बेलगावी: CM बोले, गन्ना संकट की 90% ज़िम्मेदारी केंद्र की, 27 अक्टूबर बंद पर फैसला बाकी

बेलगावी में सोमवार सुबह मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वह बात कह दी जो पिछले कई दिनों से किसान संगठनों और मिल मालिकों के बीच घूम रही थी। उन्होंने कहा कि गन्ना भाव के इस झगड़े में 90 प्रतिशत ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है और राज्य की हिस्सेदारी सिर्फ 10 प्रतिशत है। किसानों की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है, और कोई भी फैसला सबकी बात सुनने के बाद ही होगा।
यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि इसी बात पर 27 अक्टूबर को कर्नाटक बंद की चेतावनी टिकी है। किसान नेता कह चुके हैं कि सोमवार की बैठकों में मांगें नहीं मानी गईं तो मंगलवार को राज्यव्यापी बंद होगा। दोपहर तक अंतिम फैसले की खबर सामने नहीं आई थी। यानी बंद की तलवार अभी लटकी हुई है।
सोमवार को बेलगावी में क्या हुआ
सोमवार को सुबह 11 बजे सुवर्ण विधान सौध में मिल मालिकों से बातचीत रखी गई थी। इसके बाद दोपहर में विकास कार्यों की आधारशिला रखने का कार्यक्रम था और फिर 3:30 बजे किसान प्रतिनिधियों से अलग से मुलाकात होनी थी।
बैठकों से पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि वह मिल मालिकों की तकलीफ भी सुनेंगे, क्योंकि आखिर में पैसा मिलों को ही देना है। रविवार को मुदलगी तालुका के गुरलापुर में किसानों ने राज्य राजमार्ग पर जाम लगाकर विरोध जताया था।
90 प्रतिशत वाला हिसाब क्या है
मुख्यमंत्री के बयान के पीछे सीधा तर्क है। गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी केंद्र सरकार तय करती है। चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य भी केंद्र के हाथ में है। एथेनॉल की खरीद नीति भी केंद्रीय स्तर पर बनती है। राज्य सरकार अपने स्तर पर सिर्फ अतिरिक्त सहायता दे सकती है।
इसी वजह से मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र को भी भरोसे में लेना होगा। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी को बैठक में आना था, लेकिन वह किसी और काम के चलते नहीं आ सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि जोशी ने कहा है कि राज्य सरकार पहले अपनी बातचीत कर ले, फिर केंद्रीय स्तर पर अलग से बैठक होगी।
यहां एक पुराना वादा भी चर्चा में आया। मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले मिलों को 250 रुपये प्रति टन अतिरिक्त देने के लिए मनाया गया था और राज्य की ओर से 50 रुपये प्रति टन दिए जाने थे, लेकिन कुछ मिलों ने तय रकम किसानों को नहीं दी।
किसानों की मांगें क्या हैं
किसान संगठनों की मांगों का हिसाब साफ है। वह गन्ने का भाव 5500 रुपये प्रति टन चाहते हैं। साथ में 1000 रुपये प्रति टन की राज्य सहायता और तौल व्यवस्था सुधारने के लिए 500 करोड़ रुपये की अलग राशि की मांग है। चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो करने की मांग भी है।
अंकों का फर्क समझना ज़रूरी है। केंद्र ने 2026-27 सत्र के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर आधारित है। टन के हिसाब से यह 3650 रुपये प्रति टन बैठता है। किसानों की मांग और एफआरपी के बीच करीब 1850 रुपये प्रति टन का फर्क है। किसान कहते हैं कि खाद, मजदूरी, सिंचाई, कटाई और ढुलाई की लागत इतनी बढ़ गई है कि मौजूदा भाव से लागत भी पूरी नहीं निकलती।
मिल मालिकों का कहना है कि जब तक चीनी की बिक्री कीमत और एथेनॉल खरीद की स्थिति नहीं सुधरती, ज्यादा भाव देना मुश्किल है।
उत्तर प्रदेश के किसान के लिए इसका मतलब
यूपी के किसान को यह दूर की खबर लग सकती है, लेकिन इसका असर सीधा है। एफआरपी पूरे देश का केंद्रीय मूल्य है। केंद्र में भाव, चीनी के न्यूनतम मूल्य और एथेनॉल नीति पर जो फैसला होगा, उसका असर यूपी की भाव बहस पर भी पड़ेगा।
यूपी में 2025-26 सत्र का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) था। पेराई सत्र 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। राज्य में 122 चीनी मिलें हैं और किसान संगठन यहां भी 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग उठा चुके हैं।
उत्तर कर्नाटक में पेराई अब तक शुरू नहीं हो पाई है। यूपी के किसानों के लिए सबक साफ है। भाव की लड़ाई लंबी चल सकती है, लेकिन इस बीच पर्ची, तौल और भुगतान का रिकॉर्ड दुरुस्त रखना ही किसान के हाथ में है। तौल पर्ची संभालकर रखें, एसएमएस पर आई पर्ची का मिलान करें और भुगतान में देरी हो तो समिति के माध्यम से लिखित शिकायत करें। गन्ना विभाग का टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 भी काम आ सकता है।
आगे क्या होगा
सबसे बड़ा सवाल अब भी 27 अक्टूबर के बंद पर टिका है। कर्नाटक राज्य रैयत संघ के नेता चुनप्पा पुजेरी कह चुके हैं कि सोमवार की बैठकों में मांगें नहीं मानी गईं तो मंगलवार को कर्नाटक बंद होगा। मुख्यमंत्री की ओर से अभी तक बंद टालने या मांगें मानने का ठोस ऐलान सामने नहीं आया है। केंद्र की समिति की सिफारिशों में समय लगेगा, जबकि खेत में खड़ा गन्ना इंतजार नहीं करेगा।
मुख्य बातें
- बेलगावी में CM डीके शिवकुमार ने कहा कि गन्ना भाव के मसले में 90 प्रतिशत ज़िम्मेदारी केंद्र की है, राज्य की सिर्फ 10 प्रतिशत।
- किसानों की मांग 5500 रुपये प्रति टन भाव, 1000 रुपये प्रति टन सहायता और 500 करोड़ रुपये की तौल सुधार राशि की है, जबकि एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल है।
- 27 अक्टूबर के कर्नाटक बंद पर अंतिम फैसला अभी बाकी है, और यूपी में 2026-27 के एसएपी की घोषणा भी अभी नहीं हुई है।
स्रोत: द डेली पायनियर (पीटीआई), द हिंदू, आईएएनएस, बिजनेस स्टैंडर्ड
