खाद लिया नहीं, फिर भी कटे ₹1.10 लाख! 150 गन्ना किसानों के खाते से 1 करोड़ गायब

बड़ौत के लुहारी गांव के किसान प्रवीण ने कभी समिति से खाद लिया ही नहीं। फिर भी उनके गन्ना भुगतान में से 1 लाख 10 हजार रुपये काट लिए गए। कागजों में वजह लिखी थी खाद का बकाया। यही कहानी गुराना गांव के सत्यवीर की है। उनके खाते से 60 हजार रुपये उसी तरह काट लिए गए।
यह दो किसानों का किस्सा नहीं है। अमर उजाला की 12 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, सहकारी गन्ना विकास समिति मलकपुर से जुड़े 25 गांवों के 150 से ज्यादा किसानों के नाम पर खाद का फर्जी बकाया दिखाकर उनके गन्ना भुगतान से करीब 1 करोड़ रुपये काट लिए गए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई किसान नौ साल से अपने पैसे की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
कागजों में खाद बांटी, असल में बाजार में बेची
पूरे मामले का खेल उस व्यवस्था पर टिका है, जिसे कभी किसानों की सुविधा के लिए बनाया गया था। सहकारी गन्ना विकास समिति से जुड़े किसानों को समिति से उधार खाद मिल जाती है। खाद लेने पर किसान के खाते में मात्रा और कीमत दर्ज हो जाती है। उधार ली गई खाद की रकम बकाए के रूप में दर्ज रहती है, और बाद में जब गन्ने का भुगतान होता है, तो यही रकम काट ली जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार इसी व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया। किसानों के रिकॉर्ड में खाद की फर्जी प्रविष्टियां दर्ज कर दी गईं, जबकि उन्होंने खाद लिया ही नहीं था। जिस खाद को कागजों में किसानों के नाम पर जारी दिखाया गया, उसे असल में बाजार में बेच दिया गया और मिली रकम समिति के कर्मचारियों ने हजम कर ली। यानी किसान के नाम पर माल आया, कागज पर कटौती हुई, लेकिन फायदा किसी और की जेब में गया।
पहले भी यही पैटर्न, जांच के आदेश तब भी हुए थे
यह पहली बार नहीं है जब मलकपुर समिति के किसानों के खाते पर सवाल उठे हैं। अमर उजाला की ही एक पुरानी रिपोर्ट में सिरसली गांव का मामला सामने आया था। वहां किसानों के गन्ना बांड के खातों से लाखों रुपये काट लिए गए थे। तरीका वही था उधार खाद उठाना दिखाकर कटौती।
उस रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016-17 और 2017-18 में की गई कटौतियों के नाम-पते भी सामने आए थे। परेशान किसानों ने एसडीएम से शिकायत की थी। उस समय एडीएम अमित कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए थे और समिति के चेयरमैन धूम सिंह ने कहा था कि समिति सचिव से रिपोर्ट मांगी गई है और अगर कोई काम नियम विरुद्ध हुआ है तो कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद अब एक बार फिर 25 गांवों के किसानों के साथ वही पैटर्न दोहराए जाने का आरोप है।
किसान के लिए सबसे बड़ा सवाल: मेरा पैसा कब आएगा?
पेराई सत्र सिर पर है और बागपत में गन्ने की कटाई शुरू होने वाली है। ऐसे समय में किसानों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि पुराना बकाया कब मिलेगा और नया भुगतान कहीं इसी तरह कागजी कटौतियों में न फंस जाए। बागपत जिले में गन्ना भुगतान को लेकर पहले से तनाव है। किनौनी मिल पर किसानों के करीब 20 करोड़ और भैंसाना मिल पर करीब 9 करोड़ रुपये बकाया होने पर जिला गन्ना अधिकारी पहले ही दोनों मिलों को नोटिस जारी कर चुके हैं।
ऐसे में किसानों के लिए अपने खाते की जांच सबसे जरूरी कदम है।
अपने खाते की जांच कैसे करें
पहला काम है समिति में जाकर अपना खाद खाता रजिस्टर दिखाने को कहना। हर प्रविष्टि के सामने अपना हस्ताक्षर या अंगूठा मिलाएं। जिस एंट्री पर आपके हस्ताक्षर न हों, उसे निशान लगाकर लिखित में नोट कराएं।
दूसरा, अब से खाद लेते समय रसीद हर हाल में लें। बिना रसीद की कोई एंट्री अपने नाम स्वीकार न करें।
तीसरा, गन्ना भुगतान के समय पर्ची या एसएमएस में कटौती का पूरा ब्यौरा देखें। अगर कोई कटौती ऐसी है जिसका कारण आप नहीं जानते, तो समिति से लिखित स्पष्टीकरण मांगें। मौखिक जवाब पर भरोसा न करें।
और अगर समिति स्तर पर सुनवाई न हो, तो जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय में लिखित शिकायत दें। एसडीएम को भी शिकायती पत्र दिया जा सकता है, जैसा सिरसली के किसानों ने पहले किया था। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
गन्ना बकाए पर ब्याज का हक याद रखें
एक बात और ध्यान रखने लायक है। गन्ना मूल्य का भुगतान तय समय के भीतर होना चाहिए। देरी पर कानून में ब्याज का प्रावधान है, और सुप्रीम कोर्ट ने बकाया गन्ना मूल्य पर 15 प्रतिशत ब्याज के फैसले को बरकरार रखा है। यानी देर से भुगतान पर किसान को मूल रकम के साथ ब्याज का भी हक बनता है।
मुख्य बातें
- बागपत की मलकपुर सहकारी समिति में 150 से ज्यादा किसानों के नाम पर फर्जी खाद बकाया दिखाकर गन्ना भुगतान से करीब 1 करोड़ रुपये काटने का आरोप (अमर उजाला, 12 अक्टूबर 2026)।
- लुहारी गांव के प्रवीण के 1.10 लाख और गुराना गांव के सत्यवीर के 60 हजार रुपये काटे गए, बिना खाद लिए।
- सिरसली गांव में 2016-17 और 2017-18 में भी यही पैटर्न सामने आया था; किसानों को अपना खाद खाता रजिस्टर जांचना चाहिए और गलत एंट्री पर जिला गन्ना अधिकारी या एसडीएम को लिखित शिकायत देनी चाहिए।
स्रोत: अमर उजाला (बागपत संस्करण), 12 अक्टूबर 2026; अमर उजाला, बागपत — समिति कटौती की पुरानी रिपोर्ट।
