80 हजार किसानों का पैसा फंसा, बरेली की 2 चीनी मिलें नीलाम, 17 नवंबर की तारीख

बरेली के करीब 80 हजार गन्ना किसानों का पैसा दो चीनी मिलों में फंसा हुआ है। नवाबगंज की ओसवाल चीनी मिल और बहेड़ी की केसर चीनी मिल की नीलामी की प्रक्रिया चल रही है। कुर्क जमीन की अगली नीलामी 17 नवंबर को तय हुई है। पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है, पर इन दो मिल क्षेत्रों के किसानों को पुराने बकाये का अब भी इंतजार है।
नवाबगंज की ओसवाल मिल: बकाया कैसे बढ़ता गया
ओसवाल चीनी मिल की हालत पेराई सत्र 2023-24 में ही खराब होने लगी थी। उस सत्र में मिल पर किसानों का 107.12 करोड़ रुपये बकाया हो गया था। बाद में मिल प्रबंधन ने 91.64 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन 15.48 करोड़ रुपये बाकी रह गया।
अगले सत्र में मिल ने किसानों से 39.45 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा, पर एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया। बकाया बढ़कर 54.93 करोड़ रुपये हो गया, जो ब्याज सहित अब करीब 70 करोड़ रुपये है। गन्ना विभाग ने पिछली साल ही इस मिल का गन्ना आवंटन रोक दिया था।
मिल का मूल्यांकन कराने के लिए पुणे के वसंत दादा शुगर इंस्टीट्यूट की तकनीकी टीम को बुलाया गया था। टीम ने पूरी मिल का मूल्यांकन 180 करोड़ रुपये किया। इसी के आधार पर नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन हाईकोर्ट से मिल प्रबंधन को स्थगन आदेश मिल गया है। प्रशासन ने मिल पर ताला लगाकर 22 अक्टूबर को नीलामी की तारीख घोषित की थी।
1996 में स्थापित इस मिल से करीब 40 हजार किसान परिवार जुड़े रहे हैं।
बहेड़ी की केसर मिल: 162 करोड़ का बकाया
बहेड़ी की केसर मिल पर बकाया प्रशासनिक रिकॉर्ड में 162 करोड़ रुपये है, जबकि जागरण की ताजा खबर में यह आंकड़ा 170 करोड़ रुपये बताया गया है। पिछली साल इस मिल में पेराई हुई और किसानों को भुगतान भी मिला, पर पुराना बकाया नहीं मिल सका।
प्रशासन महीनों से मिल की कुर्क संपत्तियां नीलाम कराने की कोशिश कर रहा है। 24 अक्टूबर को कुर्क भूमि की नीलामी होनी थी, पर बोलीदाता डिमांड ड्राफ्ट की जगह चेक लेकर पहुंच गए और नीलामी नहीं हो सकी। अब 17 नवंबर को अगली तारीख तय हुई है।
31 मई को तहसील प्रशासन ने मिल की 11.447 हेक्टेयर जमीन 28.05 करोड़ रुपये में नीलाम कराई थी, पर कम कीमत का मुद्दा उठने पर नीलामी निरस्त हो गई थी। इस बीच मिल का 431 करोड़ रुपये में सौदा होने की बात सामने आई। खरीददार ने बकाये के लिए 55 करोड़ और कर्मचारियों के वेतन के लिए 11 करोड़ रुपये का चेक दिया, पर 66 करोड़ रुपये का चेक बाउंस हो गया और मामला अटक गया।
मिल के सीएमडी हर्ष आर किलाचंद का कहना है कि पूरा भुगतान मिल की बिक्री के बाद ही संभव होगा। 1933 में स्थापित इस मिल को किलाचंद समूह ने बनवाया था।
किसानों का गन्ना अब कहां जाएगा
बहेड़ी चीनी मिल के गन्ना केंद्र दूसरी मिलों को आवंटित कर दिए गए हैं। फरीदपुर के 11, मीरगंज के 12, सेमीखेड़ा के तीन, पीलीभीत के पांच, निगोही के नौ, मिलक नरायनपुर के नौ और रोजा चीनी मिल के सात केंद्रों को गन्ना भेजा जाएगा।
इन मिलों से जुड़े करीब 1,650 कर्मचारी परिवारों की आजीविका पर भी सीधा असर पड़ रहा है। इस सत्र का गन्ना दूसरी मिलों में जाएगा, पर पुराने बकाये का सवाल वहीं खड़ा है।
प्रशासन की सख्ती और मंत्री पर लगे आरोप
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि 10 नवंबर तक भुगतान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठे तो मिल की संपत्तियां सील होंगी और एफआईआर दर्ज होगी। अधिकारियों ने दिवाली से पहले 18 से 20 करोड़ रुपये के आंशिक भुगतान की मांग की थी।
जागरण की खबर में गन्ना विकास राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार पर आरोप है कि उन्होंने इन मिलों को बचाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। खबर के अनुसार उनका जोर बहेड़ी के बोरवली में अपने करीबी की नई त्रिवटीनाथ चीनी मिल पर रहा, जिसका उन्होंने पिछली साल उद्घाटन किया था। इस मिल को इस बार छह केंद्रों का 19 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित किया गया है। मंत्री को फोन लगाया गया, पर कॉल रिसीव नहीं हुआ और वाट्सएप संदेश का भी जवाब नहीं आया।
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
नीलामी और बिक्री की प्रक्रिया से ही इन किसानों के बकाये का रास्ता निकलेगा। 17 नवंबर की नीलामी पर सबकी नजर रहेगी। अगर नीलामी सफल होती है तो वसूली की रकम से भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
किसान अपने बकाये का हिसाब, पर्ची और भुगतान की रसीदें संभालकर रखें। नीलामी और भुगतान की ताजा स्थिति के लिए जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से संपर्क करते रहें। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर भी जानकारी ली जा सकती है।
मुख्य बातें
- बरेली की नवाबगंज ओसवाल मिल (ब्याज सहित करीब 70 करोड़ रुपये) और बहेड़ी केसर मिल (162 से 170 करोड़ रुपये) की नीलामी प्रक्रिया चल रही है, कुर्क जमीन की अगली नीलामी 17 नवंबर को तय है।
- दोनों मिल क्षेत्रों के करीब 80 हजार किसान परिवार और 1,650 कर्मचारी परिवार प्रभावित हैं, केसर मिल के गन्ना केंद्र दूसरी मिलों को आवंटित कर दिए गए हैं।
- प्रशासन ने 10 नवंबर तक ठोस कदम न उठने पर सील और एफआईआर की चेतावनी दी है, मिल प्रबंधन का कहना है कि पूरा भुगतान मिल की बिक्री के बाद ही संभव है।
स्रोत: दैनिक जागरण (5 नवंबर 2026), अमर उजाला (30 अक्टूबर 2026), डाइनामाइट न्यूज़ (3 नवंबर 2026), चिनीमंडी (27 जुलाई 2026)
