बरेली के किसानों का गन्ना अब 3 जिलों में, 2 मिलें बंद — 10 नवंबर से पेराई

बरेली के गन्ना किसान की इस बार सबसे बड़ी उलझन पर्ची नहीं, मंजिल है — उसका गन्ना जाएगा कहां? जिले की दो चीनी मिलें इस पेराई सत्र में चलने वाली नहीं हैं। प्रशासन ने तस्वीर साफ कर दी है: केसर चीनी मिल बहेड़ी और ओसवाल चीनी मिल नवाबगंज को इस बार गन्ना आवंटित ही नहीं किया गया है।
21 अक्टूबर को नवीन पेराई सत्र के लिए गन्ना क्षेत्रों का आवंटन जारी कर दिया गया। इसके साथ ही बरेली के किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि जिले में 1,01,654 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने का उत्पादन हो रहा है। अब यह गन्ना पीलीभीत, शाहजहांपुर और रोजा की चीनी मिलों तक भेजा जाएगा।
बहेड़ी के पुराने सेंटर अब कहां भेजे जाएंगे
बहेड़ी चीनी मिल के गन्ना सेंटरों का नया बंटवारा हो चुका है। 11 सेंटर फरीदपुर चीनी मिल को, 12 सेंटर मीरगंज चीनी मिल को, 3 सेंटर सेमीखेड़ा को, 5 सेंटर पीलीभीत, 9 सेंटर निगोही, 9 सेंटर मिलक नरायनपुर और 7 सेंटर रोजा चीनी मिल को आवंटित किए गए हैं।
कुल आंकड़ों में बात करें तो फरीदपुर चीनी मिल को 80 सेंटरों का 245 लाख क्विंटल गन्ना, मीरगंज चीनी मिल को 99 सेंटरों का 229 लाख क्विंटल गन्ना और सेमीखेड़ा चीनी मिल को 14 सेंटरों का 89 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित हुआ है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक त्रिवटीनाथ चीनी मिल को इस बार सिर्फ 6 सेंटरों का 19 लाख क्विंटल गन्ना दिया गया है।
दो मिलें इस सत्र में क्यों नहीं चलेंगी
दोनों मिलों के बंद रहने की जड़ में किसानों का बकाया गन्ना मूल्य है। ओसवाल चीनी मिल नवाबगंज को पिछले पेराई सत्र में भी गन्ना नहीं दिया गया था। इस बार मिल को नीलाम कराकर किसानों का बकाया गन्ना मूल्य चुकाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक नवाबगंज चीनी मिल पर किसानों का बकाया करीब 70 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। 2023-24 के पेराई सत्र में मिल पर 107.12 करोड़ रुपये बकाया था, जिसमें से 91.64 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ, लेकिन 15.48 करोड़ रुपये रह गया। इसके बाद 2024-25 में मिल ने किसानों से 39.45 करोड़ रुपये का गन्ना तो खरीदा, लेकिन एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया। ब्याज जुड़ने के बाद यह रकम करीब 70 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
भुगतान में लगातार विफल रहने पर मिल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की गई, वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी हुआ और मिल की भूमि कुर्क कर ली गई। पुणे के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट की तीन सदस्यीय तकनीकी टीम ने पूरी मिल का मूल्यांकन करीब 180 करोड़ रुपये किया है। अब पूरी मिल को बेचकर किसानों का बकाया चुकाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
बहेड़ी मिल का क्या हाल है
अमर उजाला की सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बहेड़ी और नवाबगंज दोनों चीनी मिलों के वसूली प्रमाणपत्र मामलों की समीक्षा की थी। बैठक में उन्होंने बहेड़ी चीनी मिल के मुड़िया फार्म की नीलामी का व्यापक प्रचार कराने और बिक्री की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। नवाबगंज चीनी मिल के मूल्यांकन की रिपोर्ट आने के बाद तहसील स्तर पर नीलामी की व्यापक तैयारी के आदेश भी दिए गए।
त्रिवटीनाथ मिल की स्थिति
पिछले साल चालू हुई त्रिवटीनाथ चीनी मिल को इस बार महज 6 सेंटरों का 19 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित हुआ है। पिछले साल इस मिल को ज्यादा गन्ना आवंटित हुआ था, लेकिन तकनीकी खराबी आ जाने के कारण मिल ठीक से चल नहीं पाई थी। प्रशासन का कहना है कि इस बार अगर पेराई नियमित होती रही, तो इस मिल के सेंटर बढ़ाए जा सकते हैं।
पेराई कब शुरू होगी
चीनी मिलों में पेराई सत्र दीपावली के बाद ही शुरू होने के आसार दिखाई पड़ रहे हैं। चीनी की बढ़ी कीमतों को देखते हुए अक्टूबर में ही पेराई शुरू कराने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन लगातार हुई बरसात के कारण यह योजना बन नहीं पाई। अब 10 से 15 नवंबर के बीच चीनी मिलों में पेराई शुरू होने की उम्मीद है। पिछले साल 5 से 15 नवंबर के बीच पेराई शुरू हुई थी।
जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी के मुताबिक, बकायेदार बहेड़ी और नवाबगंज चीनी मिलों को गन्ना आवंटित नहीं किया गया है। नवंबर के पहले पखवाड़े में सभी चीनी मिलों में पेराई सत्र शुरू हो जाएगा।
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
बरेली के किसान के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि उसका गन्ना अब ज्यादा दूर की मिल में जाएगा। दूर की मिल यानी ज्यादा ढुलाई का खर्च और नई व्यवस्था को समझने की जरूरत। पर्ची की नई स्थिति को जानने के लिए किसान अपना सट्टा, सेंटर और पर्ची की स्थिति गन्ना समिति या ई-गन्ना ऐप पर पहले ही जांच लें। इससे कटाई और ढुलाई की सही योजना बनाई जा सकेगी, और जिस मिल में गन्ना जाएगा, वहीं से भुगतान की व्यवस्था होगी।
मुख्य बातें
- बरेली की बहेड़ी और नवाबगंज चीनी मिलों को इस पेराई सत्र में गन्ना आवंटित नहीं होगा
- जिले के किसानों का गन्ना अब पीलीभीत, शाहजहांपुर और रोजा की चीनी मिलों में भेजा जाएगा
- पेराई 10 से 15 नवंबर के बीच शुरू होने की संभावना; किसान अपनी पर्ची और सेंटर की स्थिति पहले जांच लें
स्रोत: दैनिक जागरण (बरेली, 21 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (बरेली, 23 सितंबर 2026), डाइनामाइट न्यूज़ (30 सितंबर 2026)
