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₹162 करोड़ बकाया, 2000 किसान धरने पर: बहेड़ी केसर मिल पर हाईवे जाम की चेतावनी

✍️ Aamir Raza · 🗓 31 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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₹162 करोड़ बकाया, 2000 किसान धरने पर: बहेड़ी केसर मिल पर हाईवे जाम की चेतावनी

शुक्रवार सुबह 11 बजे बहेड़ी का गन्ना समिति परिसर किसानों से भर गया। करीब 2000 किसान एक साथ धरने पर बैठ गए। मांग एक ही थी, केसर चीनी मिल पर अटका गन्ना मूल्य जल्द मिले। संयुक्त पीड़ित किसान के बैनर तले जुटे किसानों ने गन्ना विभाग पर धोखाधड़ी का आरोप भी लगाया।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक केसर मिल पर किसानों का करीब ₹162 करोड़ बकाया है। धरने में शामिल किसान नेताओं का कहना है कि इतनी बड़ी रकम अटकने से क्षेत्र के करीब 75 हजार किसानों का उत्पीड़न हो रहा है।

धरने में कौन-कौन, क्या कहा

धरने की अगुवाई कर रहे विजेंद्र सिंह और इकबाल चीमा ने कहा कि लंबे समय से भुगतान न मिलने के कारण किसान परेशान हैं। गन्ना समिति के अध्यक्ष राजेंद्र गंगवार ने आरोप लगाया कि केसर चीनी मिल की नीयत ठीक नहीं है, इसलिए उसके खरीद केंद्र दूसरी चीनी मिलों को आवंटित कर दिए गए हैं। राजा भाटी, डांडिया फार्म के चौधरी विनीत सिंह एडवोकेट और किसान नेता रवि ढाका ने भी धरने में आक्रोश जताया।

खबर मिलते ही जिला गन्ना अधिकारी दिलीप कुमार, एसडीएम गोपाल शर्मा और सीओ अरुण कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों से बात की। जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि जिलाधिकारी अविनाश कुमार सिंह ने बुधवार को बैठक करके नीलामी की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि दिवाली से पहले मिल की मुड़िया मुकर्रमपुर स्थित जमीन की नीलामी करवाकर किसानों का भुगतान करा दिया जाएगा।

150 किलोमीटर दूर केंद्र, किराया कौन देगा

आश्वासन के बाद भी किसानों का गुस्सा पूरी तरह ठंडा नहीं हुआ। चौधरी विजेंद्र सिंह ने एक सीधा सवाल उठाया। केसर मिल से छीने गए खरीद केंद्र दूसरी मिलों को दिए गए हैं, लेकिन वे यहां से 150 किलोमीटर दूर हैं। किसान अपना गन्ना वहां तक पहुंचाने का किराया कैसे देगा, और क्या गारंटी है कि दूसरी मिलें समय पर भुगतान कर ही देंगी।

जिला गन्ना अधिकारी ने इस पर समय पर भुगतान दिलाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद किसानों ने ब्याज सहित भुगतान की मांग करते हुए एसडीएम गोपाल शर्मा को दो सूत्री ज्ञापन सौंपा। साथ में साफ चेतावनी भी दी। अगर दिवाली से पहले भुगतान नहीं हुआ तो त्योहार के बाद नैनीताल हाईवे पर चक्का जाम किया जाएगा।

नीलामी की कहानी: दो बार टली, एक बार रद्द हुई

यह धरना अचानक नहीं फूटा है। इसके पीछे नीलामी की लंबी और उलझी कहानी है। दैनिक जागरण की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक केसर मिल की कुर्क की गई 11.447 हेक्टेयर जमीन की नीलामी के लिए 24 अक्टूबर की तारीख तय हुई थी, लेकिन बोलीदाताओं के चेक लेकर पहुंचने के कारण वह टल गई। नियम के मुताबिक बोली के लिए डिमांड ड्राफ्ट जरूरी था, और चार में से सिर्फ एक खरीदार डीडी लेकर पहुंचा था।

उप जिलाधिकारी ने सप्ताहभर बाद नीलामी होने की बात कही थी, लेकिन पांच दिन बीतने के बाद भी नई तारीख घोषित नहीं हो सकी। इससे पहले 31 मई को इसी जमीन की 28.05 करोड़ रुपये में नीलामी हो भी गई थी, पर कम कीमत का मुद्दा उठने पर वह निरस्त कर दी गई। बीच में मिल का सौदा 431 करोड़ रुपये में होने की बात भी सामने आई। खरीदने वाले फिरोजाबाद के अवध ग्रुप के चेयरमैन ने बकाया गन्ना मूल्य के लिए 55 करोड़ और मिल कर्मियों के वेतन के लिए 11 करोड़ रुपये के चेक दिए थे, लेकिन बाद में दोनों चेक बाउंस हो गए।

बकाये की रकम को लेकर अखबारों में थोड़ा अंतर भी है। अमर उजाला ने धरने की खबर में ₹162 करोड़ लिखा है, जबकि जागरण की रिपोर्ट में यही बकाया करीब ₹170 करोड़ बताया गया है। रकम के इस फर्क के बावजूद एक बात पर सब सहमत हैं, पैसा बहुत बड़ा है और बहुत पुराना है।

बहेड़ी के किसान के लिए इसका मतलब क्या है

सबसे पहले, यह समझना जरूरी है कि नीलामी से मिलने वाली रकम ही बकाया चुकाने का रास्ता है। जमीन बिकेगी तभी पैसा आएगा। इसलिए नीलामी की नई तारीख पर नजर रखना सबसे अहम है। समिति परिसर या जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से इसकी जानकारी मिलती रहेगी।

दूसरा, जिन किसानों के केंद्र दूसरी मिलों को दिए गए हैं, वे गन्ना पहुंचाने से पहले दूरी और किराए का हिसाब जरूर लगा लें। पर्ची और तौल की रसीद संभालकर रखें, क्योंकि भुगतान में देरी होने पर यही कागज काम आएंगे। नियम के मुताबिक मिल को 14 दिनों के भीतर गन्ना मूल्य चुकाना होता है। देरी होने पर ब्याज की मांग का भी प्रावधान है, जिसकी मांग इस धरने में भी उठी है।

तीसरा, हाईवे जाम की चेतावनी से साफ है कि मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा है। दिवाली से पहले भुगतान होता है या नहीं, यही तय करेगा कि आंदोलन आगे किस दिशा में जाएगा। किसी भी समस्या के लिए गन्ना विकास विभाग का टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 काम करता है।

मुख्य बातें

  • बहेड़ी की केसर चीनी मिल पर ₹162 करोड़ गन्ना बकाये को लेकर करीब 2000 किसानों ने गन्ना समिति परिसर में धरना दिया; 75 हजार किसान प्रभावित बताए गए हैं।
  • जिला गन्ना अधिकारी ने दिवाली से पहले मुड़िया मुकर्रमपुर की कुर्क जमीन की नीलामी कराकर भुगतान का आश्वासन दिया है।
  • किसानों ने ब्याज सहित भुगतान की मांग के साथ दो सूत्री ज्ञापन दिया और दिवाली तक भुगतान न होने पर नैनीताल हाईवे जाम करने की चेतावनी दी है।

स्रोत: अमर उजाला (30 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (29 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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