1 डीडी की कमी से टली 35 करोड़ की नीलामी, बहेड़ी के किसान फिर खाली हाथ

शनिवार की दोपहर बहेड़ी तहसील पहुंचे किसानों के हाथ में पर्चियां नहीं, उम्मीद थी। उम्मीद ये कि केसर चीनी मिल की कुर्क जमीन की नीलामी से दिवाली से पहले बकाये का कुछ हिस्सा ही सही, हाथ आ जाएगा। दोपहर ढलते-ढलते वो उम्मीद भी टूट गई। नीलामी टल गई, और तहसील परिसर में जमा किसान धरने पर बैठ गए।
बहेड़ी के मुड़िया मुकर्रमपुर में केसर चीनी मिल की 11.443 हेक्टेयर जमीन की नीलामी के लिए 24 अक्टूबर की तारीख तय थी। जमीन का न्यूनतम मूल्य करीब 35 करोड़ रुपये रखा गया था। किसानों को आस थी कि जमीन बिकेगी तो मिल पर चढ़ा बकाया चुकाने का रास्ता खुलेगा।
चार खरीदार आए, डीडी सिर्फ एक का
नीलामी में चार खरीदार तहसील पहुंचे थे, जिनमें किच्छा और रुद्रपुर के खरीदार भी थे। दस्तावेजों की जांच में पेंच फंस गया। डिमांड ड्राफ्ट सिर्फ एक खरीदार की ओर से जमा किया गया था। बाकी तीन ने डीडी की जगह चेक जमा किए थे।
नियम साफ हैं। बोली के लिए डिमांड ड्राफ्ट जरूरी है, चेक नहीं चलेगा, और नीलामी के लिए कम से कम तीन पात्र खरीदार चाहिए। एक पात्र खरीदार के दम पर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती थी, इसलिए नीलामी स्थगित करनी पड़ी।
चेक क्यों नहीं चला: पुराना बाउंस अभी ताजा है
चेक को लेकर सख्ती की वजह पुरानी है। मिल की बिक्री के मामले में पहले 55 करोड़ रुपये का चेक बाउंस हो चुका है, इसलिए प्रशासन चेक के भरोसे प्रक्रिया आगे बढ़ाने को तैयार नहीं है।
किसानों की नाराजगी इसी बात पर फूटी कि खरीदार तहसील तक तो पहुंच गए, लेकिन नियमों के मुताबिक डीडी लेकर नहीं आए। किसानों का कहना था कि वे लंबे समय से बकाये का इंतजार कर रहे हैं, और हर बार कोई न कोई अड़चन भुगतान को आगे खिसका देती है।
किसानों की दो मांगें, दोनों खारिज
नीलामी टलने की घोषणा होते ही तहसील परिसर में हंगामा शुरू हो गया। किसान नीलामी हॉल में ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने प्रशासन के सामने दो रास्ते रखे। एक, डीडी जमा करने वाले इकलौते पात्र खरीदार को ही जमीन दे दी जाए। दो, चेक जमा करने वाले तीनों खरीदारों को भी बोली में शामिल होने का मौका दिया जाए।
एडीएम ने दोनों मांगों को नियमों के खिलाफ बताकर खारिज कर दिया। तीखी बहस के बाद एडीएम खुद किसानों के बीच बैठ गए। आखिर में इस भरोसे पर धरना खत्म हुआ कि सोमवार तक बाकी खरीदारों के डीडी जमा होने पर नीलामी जल्द पूरी कराई जाएगी।
35 करोड़ बिक भी जाए तो 162 करोड़ का क्या होगा
यहां एक हिसाब किसानों को साफ-साफ समझ लेना चाहिए। केसर मिल पर किसानों का बकाया करीब 162 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इसमें पेराई सत्र 2024-25 और 2025-26 का बकाया शामिल है। जमीन का न्यूनतम मूल्य 35 करोड़ है। यानी जमीन बिक भी जाए तो इस एक बिक्री से पूरा बकाया नहीं चुक पाएगा। यह रकम बकाये का एक हिस्सा ही भर पाएगी। नीलामी सिर्फ एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। इसके बाद भी बकाया वसूली की लंबी प्रक्रिया बाकी रहेगी।
इससे पहले भी इस जमीन की एक नीलामी निरस्त हो चुकी है। कम कीमत पर हुई बिक्री पर किसानों और गन्ना समिति के सवालों के बाद जिलाधिकारी ने उसे रद्द कर दिया था। यह दूसरी नीलामी थी, और यह भी पूरी नहीं हो सकी।
इस पेराई सत्र के लिए मिल के गन्ना केंद्र पहले ही दूसरी मिलों को दिए जा चुके हैं। यानी बहेड़ी के किसानों का इस बार का गन्ना फरीदपुर, मीरगंज और आसपास की दूसरी मिलों में तुलेगा।
अब किसान क्या करें
सोमवार को नीलामी आगे बढ़ती है या फिर टलती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। तब तक किसानों के लिए तीन काम सबसे जरूरी हैं।
अपने बकाये के कागज संभालकर रखें। पर्ची, तौल की रसीद और अब तक मिले भुगतान का हिसाब यही वो दस्तावेज हैं जिनके दम पर बकाये की लड़ाई लड़ी जाएगी।
अपने गन्ना केंद्र की नई मिल का नाम समिति से लिखित में पक्का कर लें। इस सत्र में गन्ना कहां तुलेगा, यह मुंहजुबानी नहीं, लिखित जानकारी से तय करें।
शिकायत या जानकारी के लिए गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 का इस्तेमाल करें। अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय तहसील या जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से ही नीलामी की ताजा स्थिति पूछें।
अब गेंद प्रशासन और खरीदारों के पाले में है। सोमवार को डीडी जमा होते हैं या नहीं, इसी से तय होगा कि नीलामी आगे बढ़ेगी या किसानों को एक और तारीख का इंतजार करना पड़ेगा।
मुख्य बातें
- बहेड़ी की केसर मिल की 11.443 हेक्टेयर जमीन की 35 करोड़ की नीलामी 24 अक्टूबर को टली; चार खरीदारों में से सिर्फ एक ने डिमांड ड्राफ्ट जमा किया था, नीलामी के लिए कम से कम तीन पात्र खरीदार जरूरी थे।
- चेक स्वीकार नहीं किए गए, क्योंकि पहले मिल बिक्री के मामले में 55 करोड़ का चेक बाउंस हो चुका है; किसानों की दोनों मांगें नियमों के खिलाफ बताकर खारिज कर दी गईं।
- एडीएम ने सोमवार तक डीडी जमा होने पर नीलामी जल्द पूरी कराने का भरोसा दिया है; जमीन बिक भी जाए तो 35 करोड़ से 162 करोड़ के बकाये का एक हिस्सा ही चुक पाएगा।
स्रोत: ईटीवी भारत (बरेली, 25 अक्टूबर 2026), इंफो क्रक्स (बहेड़ी, 24 अक्टूबर 2026), न्यूज़ वॉक्स इंडिया (बरेली, अक्टूबर 2026)।
