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रिकवरी 8.44% से गिरकर 8.01% हुई, त्रिवेणी बोली पेराई रुकेगी, नवंबर में चीनी पर क्या असर?

✍️ Aamir Raza · 🗓 05 Nov 2026 · ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

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रिकवरी 8.44% से गिरकर 8.01% हुई, त्रिवेणी बोली पेराई रुकेगी, नवंबर में चीनी पर क्या असर?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मिलों ने 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी कर ली थी। ट्रैक्टर-ट्रॉली तैयार थी, खेत में गन्ना खड़ा था। फिर अक्टूबर के आखिर में बारिश आ गई। खेतों में पानी भर गया, कटाई रुक गई और मिलों ने भीगा गन्ना लेने से हाथ खींच लिए। अब किसान के सामने एक ही सवाल है। मिल पेराई कब शुरू करेगी, और भीगा गन्ना तब तक खेत में क्या करेगा?

8.01% का आंकड़ा: रिकवरी गिरी तो किसका नुकसान

31 अक्टूबर तक के आंकड़े बताते हैं कि बारिश का असर सिर्फ यूपी तक नहीं रहा। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (एनएफसीएसएफ) के मुताबिक देश भर में 152 मिलों में पेराई शुरू हो चुकी थी। इन मिलों ने 105.43 लाख टन गन्ना पीसा और 8.45 लाख टन चीनी बनाई। लेकिन औसत रिकवरी 8.01 फीसदी रही, जबकि पिछले साल इसी समय यह 8.44 फीसदी थी। यानी हर 100 किलो गन्ने से इस बार करीब आधा किलो चीनी कम निकली।

महाराष्ट्र में हालात सबसे ज्यादा दिखे। वहां 123 मिलें चल रही थीं, जिन्होंने 91.14 लाख टन गन्ना पीसकर 7.20 लाख टन चीनी बनाई। मगर रिकवरी सिर्फ 7.90 फीसदी रही। कर्नाटक में 7 मिलों ने 8.33 लाख टन गन्ना पीसा और रिकवरी 9.60 फीसदी दर्ज की, जो बड़े राज्यों में सबसे ऊंची रही। उत्तर प्रदेश में 31 अक्टूबर तक सिर्फ तीन मिलें ही चल पाई थीं, जबकि पिछले साल इसी तारीख तक 10 मिलें पेराई कर रही थीं।

रिकवरी का सीधा जुड़ाव किसान की जेब से है। केंद्र ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 फीसदी की बुनियादी रिकवरी पर आधारित है। रिकवरी 10.25 फीसदी से हर 0.1 फीसदी ऊपर जाने पर किसान को 3.56 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम मिलता है। उल्टा भी उतना ही सच है। रिकवरी गिरे तो मिल की कमाई घटती है, और भुगतान में देरी का खतरा बढ़ता है।

त्रिवेणी ने क्या कहा: पेराई टालना ही समझदारी

देश की दूसरी सबसे बड़ी चीनी उत्पादक कंपनी त्रिवेणी इंजीनियरिंग ने इसीलिए पेराई टालने की बात कही है। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ध्रुव एम. साहनी ने कहा कि अक्टूबर के आखिर में हुई भारी बारिश और आंधी-तूफान के बाद खेतों की हालत का बारीकी से आकलन जरूरी है। उनके मुताबिक पेराई शुरू करने में देरी ही सबसे संभावित असर होगा, ताकि बारिश से पतले हुए गन्ने के रस का नुकसान कम से कम हो।

पिछले पेराई सत्र में त्रिवेणी की रिकवरी 11.06 फीसदी रही थी, जो उससे पिछले साल के 10.80 फीसदी से बेहतर थी। कंपनी इस सत्र में ज्यादा गन्ना पीसना चाहती है, पर रिकवरी का नुकसान उठाकर नहीं। कंपनी के उपाध्यक्ष तरुण साहनी ने अक्टूबर की शुरुआत में ही कहा था कि यूपी में हाल की भारी बारिश का गन्ने की परिपक्वता और रिकवरी पर बुरा असर पड़ेगा।

नवंबर में चीनी का गणित: मांग 23 लाख टन, स्टॉक 15 लाख टन

नवंबर में चीनी की मांग करीब 23 लाख टन आंकी गई है, जबकि अक्टूबर के अंत में बचा स्टॉक सिर्फ 15 लाख टन के आसपास है। इस कमी को पूरा करने का दबाव महाराष्ट्र की मिलों पर है। 26 अक्टूबर तक देश में 107 मिलें पेराई शुरू कर चुकी थीं, जिनमें महाराष्ट्र की 87 मिलें शामिल थीं। इन मिलों ने करीब 4 लाख टन चीनी बनाई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में सिर्फ 0.6 लाख टन चीनी बनी थी।

सरकार ने भी तैयारी की है। चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए डीलरों और बड़े उपभोक्ताओं पर स्टॉक रखने की सीमा लगाई गई है। साथ ही टैरिफ रेट कोटा के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की इजाजत दी गई है, जिसकी आखिरी तारीख 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी गई है।

किसान के लिए इसका मतलब: भीगा गन्ना सस्ते में मत बेचो

किसान के लिए इस खबर का सीधा मतलब यह है कि जल्दबाजी में भीगा गन्ना बेचना घाटे का सौदा हो सकता है। गीले गन्ने में चीनी कम निकलती है, इसलिए मिलें उसे लेने में आनाकानी करती हैं और कोल्हू पर भाव भी नीचे चला जाता है। कटाई से पहले खेत का पानी सूखने दें। अगर मिल ने इंडेंट जारी कर दिया है तो पर्ची और तौल की तारीख का इंतजार करें।

2026-27 सत्र के गन्ना मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। किसान संगठन इस बार बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। एसएपी की घोषणा पर नजर रखें, क्योंकि पेराई की रफ्तार और भुगतान, दोनों इससे जुड़े हैं।

मुख्य बातें

  • देश में औसत रिकवरी 8.44% से गिरकर 8.01% हुई; यूपी में 31 अक्टूबर तक सिर्फ 3 मिलें चलीं, पिछले साल 10 थीं।
  • त्रिवेणी ने कहा कि बारिश से गन्ने का रस पतला हुआ है, इसलिए पेराई में देरी ही समझदारी है।
  • नवंबर में चीनी की मांग 23 लाख टन के मुकाबले स्टॉक 15 लाख टन है; सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की मंजूरी दी है।

स्रोत: द हिंदू बिजनेसलाइन (27 अक्टूबर और 4 नवंबर 2026), रूरल वॉयस (2 नवंबर 2026), बिज़नेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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