17 नवंबर को नीलाम होगी बहेड़ी-नवाबगंज मिलों की कुर्क संपत्ति, किसानों को बकाया मिलने की आस

बहेड़ी के गन्ना किसान के मन में पिछले कई महीनों से एक ही सवाल घूम रहा है। मिल बंद पड़ी है, इस सत्र का गन्ना दूसरे जिलों की मिलों को जा रहा है, और पुराना भुगतान अब तक अटका हुआ है। अब इस सवाल का एक तारीख के साथ जवाब मिला है। बरेली की बहेड़ी और नवाबगंज चीनी मिलों की कुर्क संपत्तियों की नीलामी 17 नवंबर को होगी।
शनिवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तारीख पक्की हुई। बोलीदाताओं की संख्या कम होने से यह नीलामी बीते दिनों टल गई थी। इस बार प्रशासन ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है। नीलामी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए बोलीदाताओं को 15 दिन का समय मिलेगा, ताकि इच्छुक खरीदार नियम और कागज पहले से समझकर आएं।
बैठक में क्या-क्या तय हुआ
जिलाधिकारी की बैठक में नीलामी कमेटी का विस्तार किया गया। इसमें एडीएम सिटी अविनाश त्रिपाठी, एसडीएम नवाबगंज सचिन यादव और तहसीलदार नवाबगंज सत्येंद्र कटियार को शामिल किया गया है।
डीएम ने एसडीएम बहेड़ी को राजस्व संहिता नियमावली 2016 के प्रावधानों के तहत नीलामी की प्रक्रिया पूरी कराने और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। पिछली बार नीलामी टलने की एक वजह यह भी रही थी कि मैदान में पर्याप्त बोलीदाता नहीं पहुंचे थे।
बैठक में इससे आगे भी कदम उठाए गए। डीएम ने गन्ना विकास समिति बहेड़ी के प्रभारी सचिव को वर्ष 2025-26 के बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान प्रकरण में मिल प्रबंधन के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने के लिए कहा है। एसडीएम बहेड़ी को चीनी मिल मालिक और निदेशक मंडल के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
यहां तक नौबत कैसे आई
बहेड़ी की केसर चीनी मिल पर किसानों का बकाया कोई छोटी रकम नहीं है। अलग-अलग खबरों में यह बकाया 162 करोड़ रुपये से 170 करोड़ रुपये के बीच बताया गया है। 30 अक्टूबर को करीब दो हजार किसानों ने बहेड़ी गन्ना समिति परिसर में धरना देकर इसी भुगतान की मांग की थी।
बकाया वसूलने के लिए प्रशासन ने मिल की जमीन कुर्क की। केसर मिल की मुड़िया मुकर्रमपुर स्थित 11.447 हेक्टेयर जमीन की नीलामी 24 अक्टूबर को होनी थी, लेकिन वह टल गई। नीलामी के दिन चार खरीदार पहुंचे थे, मगर डिमांड ड्राफ्ट सिर्फ एक ने जमा किया था। तीन लोग चेक लेकर आए थे, जबकि डीडी जमा करना अनिवार्य था।
यह पहला मौका नहीं था जब नीलामी अटकी। 31 मई को इसी जमीन की नीलामी 28.05 करोड़ रुपये में कराई भी गई थी, लेकिन कम कीमत का मुद्दा उठने के बाद उसे निरस्त कर दिया गया। इसके बाद 25 सितंबर को फिर तारीख तय हुई, तभी मिल का सौदा 431 करोड़ रुपये में होने की बात सामने आई। खरीदने वाले फिरोजाबाद के अवध ग्रुप के चेयरमैन ने बकाया भुगतान के लिए 55 करोड़ रुपये और मिल कर्मियों के वेतन के लिए 11 करोड़ रुपये का चेक दिया था। वह चेक बाउंस हो गया और नीलामी की प्रक्रिया फिर पटरी से उतर गई।
नवाबगंज की ओसवाल चीनी मिल की कहानी भी अलग नहीं है। इस मिल का मूल्यांकन 180 करोड़ रुपये कराया जा चुका है। पिछले साल भी इसे गन्ना नहीं दिया गया था और इस बार भी नीलामी कराकर किसानों का बकाया चुकाने की प्रक्रिया चल रही है।
इस सत्र में बहेड़ी के किसान का गन्ना कहां गया
इस पेराई सत्र के लिए गन्ना क्षेत्रों का आवंटन 21 अक्टूबर को जारी हुआ था। उसमें केसर चीनी मिल बहेड़ी और ओसवाल चीनी मिल नवाबगंज को गन्ना आवंटित ही नहीं किया गया। बहेड़ी मिल के सेंटर दूसरे जिलों की मिलों में बांट दिए गए। 11 सेंटर फरीदपुर, 12 मीरगंज, तीन सेमीखेड़ा, पांच पीलीभीत, नौ निगोही, नौ मिलक नरायनपुर और सात रोजा चीनी मिल को मिले हैं।
इस बंटवारे की मार किसान की जेब और समय दोनों पर पड़ी है। कुछ किसानों का गन्ना अब 150 किलोमीटर दूर तक की मिलों को जा रहा है। ढुलाई का खर्च बढ़ा है और पर्ची से लेकर तौल तक की व्यवस्था भी नई मिलों के हिसाब से समझनी पड़ रही है। ऊपर से पुराने बकाए का इंतजार अलग है। यही वजह है कि 17 नवंबर की नीलामी बहेड़ी और नवाबगंज के किसानों के लिए सिर्फ एक प्रशासनिक तारीख नहीं, बल्कि उम्मीद की तारीख बन गई है।
17 नवंबर को क्या देखना होगा
नीलामी की रकम से बकाया चुकाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, लेकिन कितना भुगतान कब मिलेगा, यह बोली की रकम और उसके बाद की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। एक जमीन के टुकड़े की नीलामी से पूरा बकाया चुकाना मुमकिन नहीं है, इसलिए दोनों मिलों की कुर्क संपत्तियों की नीलामी को एक साथ आगे बढ़ाना अहम है।
किसानों के लिए इस बीच सबसे जरूरी काम अपने कागज संभालकर रखना है। पर्ची, तौल की रसीद और पिछले भुगतान का हिसाब अगर एक जगह रखा हो तो बकाया मिलने की प्रक्रिया में दिक्कत कम होती है।
इस बीच 2026-27 सत्र के गन्ना मूल्य की घोषणा अभी बाकी है। खबरों के मुताबिक सरकार ने अब तक इस सत्र का भाव घोषित नहीं किया है। बकाया भुगतान और नए भाव, दोनों का फैसला आने वाले हफ्तों में किसानों की नकदी पर सीधा असर डालेगा।
मुख्य बातें
- बहेड़ी और नवाबगंज चीनी मिलों की कुर्क संपत्तियों की नीलामी 17 नवंबर को होगी, बोलीदाताओं को 15 दिन का समय मिलेगा।
- नीलामी कमेटी में एडीएम सिटी, एसडीएम नवाबगंज और तहसीलदार नवाबगंज को शामिल किया गया है।
- बहेड़ी मिल पर किसानों का 162 से 170 करोड़ रुपये के बीच बकाया बताया जा रहा है, 24 अक्टूबर की नीलामी डीडी की कमी से टल गई थी।
स्रोत: अमर उजाला (1 नवंबर 2026), दैनिक जागरण (29 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (30 अक्टूबर 2026)
