल: 0
- नजीबाबाद मिल: 0
योग: 1,605 करोड़ रुपये। चांगीपुर मिल मरम्मत के काम में भी सबसे आगे रही है, वहां मशीनों की मरम्मत का काम करीब 90 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। (दैनिक जागरण, 19 अक्टूबर और 20 सितंबर 2026)
पेराई में देरी: बारिश ने बदला गणित
अच्छी खबर के साथ एक चुनौती भी जुड़ी है। सितंबर के बाद अक्टूबर में भी जारी बरसात ने चीनी मिलों की पेराई को पीछे धकेल दिया है। आधी अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी कर रहीं मिलें अब नवंबर में जाकर चलेंगी। बारिश से गन्ने में नमी बढ़ गई है, जिससे चीनी की रिकवरी घटने की आशंका है। (दैनिक जागरण, 19 अक्टूबर 2026)
राहत की बात यह है कि पावर कोल्हुओं में काम जारी है। जो किसान कोल्हुओं में गन्ना ला रहे हैं, उन्हें नगद भुगतान मिल रहा है। (दैनिक जागरण, 19 अक्टूबर 2026)
बिलाई मिल: इस तैयारी का एकमात्र अपवाद
इस पूरी तैयारी के बीच बिलाई चीनी मिल अपवाद है। इसे बैंकों से सीसीएल नहीं मिलता, इसलिए इसके किसानों को भुगतान समय पर तो क्या, महीनों बाद तक नहीं मिल पाता। पिछले पेराई सत्र का भुगतान किसानों को अब तक नहीं मिला है और अभी भी करीब 27 करोड़ रुपये का बकाया है। (दैनिक जागरण, 19 अक्टूबर 2026)
यही वजह है कि 14 अक्टूबर को जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने मिल प्रबंधकों के साथ बैठक में बिलाई मिल प्रबंधन को बकाया जल्द चुकाने के सख्त निर्देश दिए और कार्रवाई की चेतावनी दी। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि बिलाई को छोड़कर जिले की बाकी सभी मिलों ने पिछले सत्र का पूरा भुगतान कर दिया है। (अमर उजाला, 14 अक्टूबर 2026)
सहकारी क्षेत्र की नजीबाबाद चीनी मिल अब सीसीएल नहीं लेती। सरकार सीधे इसके भुगतान में सहयोग करती है और समीक्षा में यह मिल लाभ की स्थिति में पाई गई। (अमर उजाला, 14 अक्टूबर 2026)
किसान के लिए तीन जरूरी बातें
1. पर्ची और बैंक खाता अभी से दुरुस्त कर लें। भुगतान पेराई शुरू होते ही आएगा, पर देरी की सबसे आम वजह अधूरा सर्वे रिकॉर्ड या निष्क्रिय बैंक खाता होती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में भी प्रशासन ने किसानों को बैंक खाता सक्रिय रखने की सलाह दी है। (टाइम्स ऑफ इंडिया, 28 सितंबर 2026)
2. बिलाई मिल क्षेत्र के किसान सतर्क रहें। अगर आपका गन्ना बिलाई मिल को जाता है और बकाया अटका है, तो जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। डीएम की चेतावनी के बाद प्रशासन की नजर इस मिल पर है।
3. कानून आपके साथ है। गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर भुगतान का नियम है और देरी पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 को इन सुरक्षा उपायों को अनिवार्य बताया था। (टाइम्स ऑफ इंडिया, 9 अक्टूबर 2026)
उप्र में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी उप्र में हैं। बिजनौर में करीब 2.57 लाख हेक्टेयर में गन्ना है और इस वर्ष दस करोड़ क्विंटल से अधिक पेराई का लक्ष्य है। (टाइम्स ऑफ इंडिया, 28 सितंबर; दैनिक जागरण, 20 सितंबर 2026)
मुख्य बातें
- बिजनौर की 8 चीनी मिलों ने 1,605 करोड़ रुपये का कैश क्रेडिट लिमिट मांगा, कई मिलों का मंजूर भी हो गया। पेराई शुरू होते ही किसानों का भुगतान शुरू हो जाएगा। (दैनिक जागरण, 19 अक्टूबर 2026)
- बारिश के कारण पेराई नवंबर में खिसक गई है और रिकवरी घटने की आशंका है, लेकिन पावर कोल्हुओं में नगद भुगतान जारी है। (दैनिक जागरण, 19 अक्टूबर 2026)
- बिलाई मिल पर करीब 27 करोड़ का बकाया है, डीएम ने कार्रवाई की चेतावनी दी है। नजीबाबाद सहकारी मिल लाभ में चल रही है। (अमर उजाला, 14 अक्टूबर 2026)
स्रोत: दैनिक जागरण (19 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (14 अक्टूबर 2026), टाइम्स ऑफ इंडिया (9 अक्टूबर 2026)
