₹159.5 करोड़ अटका, धरना एक महीने से जारी: बहेड़ी केसर मिल पर 12 अक्टूबर का ऐलान

बहेड़ी, बरेली। शुक्रवार को बहेड़ी तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान माहौल गरम हो गया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) तराई क्षेत्र का प्रतिनिधिमंडल दो सत्रों के बकाए गन्ना भुगतान को लेकर एसडीएम बहेड़ी से मिला। बातचीत के दौरान बहेड़ी के गन्ना सचिव राजीव सेठ से किसानों की तीखी बहस हो गई। किसानों का कहना है कि केसर चीनी मिल पर करीब ₹159.5 करोड़ रुपये अटके हुए हैं, और अब धैर्य टूट चुका है। इसी बैठक के बाद संगठन ने ऐलान किया है कि 12 अक्टूबर, सोमवार को तहसील परिसर बहेड़ी में विशाल धरना-प्रदर्शन होगा। (इस ऐलान की जानकारी स्थानीय चैनल न्यूज84 की रिपोर्ट में है; बकाया के आंकड़े दो बड़े अखबारों से मिलान किए गए हैं।)
ऐलान के मुताबिक धरने में डीएम बरेली और जिला गन्ना अधिकारी को खुद मौके पर आना होगा। प्रतिनिधिमंडल में सैकड़ों किसान शामिल थे।
₹159.5 करोड़ का हिसाब किताब
गन्ना किसानों का मिल पर कुल ₹159.5 करोड़ रुपये बकाया है। अमर उजाला और लाइव हिंदुस्तान, दोनों की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले सत्र के ₹141.96 करोड़ और इस सत्र के ₹17.55 करोड़ अलग से फंसे हैं। दो सत्रों का पैसा एक साथ अटकने से कई परिवारों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया है, और रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
धरना एक महीने से जारी, बारिश भी नहीं हिला पाई
यह आंदोलन कोई एक दिन का नहीं है। करीब एक महीने पहले भाकियू (भानु) के बैनर तले किसानों ने केसर मिल के डिस्टलरी गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था, जो आज भी जारी है। दूसरे दिन की रिपोर्ट के मुताबिक रात में तेज बारिश होने के बावजूद किसान धरना स्थल पर डटे रहे।
भाकियू भानु के तराई क्षेत्र के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर अमर सिंह और प्रदेश प्रवक्ता जुबैर सिद्दीकी का कहना है कि जब तक पूरा भुगतान नहीं हो जाता, आंदोलन नहीं रुकेगा। तराई के प्रदेश प्रभारी नितिन सिरोही और मुख्य महासचिव शाहिद अंसारी भी धरने में मौजूद रहे। धरने को स्थानीय सभासदों और भीम आर्मी का समर्थन भी मिला है। किसानों का बड़ा आरोप प्रशासन पर है: अगर समय रहते मिल पर थोड़ा-थोड़ा करके भुगतान का दबाव बनाया जाता, तो आज ₹159 करोड़ का पहाड़ नहीं खड़ा होता।
नीलामी स्थगित, खरीदार के चेक का कोई पता नहीं
मामले का सबसे उलझा हुआ हिस्सा मिल की जमीन की नीलामी है। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक 31 मई को मिल की 11.447 हेक्टेयर जमीन ₹28.05 करोड़ में नीलाम हुई थी, जिसे कारोबारी आदेश पांडे ने खरीदा था। किसानों और गन्ना समिति बोर्ड का सवाल था कि करीब ₹100 करोड़ की संपत्ति इतनी कम कीमत पर कैसे बिक गई। बोर्ड ने नीलामी रद्द कर नए सिरे से प्रक्रिया की मांग की, जिसके बाद प्रशासन बैकफुट पर आया। नए खरीदारों ने डिमांड ड्राफ्ट जमा किए, लेकिन अब नीलामी स्थगित हो गई है और नए खरीदार के चेक का कोई अता-पता नहीं है। नीलामी की रकम से ही बकाया चुकाने का रास्ता खुलना था, इसलिए यह देरी किसानों के लिए सबसे बड़ा झटका है।
बरेली जिले में ऐसा माहौल सिर्फ बहेड़ी में नहीं है। नवाबगंज की ओसवाल चीनी मिल को ₹74 करोड़ बकाए पर सील किया जा चुका है, और वहां 22 अक्टूबर को नीलामी तय है।
1933 की मिल, आज बंदी के कगार पर
केसर चीनी मिल कोई नई मिल नहीं है। 1933 में किलाचंद समूह ने इसकी स्थापना की थी, और यह क्षेत्र की सबसे पुरानी औद्योगिक इकाइयों में गिनी जाती है। शुरुआत में पेराई क्षमता 800 टन प्रतिदिन थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 7200 टन कर दिया गया। परिसर में डिस्टलरी और खोई आधारित पावर प्लांट भी चलते रहे हैं।
मिल अध्यक्ष शरत मिश्र का कहना है कि मिल को बंद न होने देने के भरसक प्रयास हो रहे हैं, क्योंकि बंदी से हजारों परिवार प्रभावित होंगे। लेकिन किसानों की नजर में आर्थिक संकट की कीमत उनकी जेब से चुकाई जा रही है।
किसानों के लिए अब क्या करना चाहिए
पहली बात: अपना गन्ना बकाया और भुगतान की स्थिति eGanna ऐप से घर बैठे देख सकते हैं। पर्ची और बकाये से जुड़ी शिकायत के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 काम करता है।
दूसरी बात: बैंक खाते की केवाईसी और खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर अपडेट रखें, ताकि भुगतान जारी होते ही कोई अड़चन न आए। जिन किसानों का पैसा दो सत्रों से फंसा है, वे गन्ना समिति के सचिव से लिखित बकाया प्रमाणपत्र ले लें, जो आगे की किसी भी कार्रवाई में काम आएगा।
12 अक्टूबर का महाधरना इस मामले का अगला बड़ा पड़ाव है। अगर उस दिन डीएम और जिला गन्ना अधिकारी वाकई बहेड़ी आते हैं और भुगतान की ठोस समयसीमा तय होती है, तो दो सत्रों से बकाए में फंसे किसानों को पहली बार साफ उम्मीद मिल सकती है।
मुख्य बातें
- केसर चीनी मिल (बहेड़ी, बरेली) पर किसानों का ₹159.5 करोड़ बकाया: पिछले सत्र के ₹141.96 करोड़ और इस सत्र के ₹17.55 करोड़।
- भाकियू (भानु) का अनिश्चितकालीन धरना मिल के डिस्टलरी गेट पर एक महीने से जारी; बारिश के बावजूद किसान डटे रहे।
- भाकियू टिकैत ने 12 अक्टूबर (सोमवार) को तहसील परिसर बहेड़ी में महाधरने का ऐलान किया है; मिल की जमीन की नीलामी स्थगित, नए खरीदार के चेक का कोई पता नहीं।
स्रोत: अमर उजाला (1 सितंबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (1-2 सितंबर 2026), जागरण (पहलू विशेष रिपोर्ट), न्यूज84 (3 अक्टूबर 2026, ग्राउंड रिपोर्ट)
