गन्ने का भाव ₹500 करने की मांग लेकर बापू भवन पहुंचे किसान, सरकार से मिला यह जवाब

पेराई सत्र शुरू होने में गिने-चुने दिन बचे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को अब तक यह नहीं पता कि इस बार उनका गन्ना किस भाव पर खरीदा जाएगा। 2026-27 के राज्य परामर्शी मूल्य (SAP) की घोषणा अभी बाकी है। इसी घोषणा के लिए दबाव बढ़ाते हुए भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक का एक प्रतिनिधिमंडल लखनऊ के बापू भवन पहुंचा और अपर मुख्य सचिव (गन्ना एवं चीनी उद्योग) वीना कुमारी से मुलाकात कर गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग रखी।
फ्रेंड्स रिपोर्टर की 23 अक्टूबर और हिंदुस्तान सिटी न्यूज की 22 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल में संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक और युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह शामिल थे।
मांग के पीछे की दलील: लागत बढ़ी, भाव ठहरा रहा
धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और करीब 48 लाख किसान परिवार प्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। कृषि मजदूर, परिवहन, चीनी मिलों, कोल्हू और गुड़ उद्योग को मिलाकर लाखों लोगों की आजीविका इसी फसल पर टिकी है।
उनकी सबसे बड़ी दलील लागत से जुड़ी है। डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और कृषि मजदूरी की लागत पिछले वर्षों में लगातार बढ़ी है, लेकिन गन्ने के मूल्य में लागत के अनुरूप बढ़ोतरी नहीं हुई है। किसान को लाभकारी मूल्य मिलना अब जरूरी हो गया है, ऐसा प्रतिनिधिमंडल का कहना है।
दूसरी ठोस दलील चीनी के दामों से जुड़ी है। हिंदुस्तान सिटी न्यूज की रिपोर्ट में केंद्र सरकार के 21 अगस्त 2026 के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 20 जुलाई से 20 अगस्त 2026 के बीच चीनी का औसत खुदरा मूल्य 48.18 रुपये से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गया था। रिपोर्ट का तर्क है कि चीनी के बाजार मूल्य में वृद्धि भी किसानों को बेहतर मूल्य देने का आधार प्रस्तुत करती है।
कोल्हू-क्रेशर का तर्क: मिलों से ज्यादा भाव खुले बाजार में
प्रतिनिधिमंडल की सबसे दिलचस्प दलील कोल्हू और क्रेशर पर हो रही खरीद से जुड़ी है। धर्मेंद्र मलिक के मुताबिक वर्तमान में कोल्हू और क्रेशर पर गन्ने की खरीद 480 रुपये प्रति क्विंटल तक की जा रही है। यानी खुले बाजार में ही किसान का गन्ना 480 रुपये तक बिक रहा है।
अगर मिलों का भाव कोल्हुओं से नीचे रहा तो किसान मिलों के बजाय कोल्हू-क्रेशर को गन्ना बेचेगा, जिससे चीनी मिलों के सामने गन्ना आपूर्ति का संकट खड़ा हो सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने चीनी, एथेनॉल, शीरा और अन्य उप-उत्पादों से मिलों को होने वाली आय को भी गन्ना मूल्य तय करते समय ध्यान में रखने की मांग की।
SAP 2026-27 का इंतजार: पिछले सत्र का भाव क्या था
यहां एक साफ स्थिति समझना जरूरी है। 2025-26 पेराई सत्र के लिए SAP अगेती किस्म का 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया था। 2026-27 सत्र के SAP की घोषणा अभी बाकी है। पश्चिमी यूपी की कुछ मिलों की पेराई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, इसलिए किसानों की नजर अब सीधे सरकार की घोषणा पर टिकी है।
एक ओर भाकियू (टिकैत गुट) गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग पर अड़ा है, तो वहीं भाकियू अराजनैतिक ने 500 रुपये की मांग रखी है। रॉयल बुलेटिन की 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक संगठन ने 16 अक्टूबर को प्रदेशभर के जिलाधिकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा था।
किसान के लिए हिसाब: हर क्विंटल पर 100 रुपये का फर्क
इसे आम किसान की भाषा में समझें। अगर गन्ना 400 रुपये की जगह 500 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदा जाए, तो हर क्विंटल पर 100 रुपये का सीधा फर्क पड़ता है। औसतन 200 क्विंटल गन्ना बेचने वाले किसान के लिए यह करीब 20,000 रुपये ज्यादा की आमदनी का सवाल है। यही वजह है कि SAP की घोषणा किसानों के लिए साल का सबसे बड़ा आर्थिक फैसला है।
मुलाकात में क्या आश्वासन मिला
फ्रेंड्स रिपोर्टर की रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल के दावे पर अपर मुख्य सचिव ने गन्ना मूल्य तय करते समय किसानों की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है। संगठन को उम्मीद है कि पेराई सत्र शुरू होने से पहले SAP की घोषणा कर दी जाएगी।
अब देखना यह होगा कि सरकार किस भाव की घोषणा करती है और वह किसान संगठनों की मांग के कितना करीब बैठती है। पेराई से पहले का यह वक्त ही वह खिड़की है जिसमें गन्ने का भाव तय होता है। किसानों को सलाह है कि घोषणा पर नजर रखें और अपने सट्टे, सर्वे रिकॉर्ड और बैंक खाते की जानकारी पहले से दुरुस्त कर लें, ताकि पेराई शुरू होते ही पर्ची और भुगतान में कोई अड़चन न आए।
मुख्य बातें
- भाकियू अराजनैतिक के प्रतिनिधिमंडल ने बापू भवन में अपर मुख्य सचिव वीना कुमारी से मुलाकात कर पेराई सत्र से पहले SAP 2026-27 में गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग रखी।
- संगठन का तर्क: लागत लगातार बढ़ी है, कोल्हू-क्रेशर 480 रुपये तक गन्ना खरीद रहे हैं और चीनी के दाम भी ऊपर गए हैं।
- 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है; पिछले सत्र में अगेती किस्म का भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल था।
- प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक अपर मुख्य सचिव ने सहानुभूतिपूर्वक विचार का आश्वासन दिया है।
स्रोत: फ्रेंड्स रिपोर्टर (मुजफ्फरनगर, 23 अक्टूबर 2026), हिंदुस्तान सिटी न्यूज (22 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (12 अक्टूबर 2026)
