बेलरायां मिल: 28 करोड़ मुनाफे के बाद 15 नवंबर से पेराई, 70 लाख क्विंटल लक्ष्य

पिछले वित्तीय वर्ष में जिस मिल ने 28 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया, उस मिल से किसानों की उम्मीद स्वाभाविक रूप से ज्यादा होती है। पैसा है, तो भुगतान में देरी का बहाना भी नहीं चलना चाहिए। लखीमपुर खीरी की सरजू सहकारी चीनी मिल बेलरायां की वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक में यही बात खुलकर सामने आई। मिल प्रबंधन ने घोषणा की कि आगामी पेराई सत्र 15 नवंबर 2026 से शुरू होगा और 8 अप्रैल 2027 तक चलेगा। 144 दिनों के इस सत्र में 70 लाख क्विंटल गन्ना पेरने का लक्ष्य तय किया गया है। 11 प्रतिशत रिकवरी के अनुमान के आधार पर करीब 7.70 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन का लक्ष्य भी प्रस्तावित हुआ है। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी और मिल अध्यक्ष अंजनी कुमार सिंह ने की।
मुनाफे वाली मिल की यह घोषणा इसलिए भी अहम है क्योंकि सहकारी मिलों को लेकर किसानों की आम शिकायत यही रहती है कि सत्र तो समय पर शुरू होता है, लेकिन भुगतान अटक जाता है। बेलरायां के मामले में मिल की वित्तीय स्थिति अच्छी बताई गई है, और अब प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस बार भुगतान में विलंब बर्दाश्त नहीं होगा।
15 अक्टूबर तक मरम्मत, फिर 15 दिन का ट्रायल
बैठक के बाद जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने निघासन विधायक के साथ मिल का निरीक्षण किया। उन्होंने मिल हाउस, पावर हाउस समेत विभिन्न इकाइयों में चल रहे मरम्मत और रखरखाव के कामों का जायजा लिया। DM ने निर्देश दिया कि 15 अक्टूबर तक सभी मरम्मत कार्य पूरे करा लिए जाएं। इसके बाद मशीनरी का 15 दिन तक ट्रायल रन कराकर उसकी कार्यक्षमता परखी जाए, ताकि पेराई सत्र शुरू होने पर किसी तरह की तकनीकी दिक्कत न आए।
यह निर्देश किसानों के लिए सीधी राहत वाली बात है। पिछले कई सत्रों का अनुभव रहा है कि बीच में मशीनरी खराब होने पर पेराई रुक जाती है, क्रय केंद्रों पर गन्ना खड़ा रहता है और किसानों की पर्चियां लंबित हो जाती हैं। पहले से ट्रायल रन कराने का मतलब है कि सत्र के बीच में आने वाली ऐसी दिक्कतें कम से कम होंगी। निरीक्षण के दौरान जिला गन्ना अधिकारी जितेंद्र कुमार मिश्र समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
भुगतान में देरी पर सख्त रुख
विधायक शशांक वर्मा ने बैठक में पेराई सत्र समय से शुरू कराने के साथ किसानों को गन्ने का भुगतान निर्धारित समय पर किए जाने की जरूरत बताई। उन्होंने किसानों को समय पर गन्ने का बीज उपलब्ध कराने और पेराई के दौरान उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने पर जोर दिया।
जिलाधिकारी ने मिल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसानों के भुगतान में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए और निर्धारित समय के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाए। किसानों के लिहाज से यह सबसे बड़ा आश्वासन है। जो मिल 28 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमा रही है, वहां भुगतान की देरी को किसान अब आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे।
32 खरीद केंद्र सुरक्षित, पड़ोसी मिलों के केंद्रों का प्रस्ताव भी
बैठक में मिल गेट के साथ 32 गन्ना खरीद केंद्र सुरक्षित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके अलावा पलिया चीनी मिल से जुड़े सात, गुलरिया चीनी मिल के 18 और ऐरा चीनी मिल के नौ गन्ना खरीद केंद्रों के प्रस्ताव भी बैठक में रखे गए। इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा जिन्हें अब तक गन्ना पहुंचाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। नजदीकी क्रय केंद्र का मतलब है कम ढुलाई लागत और तौल में देरी की कम संभावना।
आधुनिकीकरण और उर्वरक गोदामों पर भी चर्चा
मिल के आधुनिकीकरण को लेकर भी अहम प्रस्ताव सामने आए। मिल के पुराने बॉयलरों को हटाकर नए बड़े बॉयलर और नई टरबाइन लगाने तथा प्रदूषण नियंत्रण के निर्धारित मानकों के अनुरूप वेट स्क्रबर स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। साथ ही लखहा, तिकुनियां, निघासन और गजियापुर में चार नए उर्वरक गोदामों के निर्माण और चार गोदामों की मरम्मत का प्रस्ताव भी रखा गया। किसान इन गोदामों से सीधे उर्वरक ले सकेंगे, जिससे बीच के दलालों पर निर्भरता घटेगी।
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
बेलरायां क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए तस्वीर साफ है। पेराई की तारीख तय है, लक्ष्य बड़ा है और मिल मुनाफे में है। जो काम अब किसान को करना है, वह है अपनी फसल को 15 नवंबर तक मिल तक पहुंचाने की स्थिति में रखना। जिन किसानों का गन्ना क्रय केंद्रों के माध्यम से जाएगा, उन्हें अपनी पर्ची और सट्टे से जुड़े कागजात पहले से दुरुस्त रखना चाहिए। मिल ने बीज की समय पर उपलब्धता का भी वादा किया है, तो जो किसान अगली बुवाई की योजना बना रहे हैं, वे मिल से संपर्क में रहें। बैठक में मिल के डायरेक्टर मनोज पांडे, उपाध्यक्ष सुच्चा सिंह और प्रबंध निदेशक राजेश कुमार भी मौजूद रहे।
मुख्य बातें
- सरजू सहकारी चीनी मिल बेलरायां में 15 नवंबर 2026 से 8 अप्रैल 2027 तक 144 दिन का पेराई सत्र चलेगा; 70 लाख क्विंटल गन्ना पेरने और 7.70 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन का लक्ष्य है।
- सभी मरम्मत कार्य 15 अक्टूबर तक पूरे होंगे, फिर 15 दिन का ट्रायल रन होगा ताकि सत्र के बीच मशीनरी की दिक्कत न आए।
- मिल ने पिछले वित्तीय वर्ष में 28 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया; DM अंजनी कुमार सिंह ने भुगतान में किसी भी स्तर पर देरी न करने के निर्देश दिए हैं।
स्रोत: हिंदुस्तान (लाइव हिंदुस्तान, लखीमपुर खीरी), चिनीमंडी
