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आज बरेली कमिश्नरी पर किसानों का धरना, गन्ना ₹500 की मांग पर अड़े किसान

✍️ Aamir Raza · 🗓 03 Nov 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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आज बरेली कमिश्नरी पर किसानों का धरना, गन्ना ₹500 की मांग पर अड़े किसान

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने आज, 3 नवंबर को बरेली मंडलायुक्त कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन की घोषणा की है। संगठन की मांग सीधी है। गन्ने का न्यूनतम लाभकारी मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल घोषित किया जाए, और वह भी पेराई सत्र शुरू होने से पहले। पीलीभीत के जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह के आवास पर रविवार को हुई बैठक में इस प्रदर्शन की रणनीति तय की गई, और उसके बाद इसकी घोषणा सार्वजनिक की गई।

₹500 की मांग क्यों उठ रही है

मंजीत सिंह ने बैठक में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। डीजल, खाद, कीटनाशक और मजदूरी महंगी हुई है, पर गन्ने का भाव वहीं का वहीं है। इसी वजह से किसान आर्थिक तंगी में हैं। संगठन का कहना है कि बढ़ती लागत के हिसाब से मौजूदा भाव पर गन्ना बेचना घाटे का सौदा बन गया है।

संगठन ने एक और मांग भी जोड़ी है। चीनी मिलों पर पिछले सत्र का जो बकाया गन्ना मूल्य है, उसका ब्याज सहित तत्काल भुगतान कराया जाए। यानी सिर्फ नया भाव ही नहीं, पुराना बकाया भी ब्याज के साथ मिले। किसान नेताओं का तर्क है कि जब मिल समय पर भुगतान नहीं करती, तो ब्याज का बोझ भी किसान पर नहीं पड़ना चाहिए।

पूरे प्रदेश में एक साथ प्रदर्शन

यह धरना सिर्फ बरेली मंडल तक सीमित नहीं है। संगठन ने 3 नवंबर को प्रदेश के सभी 18 मंडलों में प्रदर्शन करने की घोषणा की है। प्रदेश अध्यक्ष चौधरी हरनाम सिंह वर्मा ने कहा है कि गन्ना मूल्य तय करते समय किसानों की आर्थिक स्थिति और उत्पादन लागत को ध्यान में रखा जाना चाहिए, पर कुछ अधिकारी मिलों के पक्ष में रिपोर्ट भेज रहे हैं। संगठन ने मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

प्रदर्शन के पीछे फसल नुकसान का मुद्दा भी है। संगठन के मुताबिक लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, हरदोई और शाहजहांपुर समेत कई जिलों में जलभराव से किसानों को नुकसान हुआ है। गन्ना और धान की फसल पानी में डूबी रही, जिससे पैदावार घटी। ऐसे में किसान चाहते हैं कि सरकार फसल नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा भी दिलाए।

मुरादाबाद में ₹600 की मांग, बरेली में ₹500

दिलचस्प बात यह है कि अलग-अलग मंडलों में मांग की रकम अलग है। मुरादाबाद मंडल में संगठन 3 नवंबर को ही मंडल मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन और पंचायत कर रहा है, पर वहां मांग ₹600 प्रति क्विंटल की है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह रंधावा ने कहा है कि किसी भी कीमत पर ₹600 प्रति क्विंटल से कम गन्ना मूल्य मंजूर नहीं होगा। उन्होंने कांठ तहसील क्षेत्र के गांवों में नुक्कड़ सभाएं करके किसानों को पंचायत में पहुंचने का आह्वान किया है, और मंडलायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।

मेरठ में भी 3 नवंबर को किसान महापंचायत प्रस्तावित है। यानी एक ही दिन प्रदेश के कई मंडलों में गन्ना मूल्य को लेकर आवाज उठ रही है। मांग की रकम में फर्क भले हो, मुद्दा एक ही है। पेराई शुरू होने से पहले भाव घोषित हो।

पेराई शुरू हो गई, भाव की घोषणा अभी बाकी

2026-27 पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य (SAP) की घोषणा अभी बाकी है, पर पेराई शुरू हो चुकी है। पिछले पेराई सत्र 2025-26 में अगेती प्रजाति का मूल्य ₹400 प्रति क्विंटल और पछेती का ₹390 प्रति क्विंटल था। इस बार किसान उसी पुराने भाव पर गन्ना देने को तैयार नहीं हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बागपत की मलकपुर चीनी मिल से पेराई शुरू हो चुकी है, और नवंबर के पहले सप्ताह में ज्यादातर मिलों के चलने की उम्मीद है। राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल महासंघ के आंकड़ों के मुताबिक 31 अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश में सिर्फ 3 मिलों ने पेराई शुरू की थी, जबकि पिछले साल इसी समय 10 मिलें चल रही थीं। बारिश ने कटाई और आपूर्ति दोनों को धीमा किया है। इसका सीधा मतलब यह है कि मिलें चल रही हैं, पर किसान को अभी यह नहीं पता कि उसे अपने गन्ने का क्या भाव मिलेगा।

किसान के लिए इसका मतलब क्या है

जो किसान इस सत्र में गन्ना दे रहे हैं, उनके लिए सबसे जरूरी बात पर्ची और भुगतान का रिकॉर्ड संभालकर रखना है। पर्ची पर तौल, प्रजाति और केंद्र का नाम साफ दर्ज हो, यह जांच लें। भुगतान में देरी हो तो गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

दूसरी बात, भाव की घोषणा पर नजर रखें। धरना-प्रदर्शन का मकसद यही है कि सरकार पर दबाव बने और भाव जल्द घोषित हो।

आगे क्या होगा

आज के धरने में मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। सरकार की तरफ से भाव को लेकर अभी कोई नई घोषणा नहीं आई है। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह लड़ाई ज्ञापन तक सीमित रहती है या सड़क पर और बड़ी होती है।

मुख्य बातें

  • भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) आज, 3 नवंबर को बरेली मंडलायुक्त कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर रही है।
  • मुख्य मांग: गन्ने का न्यूनतम लाभकारी मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल घोषित हो, और पिछले सत्र का बकाया ब्याज सहित मिले।
  • 2026-27 पेराई सत्र के लिए SAP की घोषणा अभी बाकी है, जबकि पश्चिमी यूपी में पेराई शुरू हो चुकी है।

स्रोत: अमर उजाला (2 नवंबर 2026), नवभारत टाइम्स, चिनीमंडी/नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (2 नवंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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