बलियान के ज्ञापन के 24 घंटे बाद टिकैत ने मांगा ₹600 गन्ना भाव

लखनऊ में गन्ने के भाव को लेकर 24 घंटे के अंदर दो बड़े दबाव बन गए। पहले 22 अक्टूबर को राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल सिंह बलियान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपकर 2026-27 पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग की। अगले ही दिन, 23 अक्टूबर को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की किसान मजदूर महापंचायत में राकेश टिकैत ने भाव को ₹600 प्रति क्विंटल से ऊपर ले जाने की मांग रख दी।
बलियान का ज्ञापन: लागत बढ़ी, भाव भी बढ़े
पीटीआई की खबर के मुताबिक, बलियान ने ज्ञापन में कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, इसलिए 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का मूल्य बढ़ाया जाना चाहिए। रालोद इस समय भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा है। सत्ता पक्ष के सहयोगी दल की ओर से इस तरह ज्ञापन आना अपने आप में एक संकेत है।
ज्ञापन की टाइमिंग अहम है। मिलों में पेराई शुरू हो रही है और किसान पर्ची, तौल व सट्टे की व्यवस्था से जूझ रहे हैं। भाव की घोषणा में देरी सबसे ज्यादा किसान को खलती है, क्योंकि उसी भाव पर उसकी पूरी साल की कमाई टिकी होती है।
महापंचायत से पहले गेट पर रात भर धरना
23 अक्टूबर की महापंचायत लखनऊ के डालीबाग स्थित गन्ना किसान संस्थान में हुई। लेकिन यह बैठक आसानी से नहीं हो पाई। गुरुवार रात संस्थान का मुख्य गेट बंद रहा और आयोजन की अनुमति नहीं मिली। इस पर 1,000 से अधिक किसानों ने परिसर के बाहर सड़क पर ही धरना दे दिया और टिकैत के नेतृत्व में रात भर गेट के बाहर दरी बिछाकर बैठे रहे। टिकैत ने चेतावनी दी कि गेट नहीं खुला तो आंदोलन जिला मुख्यालयों तक फैलाया जाएगा। शुक्रवार सुबह प्रशासन ने अनुमति दी और गेट खोला, तब जाकर महापंचायत हो सकी।
महापंचायत में गौरव टिकैत और तौकीर फरहत भी मौजूद रहे।
टिकैत की मांगें: ₹600 से ऊपर भाव, बकाया तुरंत
मंच से टिकैत ने साफ कहा कि गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल से अधिक होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चीनी का दाम बढ़ा है तो गन्ने का दाम क्यों नहीं बढ़ सकता। टिकैत ने याद दिलाया कि पिछली सरकारों ने एक बार में ₹40 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी, तो मौजूदा सरकार ऐसा क्यों नहीं कर सकती।
गौरव टिकैत ने लागत का हिसाब रखा: डीजल, खाद, कीटनाशक और बीज सब महंगे हुए हैं, पर किसान को वाजिब दाम नहीं मिल रहा। तौकीर फरहत ने कहा कि सत्र शुरू होने से पहले ही मिलों की मनमानी और भुगतान में देरी की शिकायतें आ रही हैं। नेताओं ने कहा कि बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा तक आंदोलन जारी रहेगा।
बकाया भुगतान भी बड़ा मुद्दा रहा। टिकैत ने बजाज समूह की मिलों और सिम्भावली चीनी मिल का नाम लेकर पुराना बकाया तुरंत चुकाने की मांग की। बंद मिलों को ऐसे नए मालिकों को सौंपने की मांग भी उठी जो मिल चला सकें और किसानों का पैसा चुका सकें। धान की समय पर खरीद और भूमि अधिग्रहण मुआवजे को 2013 के दरों पर संशोधित करने की मांग भी मंच से उठी।
मौजूदा भाव क्या है, और 2026-27 का इंतजार क्यों
किसान के लिए यह समझना जरूरी है कि अभी भाव की स्थिति क्या है। 2025-26 सत्र के लिए सरकार ने अगेती किस्म का भाव ₹30 बढ़ाकर ₹400 प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का भाव ₹390 प्रति क्विंटल किया था। यह बढ़ोतरी अक्टूबर 2025 में घोषित हुई थी। 2026-27 सत्र के लिए भाव की घोषणा अभी बाकी है, और यही वजह है कि बलियान के ज्ञापन से लेकर टिकैत की महापंचायत तक, सबकी नजर उसी घोषणा पर टिकी है।
प्रदेश में 122 चीनी मिलें चल रही हैं, और भाव की घोषणा इनके करोड़ों क्विंटल गन्ने की कीमत तय करेगी। किसान संगठनों का कहना है कि ₹400 का भाव लागत के हिसाब से नाकाफी है, इसलिए ₹600 की मांग उठ रही है।
किसान पर इसका क्या असर पड़ेगा
भाव बढ़ा तो फायदा सीधे किसान की जेब में जाएगा। हर क्विंटल पर ₹50 की बढ़ोतरी भी छोटे किसान के लिए हजारों रुपये का फर्क डालती है। लेकिन घोषणा में देरी हुई तो पेराई के शुरुआती हफ्तों में किसान अनिश्चितता में ही गन्ना डालता रहेगा। इसीलिए संगठनों का दबाव है कि घोषणा पेराई के साथ-साथ हो, बाद में नहीं।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा और गर्म होगा। टिकैत ने किसानों से अपील की कि वे मांगें लिखित में अधिकारियों को सौंपें और शांतिपूर्ण दबाव बनाए रखें। उनका कहना था कि बिना लगातार दबाव के भाव अपने आप नहीं बढ़ेगा।
किसान के लिए अभी सबसे काम की बात यही है कि पर्ची, सट्टा और तौल का रिकॉर्ड ठीक रखे, बैंक खाता सक्रिय रखे और बकाया पर नजर बनाए रखे। घोषणा के बाद भुगतान उसी रिकॉर्ड के हिसाब से होगा, और गड़बड़ी सीधे नुकसान पहुंचाएगी।
मुख्य बातें
- 22 अक्टूबर को रालोद प्रदेश अध्यक्ष राजपाल सिंह बलियान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 2026-27 सत्र के लिए गन्ना मूल्य वृद्धि का ज्ञापन सौंपा।
- 23 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना किसान संस्थान में भाकियू महापंचायत हुई, जिसमें राकेश टिकैत ने ₹600 प्रति क्विंटल से अधिक भाव और बकाया भुगतान की मांग की।
- 2025-26 का SAP अगेती ₹400 और सामान्य ₹390 प्रति क्विंटल है; 2026-27 के भाव की घोषणा अभी बाकी है, और किसान संगठनों ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।
स्रोत: पीटीआई (23 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी/हरिभूमि (24 अक्टूबर 2026), फ्री प्रेस जर्नल (अक्टूबर 2025)।
