आज आखिरी दिन: 10 अक्टूबर तक कराएं पंजीकरण, शरदकालीन गन्ने से 25% ज्यादा उपज

आज 10 अक्टूबर है, और बाराबंकी के गन्ना किसानों के लिए यह तारीख आम दिनों जैसी नहीं है। गन्ना उपज बढ़ोतरी योजना के तहत पंजीकरण और नए सदस्य बनने की अंतिम तिथि आज ही तय की गई है। बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की रौजागांव इकाई ने किसानों से साफ कहा है कि समय रहते पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि विभागीय योजनाओं का लाभ मिल सके। जिन किसानों की फाइल आज तक अधूरी रही, उनके लिए यह घड़ी का खेल है।
दो गांवों में हुई कृषक गोष्ठी, शरदकालीन बुवाई पर जोर
रौजागांव इकाई ने सघन गन्ना विकास योजना के तहत ग्राम उफरौली और कोठरी गौरिया में कृषक गोष्ठी आयोजित की। गोष्ठी का एक ही एजेंडा था: कम लागत में ज्यादा उत्पादन। किसानों को उन्नत गन्ना किस्मों, वैज्ञानिक बुवाई तकनीक और सहफसली खेती की बारीकियां समझाई गईं। अधिकारियों ने अपील की कि आधुनिक तकनीकें अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं।
गन्ना किसान संस्थान, लखनऊ से आए डॉ. अरुण कुमार ने गोष्ठी में शरदकालीन बुवाई के फायदे गिनाए। उनके मुताबिक शरदकालीन गन्ने से बसंतकालीन गन्ने की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक उपज मिलने की संभावना रहती है। इस मौसम में गन्ने का जमाव प्रतिशत भी बेहतर होता है और अर्ली शूट बोरर कीट का प्रकोप नहीं होता। उन्होंने जैविक खाद और जैव उर्वरकों के इस्तेमाल, मिट्टी की जांच और संतुलित पोषण प्रबंधन की भी जानकारी दी।
ट्रेंच विधि से बुवाई, दो पंक्तियों के बीच सहफसल
चीनी मिल के महाप्रबंधक (गन्ना) बृजपाल सिंह ने किसानों को को. 0118, 98014, को.लख. 14201, 16202 और को.शा. 13235 जैसी उन्नतशील गन्ना किस्मों की ट्रेंच विधि से बुवाई करने की सलाह दी। उनका तर्क सीधा था: ट्रेंच में बुवाई से पौधों को जड़ जमाने की अच्छी जगह मिलती है और पानी-खाद का बंटवारा भी ठीक होता है।
सबसे काम की सलाह सहफसली खेती पर थी। बृजपाल सिंह ने बताया कि गन्ने की दो पंक्तियों के बीच जो खाली जगह रह जाती है, उसमें आलू, मटर, सरसों और मसूर जैसी सहफसलें बोई जा सकती हैं। इससे किसान को गन्ने के साथ-साथ एक और आमदनी का रास्ता खुल जाता है। अक्टूबर में बोया गया शरदकालीन गन्ना वैसे भी लंबा मौसम पाता है, इसलिए शुरुआती महीनों में सहफसल का दबाव फसल पर नहीं पड़ता।
दो नई अगेती किस्मों को स्वीकृति, को.0238 से ज्यादा पैदावार का दावा
जिला गन्ना अधिकारी बाराबंकी डॉ. दुष्यंत कुमार ने गोष्ठी में बताया कि किसानों के लिए दो नई अगेती गन्ना किस्मों को.शा. 23232 और को.लख. 21201 को स्वीकृति मिल चुकी है। उनके मुताबिक इन किस्मों से को. 0238 की तुलना में अधिक पैदावार मिलने की संभावना है। गौरतलब है कि 29 सितंबर को हुई किस्म स्वीकृति उप समिति की बैठक में इन्हीं किस्मों को पूरे प्रदेश में खेती के लिए औपचारिक मंजूरी दी गई थी। लाल सड़न से जूझ रहे इलाकों के किसानों के लिए यह विकल्प खास मायने रखता है।
डॉ. दुष्यंत कुमार ने किसानों को नई किस्मों की बुवाई के साथ संतुलित खाद एवं उर्वरक के इस्तेमाल, कीट-रोगों से फसल की सुरक्षा और गन्ने की पेड़ी के बेहतर प्रबंधन की भी सलाह दी। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक डॉ. दीपशिखा ने गन्ना विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों से उनका लाभ उठाने की अपील की।
आज क्या करना है
जो किसान गन्ना उपज बढ़ोतरी योजना में पंजीकरण कराना चाहते हैं, वे आज ही अपनी गन्ना समिति या रौजागांव चीनी मिल के संबंधित कार्यालय में संपर्क करें। बकाया दस्तावेज आज ही जमा कर दें। गोष्ठी में वैज्ञानिकों की सलाह का सार यह था: अक्टूबर की बुवाई में देरी न करें, ट्रेंच विधि अपनाएं, दो पंक्तियों के बीच की खाली जगह को सहफसल से भरें और नई किस्मों को आजमाकर देखें। सही किस्म और सही समय पर बुवाई से अगला पेराई सत्र आपकी जेब के लिए भी अच्छा साबित हो सकता है।
मुख्य बातें
- गन्ना उपज बढ़ोतरी योजना में पंजीकरण और नए सदस्य बनने की अंतिम तिथि आज 10 अक्टूबर 2026 है।
- रौजागांव चीनी मिल की गोष्ठी में ट्रेंच विधि से को. 0118, 98014, को.लख. 14201, 16202 और को.शा. 13235 की बुवाई और आलू-मटर-सरसों-मसूर की सहफसली की सलाह दी गई।
- शरदकालीन गन्ने से बसंतकालीन से लगभग 25% अधिक उपज का दावा; नई अगेती किस्में को.शा. 23232 और को.लख. 21201 स्वीकृत।
स्रोत: publicnews360.in (9 अक्टूबर 2026), uphulchul.com (9 अक्टूबर 2026)।
