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किसानों के 112 करोड़ दबाने वाली बरखेड़ा मिल की संपत्ति कुर्क, नीलामी से होगी वसूली

✍️ Aamir Raza · 🗓 16 Oct 2026 · ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

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किसानों के 112 करोड़ दबाने वाली बरखेड़ा मिल की संपत्ति कुर्क, नीलामी से होगी वसूली

पिछले सीजन आपने बरखेड़ा चीनी मिल को गन्ना दिया था? तो एक सीधा सवाल खुद से पूछिए: उसका पूरा पैसा आपके खाते में आया क्या? अगर जवाब ना है, तो आप अकेले नहीं हैं। पीलीभीत जिले की इस मिल पर गन्ना किसानों का 112 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बकाया है। महीनों की शिकायतों और हाईकोर्ट के सवाल के बाद अब जिला प्रशासन ने वह रास्ता अपनाया है, जिससे मिल मालिक सबसे ज्यादा घबराते हैं। तहसील प्रशासन ने मिल की अचल संपत्ति चिह्नित करके कुर्की की प्रक्रिया शुरू करा दी है।

मतलब सीधा है। तय समय में पैसा नहीं चुकाया तो कुर्क की गई संपत्ति नीलाम होगी और उसी रकम से किसानों का बकाया वसूला जाएगा। पेराई सत्र 2026-27 सिर पर है और किसान नए सीजन की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे में पुराना बकाया मिलना उनके लिए बड़ी राहत होगा। लंबे इंतजार के बाद किसानों को पहली बार लग रहा है कि इस बार बात सिर्फ आश्वासन तक नहीं रुकेगी।

हाईकोर्ट के सवाल के बाद हिला प्रशासन

यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। पिछले दिनों गन्ना किसानों ने अपनी मांगों को जिला प्रशासन के सामने रखा था। तब प्रशासन ने भुगतान कराने का भरोसा दिया था, लेकिन महीनों बीतने के बाद भी पूरी रकम किसानों के खातों में नहीं पहुंची। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने जिला प्रशासन से अब तक के गन्ना भुगतान की प्रक्रिया के बारे में अपडेट रिपोर्ट मांगी।

रिपोर्ट मांगे जाने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर बीसलपुर के एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने बरखेड़ा की इस निजी क्षेत्र की चीनी मिल पर शिकंजा कस दिया। उन्होंने तहसील की राजस्व टीमों को मिल की अचल संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम का कहना है कि किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। राजस्व टीमें प्रक्रिया पूरी करके अपनी रिपोर्ट देंगी और जिला प्रशासन उसे हाईकोर्ट को भेजेगा।

मिल प्रबंधन बोला: हमें तो जानकारी ही नहीं

इस पूरी कार्रवाई का सबसे हैरान करने वाला पहलू मिल प्रबंधन का रुख है। एक तरफ प्रशासन मिल की संपत्ति चिह्नित करके कुर्की की तैयारी में है, दूसरी तरफ बजाज चीनी मिल के जनसंपर्क अधिकारी सतीश श्रीवास्तव का कहना है कि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी ही नहीं है।

किसान इसे बेपरवाही मान रहे हैं। उनका कहना है कि जिस मिल को उनके 112 करोड़ रुपये चुकाने हैं, उसे कुर्की जैसी बड़ी कार्रवाई की खबर तक नहीं है, तो भुगतान की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। यही रवैया अब तक भुगतान में देरी की सबसे बड़ी वजह रहा है।

कुर्की से नीलामी तक: आगे क्या होगा

प्रशासन ने साफ किया है कि कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से होगी। पहले मिल की अचल संपत्ति को चिह्नित किया जा रहा है, यानी कौन सी जमीन, भवन या स्थायी संपत्ति कुर्की के दायरे में आएगी, यह तय किया जा रहा है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत इन संपत्तियों को कुर्क किया जाएगा।

एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने बताया कि तय समय में बकाया रकम जमा नहीं की गई तो कुर्क संपत्तियों की नीलामी कराकर लंबित भुगतान कराया जाएगा। सीधी भाषा में कहें तो अगर मिल प्रबंधन ने 112 करोड़ से अधिक का बकाया नहीं चुकाया, तो उसकी संपत्ति बेचकर किसानों को पैसा दिया जाएगा। प्रशासन की इस सख्ती से बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे किसानों में उम्मीद जगी है।

किसान के लिए इसका सीधा मतलब

उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति और क्रय विनियमन) अधिनियम के तहत चीनी मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर किसानों का भुगतान करना होता है। देरी पर ब्याज का प्रावधान भी है। बरखेड़ा मिल का मामला इस नियम की सबसे बड़ी अवहेलना का उदाहरण बन गया है, जहां भुगतान महीनों से अटका है।

जिन किसानों का बकाया है, उनके लिए यह समय सतर्क रहने का है। अपनी पर्चियों और तौल के रिकॉर्ड संभालकर रखें। ई-गन्ना पोर्टल पर अपने भुगतान की स्थिति देखते रहें। कुर्की की प्रक्रिया शुरू होने का मतलब यह है कि अब प्रशासन के पास कोर्ट को जवाब देना है, और यही दबाव किसानों के हक में काम करेगा। नए सीजन का सट्टा कराते समय भी पुराने बकाये का हिसाब लिखित में मांगना न भूलें।

मुख्य बातें

  • पीलीभीत की बरखेड़ा चीनी मिल पर गन्ना किसानों के 112 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बकाया है।
  • हाईकोर्ट द्वारा अपडेट रिपोर्ट मांगे जाने के बाद बीसलपुर एसडीएम ने मिल की अचल संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू करा दी है।
  • तय समय में भुगतान न होने पर कुर्क संपत्ति की नीलामी करके किसानों का बकाया वसूला जाएगा।

स्रोत: अमर उजाला (15 अक्टूबर 2026), लाइव हिंदुस्तान, शारदा एक्सप्रेस

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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